गाजीपुर से तीन खबरें : बाजरा बनाम डाई, गो तस्कर बनाम भाजपा नेता, मंत्री बनाम ठाकुर साहब

Yashwant Singh : गाजीपुर से तीन खबरें सुना रहा हूं. पहली खेती किसानी की. बाजड़ा पिछले साल 1100 रुयये क्विंटल था, इस साल 900 रुपये हो गया है. वहीं, डाई खाद का दाम 600 रुपये बोरी से बढ़कर 1150 रुपये हो गया है. कितनी तेज देश तरक्की कर रहा है और कितना तेज गांवों किसानों का विकास हो रहा है, इसकी ये एक बानगी है. ये जानकारी मुझे पिताजी ने दी, चिंतिंत लहजे में ये कहते हुए कि ”अब खेती-किसानी में कुछ रक्खा नहीं है”.

पुण्य प्रसून बाजपेयी, सुप्रिय प्रसाद, राहुल कंवल और दीपक शर्मा कल क्यों जा रहे हैं लखनऊ?

मोदी अगर राष्ट्रीय मीडिया को पटाने-ललचाने में लगे हैं तो उधर यूपी में अखिलेश यादव से लेकर आजम खान जैसे लोग नेशनल व रीजनल को पटाने-धमकाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़े हुए हैं. आपको याद होगा मुजफ्फरनगर दंगों के बाद आजतक पर चला एक स्टिंग आपरेशन. दीपक शर्मा और उनकी टीम ने मुजफ्फरनगर के कई अफसरों का स्टिंग किया जिससे पता चला कि इस दंगे को बढ़ाने-भभकाने में यूपी के एक कद्दावर मंत्री का रोल रहा, इसी कारण तुरंत कार्रवाई करने से पुलिस को रोका गया.

ब्रेकिंग न्यूज… सुधीर चौधरी की सेल्फी… ब्रेकिंग न्यूज… दीपक चौरसिया का हालचाल …

मैं आज के दिन को मीडिया के लिहाज से शर्मनाक दिन कहूंगा. पत्रकारिता के छात्रों को कभी पढ़ाया जाएगा कि 25 अक्टूबर 2014 के दिन एक बार फिर भारतीय राजनीति के आगे पत्रकारिता चरणों में लोट गई. धनिकों की सत्ता भारी पड़ गई जनता की आवाज पर. कभी इंदिरा ने भय और आतंक के बल पर मीडिया को रेंगने को मजबूर कर दिया था. आज मोदी ने अपनी ‘रणनीति’ के दम पर मीडिया को छिछोरा साबित कर दिया. दिवाली मिलन के बहाने मीडिया के मालिकों, संपादकों और रिपोर्टरों के एक आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए. देश, विदेश, समाज और नीतियों पर कोई बातचीत नहीं हुई. सिर्फ मोदी बोले. कलम को झाड़ू में तब्दील हो जाने की बात कही. और, फिर सबसे मिलने लगे. जिन मसलों, मुद्दों, नारों, आश्वासनों, बातों, घोषणापत्रों, दावों के नाम पर सत्ता में आए उसमें से किसी एक पर भी कोई बात नहीं की.

370 एकड़ वन जमीन सौंपकर उद्योगपति अडानी का कुछ एहसान चुका दिया मोदी जी ने

Yashwant Singh : मुंबई मिरर में आज खबर है कि मोदी की सरकार ने अपने प्रिय उद्योगपति मिस्टर अदानी के गोंडिया पावर प्रोजेक्ट के लिए 370 एकड़ वन जमीन की स्वीकृति दे दी है. यानि 370 एकड़ जंगल की जमीन पर अब अदानी का अधिकार होगा और उनका पावर प्रोजेक्ट चलेगा. अदानी को इस प्रस्ताव पर स्वीकृति पूरे छह साल तक इंतजार के बाद मिली है. यानि जब मोदी जी केंद्र में आए हैं तभी अदानी के प्रस्ताव पर ओके की मुहर लग गई है. और, इस प्रकार अदानी साब ने मोदी के लिए चुनाव में जो जो किया, उसका छोटा सा एहसान मोदी जी ने चुका दिया है. पावर प्रोजेक्ट चले, बिजली बढ़े, इस पर किसी को एतराज न होगा. लेकिन सवाल वही है कि आम जन का भला करने के नाम पर आई मोदी सरकार सबसे तेजी से उद्योगपतियों की जेब भरने में लगी है.

क्या कोई कामरेड या मार्क्सवादी मुझे ये बताएगा कि ….

Yashwant Singh : क्या कोई कामरेड या कोई मार्क्सवादी ये बताएगा मुझे कि जो मैं जानवरों, पंछियों, मछलियों, कीटों, पतंगों, गहरे समुद्री जीवों, अति बर्फीले इलाके के जंतुओं, अतिशय उड़ान भरने वाले प्राणियों.. मतलब ये कि जलचर, थलचर, उभयचर, हवा चर, ” चराचर 🙂 ” …. आदि इत्यादि को लेकर तमाम तरह के प्रोग्राम ढेर सारे चैनलों यथा डिस्कवरी, डिस्कवरी साइंस, एनजीसी, एनीमल प्लानेट, हिस्ट्री आदि इत्यादि पर देखता समझता सोचता रहता हूं, वह कहीं कोई मार्क्सवादी भटकन, अवमूल्यन, पलायनवाद, प्लैटोनिकवाद आदि इत्यादि तो नहीं ?

चाहे जो कहो… सड़ी हुई कांग्रेसी सरकारों से ज्यादा सक्रिय है भाजपा की मोदी सरकार…

Yashwant Singh : चाहे जो कहो… सड़ी हुई कांग्रेसी सरकारों से ज्यादा सक्रिय है भाजपा की मोदी सरकार… कांग्रेसी सरकारों में वामपंथियों और सोशलिस्टों को अच्छी खासी नौकरी, लाटरी, मदद, अनुदान, पद, प्रतिष्ठा टाइप की चीजें मिल जाया करती थी… अब नहीं मिल रही है तो साले ये हल्ला कर रहे हैं … पर तुलनात्मक रूप से निष्पक्ष होकर देखो तो भाजपा की मोदी सरकार जनादेश के दबाव में है और बेहतर करने की कोशिश करती हुई दिख रही है… हां, अगर जनता ने भाजपा को जिताया है तो भाजपा अपने एजेंडे को लागू करेगी ही.. वो एजेंडा हमको आपको पसंद आता हो या न आता हो, ये अलग बात है… पर सक्रियता और जनपक्षधरता को लेकर कांग्रेस व भाजपा में से किसी एक की बात करनी हो तो कहना पड़ेगा कि भाजपा सरकार ज्यादा सक्रिय और ज्यादा सकारात्मक है.

सीईओ और चीफ एडिटर बनने के बाद से बिजी चल रहे Prasoon Shukla को आज घेर कर पकड़ लिया गया

Yashwant Singh : न्यूज एक्सप्रेस के सीईओ और एडिटर इन चीफ बनने के बाद से कुछ ज्यादा बिजी चल रहे अपन के मित्र Prasoon Shukla को आज घेर कर पकड़ लिया गया. हुआ यूं कि मुझे जब बड़े भाई Amitabh Thakur जी और भाभी Nutan Thakur के गाजियाबाद में होने की सूचना मिली तो प्रसून की सहमति के बाद ‘हम चार लंच साथ-साथ’ का कार्यक्रम बन गया. बच्चों से मजदूरी कराने वाले अफसरों के खिलाफ जांच करने गाजियाबाद आए यूपी के चर्चित आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने एक रोज पहले यानि कल अपनी जांच रिपोर्ट में दोषी अफसरों को दंडित करने की संस्तुति की थी.

फारवर्ड प्रेस का मुख्‍य संपादक आयवन कोस्‍का वाकई क्रिश्चियन है भाइयों…

Yashwant Singh : फारवर्ड प्रेस का मुख्‍य संपादक आयवन कोस्‍का वाकई क्रिश्चियन है भाइयों… तभी तो ये हिंदू धर्म के पीछे पड़ा है… मेरा हिंदू या किसी धर्म से रत्ती भर लगाव नहीं है लेकिन इतना जानता हूं कि जो घर फूंके आपने चले हमारे साथ… यानि पहले अपने घर को सुधारो… पहले अपने घर से शुरुआत करो… तो हरे आयवनवा कोस्कवा.. पहले तो क्रिश्चियन धर्म यानि इसाई धर्म के खिलाफ एक विशेषांक निकाल कर दिखा फारवर्ड प्रेस में … उसके बाद हिंदू और इस्लाम धर्म के भीतर की बुराइयों को बताना…

न्यूज चैनल चलाने में फेल हो गया तो हरामखोर अब डाक्यूमेंट्री बना रहा है…

Yashwant Singh : न्यूज चैनल चलाने में फेल हो गया तो हरामखोर अब डाक्यूमेंट्री बना रहा है… क्या करे… न कहीं नौकरी मिल रही है और न इकलौती फिल्म रिलीज हो पा रही है… ऐसे में दुकान को फर्जी ही सही, जगमग दिखाने के लिए कुछ न कुछ तो हवा पानी बनाना ही पड़ेगा… उसकी खोपड़िया नौकरी जाने के बाद गड़बड़ा गई है… न उसकी वाइफ नौकरी कर पा रही है और न खुद वह रोजगार पा रहा है.. ऐसे में दोनों अब ठगने के लिए डाक्यूमेंट्री का ड्रामा सामने लाए हैं… कोई फाइनेंसर फांस लिया होगा… खर्चा दोगुना दिखाकर आधा माल अंटी में दबाएगा और चलता बनेगा…

‘दैनिक जागरण मुर्दाबाद’ क्यों है!

उपर जो तस्वीर है, उसे अयोध्या में रहने वाले Yugal Kishore Saran Shastri ने अपने फेसबुक वॉल पर ‘दैनिक जागरण मुर्दाबाद’ लिखते हुए प्रकाशित किया है. सिर्फ तस्वीर और ‘दैनिक जागरण मुर्दाबाद’ लिखे होने से पूरा माजरा समझ में नहीं आ रहा कि आखिर ये लोग दैनिक जागरण से इतना गुस्सा क्यों हैं. प्रकरण को समझने के लिए मैंने इस तस्वीर को अपने वॉल पर शेयर किया और लिखा कि ….

दुनिया में जो इतनी अधिक हिंसा है, वह सब ईसा मसीह और बुद्ध जैसे लोगों की देन है!

Yashwant Singh : आजकल मैं यूजी कृष्णामूर्ति की एक किताब पढ़ रहा हूं, ”दिमाग ही दुश्मन है”. अदभुत किताब है. इसे पढ़कर लगने लगा कि सोचने विचारने की मेरी पूरी मेथोडोलाजी-प्रक्रिया ही सिर के बल खड़ा हो चुकी है. किताब का सम्मोहन-जादू-बुखार इस कदर चढ़ा कि इसे पढ़ते हुए माउंट आबू गया और दिल्ली आने के बाद भी पढ़ रहा हूं, दुबारा-तिबारा. तभी लगा कि किताब के कुछ हिस्से को आप सभी से साझा किया जाए. इस किताब के कुछ पैरे यहां दे रहा हूं, ताकि किताब के अंदर की आग को आप भी महसूस कर सकें. हालांकि पूरी किताब पढ़ने के बाद ही आप संपूर्णता में समझ कायम कर पाते हैं जो अंततः आपको समझाती है कि सारी समझ, विचार, धारणाएं, ज्ञान, कोशिशें, योजनाएं ही आपकी सबसे बड़ी दुश्मन हैं, इन्हें जला डालो, इनसे मुक्ति पा लो, फिर देखो कैसी निश्चिंतता आती है… ध्यान से पढ़िए नीचे दिए गए कुछ पैरों को… इस किताब को जिस भी साथी ने मुझे भेंट किया है, उसका आभारी हूं. फिलहाल तो याद नहीं आ रहा कि किसने दिया पढ़ने के लिए.

श्रद्धांजलि : यकीन नहीं हो रहा कि मनोज श्रीवास्तव हम लोगों के बीच में नहीं हैं

Yashwant Singh : जब मैंने लखनऊ से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की तो जिन कुछ पत्रकारों का सानिध्य, संग, स्नेह, मार्गदर्शन मिला उनमें से एक मनोज श्रीवास्तव जी भी हैं. पर इनके आज अचानक चले जाने की सूचना से मन धक से कर के रह गया. लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार साथियों ने मुझे फोन पर सुबकते हुए मनोज के निधन की सूचना दी. मनोज श्रीवास्तव शख्स ही ऐसे थे कि वे सभी के प्रिय थे. तभी तो वे लखनऊ की अच्छी खासी पत्रकारिता को त्यागकर बनारस रहने के लिए तबादला लेकर चले गए थे.

मोदी जी, राजस्थान में शराब के नाम पर खरबों रुपये की इस काली कमाई को कौन डकार रहा है? (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : मोदी जी बताओ, उगाही का ये पैसा आप खा रहे हो या वसुंधरा राजे सिंधिया को खाने दे रहे हो… ये तो सच है कि भाजपा शासित केंद्र और राज्य में से कोई एक इस खरबों रुपये के शराब घोटाले का पैसा रोजाना डकार रहा है….  राजस्थान में भाजपा की सरकार है. केंद्र में भाजपा की सरकार है. तो फिर माउंट आबू से लेकर राजस्थान के विभिन्न शहरों में शराब बिक्री के दौरान आम जन से खरबों रुपयों की प्रतिदिन अवैध उगाही का पैसा कहां जा रहा है, कौन खा रहा है. मोदी जी कहते हैं कि न खाउंगा और न खाने दूंगा. पर राजस्थान में घटित हो रहे ‘शराब स्कैंडल’ को देखकर लगता है कि भाजपा के बड़े नेता, भाजपा शासित राजस्थान राज्य के नेता, मंत्री, अफसर जमकर उगाही का पैसा खा रहे हैं.

राजदीप सरदेसाई के धतकरम के बहाने अपने दाग और जी न्यूज के पाप धोने में जुटे सुधीर चौधरी

सौ चूहे खा के बिल्ली चली हज को… जी न्यूज पर पत्रकारिता की रक्षा के बहाने हाथापाई प्रकरण को मुद्दा बनाकर राजदीप सरदेसाई को घंटे भर तक पाठ पढ़ाते सुधीर चौधरी को देख यही मुंह से निकल गया.. सोचा, फेसबुक पर लिखूंगा. लेकिन जब फेसबुक पर आया तो देखा धरती वीरों से खाली नहीं है. युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार ने सुधीर चौधरी की असलियत बताते हुए दे दनादन पोस्टें लिख मारी हैं. विनीत की सारी पोस्ट्स इकट्ठी कर भड़ास पर प्रकाशित कर दिया. ये लिंक http://goo.gl/7i2JRy देखें. ट्विटर पर पहुंचा तो देखा राजदीप ने सुधीर चौधरी पर सिर्फ दो लाइनें लिख कर तगड़ा पलटवार किया हुआ है. राजदीप ने रिश्वत मांगने पर जेल की हवा खाने वाला संपादक और सुपारी पत्रकार जैसे तमगों से सुधीर चौधरी को नवाजा था..

गलती राजदीप सरदेसाई की है, खुद पहले गाली दी और खुद पहले हमला किया (देखें नया वीडियो)

Yashwant Singh : इतना बड़ा फ्रॉड निकलेगा राजदीप सरदेसाई, मुझे अंदाजा नहीं था. नया वीडियो साबित कर रहा है कि पहले गाली राजदीप सरदेसाई ने दी और पहले हमला भी राजदीप सरदेसाई ने किया. लेकिन कांग्रेसी और अंबानी परस्त इस पत्रकार ने घटनाक्रम के वीडियो को अपने हिसाब से संपादित कर केवल वो हिस्सा रिलीज कराया जिसमें उन (राजदीप) पर एनआरआई हमला करते हुए दिख रहा है. इसे देखकर मुझे भी लगा कि किसी पत्रकार पर कोई कैसे भला हमला कर सकता है, वो भी अमेरिका जैसी जगह में. पर अब जब दूसरा पक्ष सामने आ रहा है, पूरा वीडियो सामने आ रहा है तो पता चल रहा है कि राजदीप ने खुद सब तमाशा क्रिएट किया, गाली-हमले की शुरुआत करके.

‘जानेमन जेल’ किताब गाजीपुर जिले में भी उपलब्ध, लंका पर शराब की दुकान के बगल में पधारें

Santosh Singh : जेल भी जानेमन हो सकती है, अगर वो शख्स यशवंत भाई जैसा दिलेर हो… “जानेमन जेल” की एक प्रति खुद लेखक के हाथ से प्राप्त करते हुए… यशवंत भाई की यह अद्भुत किताब मैंने तो पूरी पढ़ ली…और इतनी अच्छी लगी कि एक बैठक में ही पढ़ ली…. एक बात और कहूँगा …”वो जवानी..जवानी नही, जिसकी कोई कहानी न हो”… और यशवंत भाई की यह कहानी रोमांचित करती है!

बीएचयू से एमबीए कर चुके और भारतीय रेल, कानपुर में कार्यरत संतोष सिंह के फेसबुक वॉल से.

जो लोग पत्रकारिता छोड़कर खेती करना चाहते हों, उनके लिए एक जरूरी सूचना…

Yashwant Singh : मेरे पास एक मेल आई है. खेती-किसानी से संबंधित. कई दिनों से इसे न तो डिलीट कर पा रहा और न ही भड़ास पर लगा पा रहा क्योंकि भड़ास तो मीडिया से संबंधित खबरों का पोर्टल है. डिलीट इसलिए नहीं कर पा रहा क्योंकि मेरे भीतर भी एक किसान है और चाहता है कि ये नई चीजें सीखी जाएं. काफी समय से सोच रहा हूं कि क्यों न गांव पर चलकर हर्बल फार्मिंग की तरफ कदम बढ़ाया जाए ताकि पैसे भी बन सकें और खेती-किसानी से जुड़े रहने का सुख भी मिले. तो इसी इच्छा के कारण इस मेल को पढ़ने के बाद भी डिलीट न कर पाया, सोचता रहा कि इसका प्रचार-प्रसार होना चाहिए ताकि मेरे जैसे जो नए व प्रगतिशील किसान बनने को इच्छुक हों, उन्हें फायदा मिल सके. जिन लोगों का पत्रकारिता से मोहभंग हो गया हो और वे गांव जाकर कुछ करना चाहते हों तो ऐसे पत्रकारों के लिए भी यह प्रशिक्षण शिविर काफी लाभदायक हो सकता है…तो लीजिए, खेती किसानी से संबंधित मेल का कंटेंट यहीं फेसबुक पर डाल दे रहा हूं…

भ्रष्टाचारी के यार हजार, सदाचारी अकेले खाए मार… (संदर्भ- डीजीपी सिद्धू, आईपीएस अमिताभ और देहरादून पत्रकार प्रकरण)

Yashwant Singh : पत्रकार अगर भ्रष्ट नेताओं और अफसरों की पैरवी न करें तो भला कैसे जूठन पाएंगे… मार्केट इकानामी ने मोरल वैल्यूज को धो-पोंछ-चाट कर रुपय्या को ही बप्पा मय्या बना डाला तो हर कोई नीति-नियम-नैतिकता छोड़कर दोनों हाथ से इसे उलीचने में जुटा है.. नेता, अफसर, कर्मचारी से लेकर अब तो जज तक रुपये की बहती गंगा में हाथ धो रहे हैं.. पैसे ले देकर पोस्टिंग होती है, पैसे ले देकर गलत सही काम किए कराए जाते हैं और पैसे ले देकर मुकदमें और फैसले लिखे किए जाते हैं, पैसे ले देकर गड़बड़झाले-घोटाले दबा दिए जाते हैं… इस ‘अखिल भारतीय पैसा परिघटना’ से पत्रकार दूर कैसे रह सकता है.. और, जब मीडिया मालिक लगभग सारी मलाई चाट जा रहे हों तो बेचारे पत्रकार तो जूठन पर ही जीवन चलाएंगे न…

हम परम कुशिक्षित और चरम अहंकारी उत्तर भारतीय…. (संदर्भ- मंगलयान प्रोजेक्ट की शीर्ष टीम में सभी दक्षिण भारतीय)

Yashwant Singh : इसरो जैसी महान संस्थाओं में खुद को या खुद के बेटे-बेटियों को भेजने के बारे में हम उत्तर भारतीय परम कुशिक्षित और चरम अहंकारी लोग तभी सोच पाएंगे जब रिश्वत लेने, दलाली करने, जातिवाद फैलाने, धार्मिक पाखंडों के पक्ष में भोंकने और कुत्ते नेताओं के लिए कांव कांव करने से टाइम पाएं. मंगलयान के सफल और चमत्कारी प्रोजेक्ट में शामिल इसरो के प्रमुख लोगों में कोई उत्तर भारतीय खोजे नहीं मिलेगा…

http://www.thenewsminute.com/technologies/201

कैंसर पीड़ित पत्रकार सत्येंद्र को भड़ास की तरफ से पांच हजार रुपये की मदद

Yashwant Singh : कैंसर पीड़ित पत्रकार साथी Satyendra आईसीयू से बाहर आ चुके हैं. उनकी आर्थिक मदद के लिए कई सारे साथी आगे आए हैं, यह अच्छी बात है. भड़ास की तरफ से पांच हजार रुपये देने का जो वादा मैंने किया था, आज पूरा किया. सत्येंद्र के एकाउंट में पैसा क्रेडिट हो गया है.

पत्रकार सत्येंद्र का छह घंटे तक चला मुख कैंसर का आपरेशन, आर्थिक मदद की अपील

दिल्ली के रोहिणी-5 स्थित राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर में पत्रकार सत्येंद्र प्रताप सिंह का कल मुख कैंसर का आपरेशन हुआ. आपरेशन करीब छह घंटे तक चला. डाक्टरों का कहना है कि आपरेशन सफल रहा. सत्येंद्र को अभी आईसीयू में रखा गया है और अगले कुछ दिनों तक आईसीयू में ही रहने की संभावना है. सत्येंद्र दिल्ली में हिंदी बिजनेस डेली बिजनेस स्टैंर्डड में मुख्य उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं.

यशवंत पर लड़की छेड़ने का एफआईआर कराया इसीलिए वह मेरा विरोधी बन गया है : कविता कृष्णन

विवादित नारीवादी कविता कृष्णन से बिहार के गया जिले के चर्चित वकील मदन तिवारी ने फोन पर लंबी बात की.  कविता कृष्णन पर उठ रहे ढेर सारे सवालों, लग रहे ढेर सारे आरोपों को लेकर मदन तिवारी ने उनसे एक-एक कर विस्तार से बात की. पर अपने पाखंडी स्वभाव के अनुरूप कविता बात करते-करते मदन पर ही भड़क गई और उन्हें नानसेंस तक कह डाला. मतलब ये कि बातचीत करने तक का धैर्य नहीं दिखा सकी. यही हड़बड़ी वह राजनीति और नारीवाद में भी करती है जिसके कारण कई जेनुइन लोग बुरी तरह फंस गए, आत्महत्या करने को मजबूर हुए या उनकी इज्जत तार-तार कर दी गई. कविता की ओछी मानसिकता और टीआरपी खोर महिलावादी सक्रियता को लेकर एक बड़ा खेमा विरोध में खड़ा हो चुका है. इसी सबको लेकर मदन ने कविता से बातचीत की और उनका पक्ष जानना चाहा.

Kavita Krishnan

पहले यश मेहता को गालियां दी, नौकरी से निकाला गया तो भड़ास पर खबर छपने के कारण यशवंत को गालियां दे रहा

Yashwant Singh :  कल रात एक बंदे ने मुझे फोन किया और बिना नाम पहचान बताए धाराप्रवाह माकानाका करने लगा यानि गालियां बकने लगा. खूब दारू पिए हुए लग रहा था. उससे मैं पूछता रह गया कि भाई साब आप कौन हैं, क्या समस्या है.. पर वो सिवाय गाली बकने के दूसरा कोई काम नहीं कर रहा था, न सुन रहा था, न सवालों का जवाब दे रहा था. वह सिर्फ गालियां बकता जा रहा था. फोन कटा तो मैं हंसा. उस बंदे का नंबर फेसबुक पर डाला और फेसबुकिया साथियों से पता लगाने को कहा कि ये कौन शख्स है, जरा काल कर के इससे पूछें.

Divya Ranjan