‘दैनिक जागरण मुर्दाबाद’ क्यों है!

उपर जो तस्वीर है, उसे अयोध्या में रहने वाले Yugal Kishore Saran Shastri ने अपने फेसबुक वॉल पर ‘दैनिक जागरण मुर्दाबाद’ लिखते हुए प्रकाशित किया है. सिर्फ तस्वीर और ‘दैनिक जागरण मुर्दाबाद’ लिखे होने से पूरा माजरा समझ में नहीं आ रहा कि आखिर ये लोग दैनिक जागरण से इतना गुस्सा क्यों हैं. प्रकरण को समझने के लिए मैंने इस तस्वीर को अपने वॉल पर शेयर किया और लिखा कि ….

Yashwant Singh : किस बात पर ये लोग दैनिक जागरण से इतना गुस्सा हैं, पता नहीं लेकिन मुझे अच्छा लग रहा है क्योंकि दैनिक जागरण वालों ने हम भड़ासियों पर फर्जी मुकदमा कर रखा है, इसलिए जागरण विरोध का कोई मौका दिखता है तो उसे छोड़ नहीं पाते हम. ये मत कहना कि आप तो उदात्त हैं, महान हैं, इसलिए बदले की भावना से आप काम नहीं करते.. तो फिर दैनिक जागरण को लेकर ऐसा क्यों… इस पर मेरा जवाब है कि लगातार महान और उदात्त नहीं रहा जा सकता… दम घुटने लगता है…. ऐसे में खुद डिग्रेड कर आम, छोटा, नीच आदमी बन जाता हूं.. तब, महानता और उदात्तता को तेल लेने भेज देता हूं और ईंट का बदला ईंट टाइप का तालिबानी व्यवहार सोचने करने लगता हूं … मैं ऐसा क्यों हूं… मैं ऐसा क्यों हूं 🙂 🙂

मेरे इस स्टेटस पर कई लोगों के कमेंट आए और कुछ एक साथियों ने इनबाक्स मैसेज कर नाम न छापने बताने की शर्त पर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी. एक साथी ने जो मैसेज भेजा, वो इस प्रकार है- 

”बात 2004-05 की है. दैनिक जागरण की प्रतियां जलाने की इस पांच सदस्यीय टीम का नेतृत्व कर रहे युगुल किशोर जी ने कोई आयोजन कराया था लखनऊ में या सम्भवतः आयोजन में अतिथि के तौर पर गए थे. ‘तुलसी पथ प्रदर्शक या पथ भ्रष्टक’ उक्त आयोजन का विषय था. आयोजन में कथित तौर पर राम की तस्वीर पर जूते की माला पहनाई जाने लगी और तस्वीर को जूते के नीचे कुचला जाने लगा. किसी ने पुलिस को इत्तला कर दी. मुलायम सिंह का शासन था. युगुल किशोर वरिष्ठ पत्रकार शीतला सिंह के खासमखास माने जाते थे और शीतला सिंह मुलायम के. लिहाजा पुलिस द्वारा हजरतगंज कोतवाली पर लाए जाने के बाद युगुल किशोर की ठसक में कोई कमी नहीं आई. लेकिन रात होने के बावजूद युगुल छूटे नहीं बल्कि लोग कहते हैं कि पुलिस ने इनकी लॉक-अप में अच्छी-खासी सेवा कर दी. जब कचहरी में पेश किया गया तो वकीलों ने सरेआम हमला बोल दिया. बहरहाल युगुल बाबा चले गए जेल और इधर इस दरम्यान दैनिक जागरण (जो वैसे भी हिन्दूवादी अखबार माना जाता है) ने रोज आधे-आधे पन्ने की खबरें लिखकर युगुल के खिलाफ और भी जबर्दस्त माहौल तैयार कर दिया. अयोध्या-फैजाबाद कस्बे में हर प्रभुत्वशाली व्यक्ति जिस से युगुल को मदद की आस थी, ने उनका साथ छोड़ दिया. युगुल के बढते विरोध की एक वजह यह भी थी कि वह राम की तस्वीर के साथ हुए भौड़ेपन का कोई ठीक-ठीक कारण और लाभ लोगों को नहीं समझा सके. और फिर वह कार्यक्रम तो तुलसी के विरोध में था, तो राम को इतनी गालियां क्यों, बस इसी बात का औचित्य युगुल से हमदर्दी रखने वाले भी नहीं समझा सके. उधर अयोध्या के संतों ने महापंचायत करके युगुल के खिलाफ कई फतवे दे दिए. सुनने में आया कि अयोध्या के महंत नारायण दास शास्त्री ने तो बकाएदा सिर पर ईनाम भी घोषित कर दिया. कुछ महीनों बाद युगुल को यश भारती पुरुस्कार के लिए चुना गया. एक बार फिर उनके खिलाफ लामबन्दी तेज हुई. एक बार फिर दैनिक जागरण इस लामबन्दी का प्रमुख साधन बना. कई टीवी चैनलों पर भी युगुल के पुराने कर्मों को बताते हुए, यश भारती पुरस्कार दिए जाने पर सवाल उठाए गए. इससे पहले कि राज्य सरकार कोई फैसला लेती, अयोध्या के दो लोग हाई कोर्ट से यश भारती दिए जाने पर रोक लगवा आए. इस प्रकार युगुल के दुश्मनों की कतार में दैनिक जागरण भी बना हुआ है. उपरोक्त दोनों घटनाओं के दौरान जागरण के फैजाबाद इंचार्ज रमा शरण अवस्थी रहे. संयोग से आज जब युगुल इस अखबार के खिलाफ दो बच्चियों और दो बाबाओं के साथ आवाज बुलंद कर रहे हैं तो एक बार फिर रमा शरण अवस्थी अपने पुराने पद पर लौट चुके हैं. बीच में वह अमर उजाला चले गए थे. तो कुल मिलाकर दो बच्चियों समेत यह ‘पांच सदस्यीय’ प्रदर्शन दैनिक जागरण के खिलाफ निजी रंज के कारण है, पत्रकारिता की किसी शुचिता की चिंता के कारण नहीं. यही युगुल किशोर थे जिन्होने अपने अखबार रामजन्मभूमि में अपने शत्रु अयोध्या प्रेस क्लब के अध्यक्ष महेन्द्र त्रिपाठी को मां-बहन की गालियों से लगायत हर वो गाली सरेआम प्रकाशित की थी जिन्हें हम-आप दुश्मन को भी देने में संकोच खाते हैं. यशवंत भाई आपने तो उस अखबार का वो संस्करण पढा ही था. आपको तो विशेषतः भेजा गया था. अब आप खुद तय कर लीजिए कि ऐसी भाषा अखबार में लिखने वाले को पत्रकारिता की शुचिता की कितनी चिंता होगी?”

जो कुछ कमेंट आए, वो इस प्रकार हैं :

Rehan Ashraf Warsi I know, whatever they did with you. It not only panic even unjustified and unforgettable… That incident force me to stop reading anything from Jagran group, even Inqulab also. I’m not a media person nor a political, a laymen. Yoi won’t believe, I read and follow you because of inspiration. It’s always given spirit to fight.

Chandan Srivastava लाइक कर के अन लाइक कर दिया, क्योंकि तस्वीर पर ध्यान पड़ते ही माजरा समझ में आ गया. दैनिक जागरण की सच्चाई किसी से छिपी नहीं जैसे इन विरोध करने वालों को अयोध्या का बच्चा-बच्चा जानता है

Yashwant Singh चंदन जी पूरा मामला क्या है, लिखिएगा. ये तो समझ में आ रहा है कि संघी मानसिकता वाले जागरण ने जरूर डेमोक्रेटिक और जनपक्षधर किस्म के लोगों के खिलाफ अभियान चलाया होगा, लेकिन उसका कंटेंट क्या था, उसे उपलब्ध कराइए.

आशीष सागर ये पूरा व्यापारी और भ्रष्ट अख़बार है मैंने बाँदा इसके कार्यालय में एक साल से जाना ही छोड़ रखा है

Shailendra Singh Yashwant Singh ji मै भी पहले दैनिक जागरण ही पढता था , परन्तु अब सात आठ साल से नहीं , इन लोगो ने बाज़ार को ध्यान में रख कर अपनी गुणवत्ता से समझौता कर लिया , ये खबरों के नहीं व्यापार के खिलाड़ी हो गए , इनकी निष्ठां पाठक या जनता से नहीं वरन धन व् पूंजीपतियों से हो गयी , इतना ही नहीं मैंने महसूस किया नियमित या साप्ताहिक कॉलम लिखने वाले अच्छे लेखक भी इनसे दूर हो गए या इन्होने दूर कर दिया , अब अखबार हमको तो छोड़ सकता नहीं था लिहाजा हमने ही ये अखबार पढ़ना छोड़ दिया …

Asghar Naqui Warg Vishesh Ka Akhbar Hai

Alok Tripathi kabhi to maan ka ghusa bahar aa hi jata hai……

Avanish Tripathi दैनिक जागरण सबसे अच्छा अखबार है और रहेगा जलने वाले वामपंथियो को जलने दो इससे कुछ बिगडने वाला नही है, गंदी विचार वाले हमेशा अच्छी चीजों पर कीचड़ उछालते है,,,,,जैसे की कुछ लोग इसका समर्थन कर रहे है.

Naveen Kumar ये क्या हो गया दैनिक जागरण के साथ क्या दैनिक जागरण बिकाऊ पेपर है

Wahid Naseem जिनके ७४ % मालिक विदेशी हो वो देश की क्यों सोचे व्यापारी हैं व्यपार कर रहे हैं

Anand Dubey Jo akbar inki badmashiyon par taliyan bajaye vahi achcha akhbar hai

Arun Srivastava यह विश्व का सर्वाधिक शोषक अखबार भी है,,,

Mayank Pandey लेकिन एक दूसरा पहलू भी है इस अखबार का…… मेरे समेत 70 प्रतिशत से ज्यादा पत्रकारों ने पत्रकारिता का ककहरा इसी संस्थान से सीखा है। हो सकता है मैं कुछ ज्यादा पाज़िटिव हो रहा होऊं…… लेकिन दिल के हर कोने में इस अखबार से भावनात्मक लगाव है। जय हो….

Ashwani Sharma sach kadua hota h.us par kaljug bhi to chal raha h.lekin sach ki hamesha jeet hoti h.
 
Wahid Naseem मयंक भाई मेरा इस अखबार से कोई निजी झगड़ा नहीं है। जब इस संस्था का जागरण ७ चैनल लेन की प्लॅनिंग हुई थी तब में और राकेश डांग उस पहली मीटिंग का हिस्सा थे। मगर जागरण ७ ही अब IBN7 है यह तो आप जानते ही हैं। IBN और CBN दोनों अमेरिका की बड़ी मीडिया कम्पनी है। जिन्हे वहा का एक चर्च ८०० बिलयन डॉलर सालाना दान देता है। नेटवर्क १८ इन्ही दोनों कम्पनियों का मालिकाना अधिकार में है और बाकि कुछ प्रतिसत हिसा मुकेश का है। जागरण भी अब इनकी ही जागीर है , जिन का काम भारत में अब सिर्फ लॉबिंग करना ही एक मात्र उद्स्य प्रतीत होता है। मेरा मान ना यह भी है की कोई विदेशी भारत में भारत के हित में लॉबिंग करेगा या अपने मुल्क के?

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दुनिया में जो इतनी अधिक हिंसा है, वह सब ईसा मसीह और बुद्ध जैसे लोगों की देन है!

Yashwant Singh : आजकल मैं यूजी कृष्णामूर्ति की एक किताब पढ़ रहा हूं, ”दिमाग ही दुश्मन है”. अदभुत किताब है. इसे पढ़कर लगने लगा कि सोचने विचारने की मेरी पूरी मेथोडोलाजी-प्रक्रिया ही सिर के बल खड़ा हो चुकी है. किताब का सम्मोहन-जादू-बुखार इस कदर चढ़ा कि इसे पढ़ते हुए माउंट आबू गया और दिल्ली आने के बाद भी पढ़ रहा हूं, दुबारा-तिबारा. तभी लगा कि किताब के कुछ हिस्से को आप सभी से साझा किया जाए. इस किताब के कुछ पैरे यहां दे रहा हूं, ताकि किताब के अंदर की आग को आप भी महसूस कर सकें. हालांकि पूरी किताब पढ़ने के बाद ही आप संपूर्णता में समझ कायम कर पाते हैं जो अंततः आपको समझाती है कि सारी समझ, विचार, धारणाएं, ज्ञान, कोशिशें, योजनाएं ही आपकी सबसे बड़ी दुश्मन हैं, इन्हें जला डालो, इनसे मुक्ति पा लो, फिर देखो कैसी निश्चिंतता आती है… ध्यान से पढ़िए नीचे दिए गए कुछ पैरों को… इस किताब को जिस भी साथी ने मुझे भेंट किया है, उसका आभारी हूं. फिलहाल तो याद नहीं आ रहा कि किसने दिया पढ़ने के लिए.

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जिस मस्तिष्क के बारे में तुम बात कर रहे हो, वह कहां है? क्या तुम मुझे उसे दिखा सकते हो? वस्तुत: तुम्हारे मस्तिष्क और मेरे मस्तिष्क जैसी कोई चीज नहीं है. मस्तिष्क ठीक उसी प्रकार सभी जगह है , जिस प्रकार कि सांस लेने वाली हवा. हमारे चारों ओर विचारों का मंडल है. यह न तुम्हारा है और न ही मेरा. यह हमेशा बना रहता है. तुम्हारा दिमाग एक एंटीना की तरह काम करता है और उसमें से उन संकेतों को चुनकर ग्रहण कर लेता है, जिसका वह उपयोग करना चाहता है.

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यह शरीर क्या चाहता है? यह कार्य करने के सिवाय कुछ नहीं चाहता. बाकी सारी चीजें विचार की उपज हैं. शरीर का आनंद और दर्द से अलग अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है. शरीर में अपनी क्रियाओं को स्वयं करते रहने का स्वाभाविक गुण होता है, जो तुम्हारे बिना किए ही होता रहता है. तुम हर समय स्नायु प्रणाली की स्वाभाविक गतिविधियों में हस्तक्षेप करते रहते हो. जब कोई संवेदना तुम्हारी स्नायु प्रणाली को प्रभावित करती है, तब तुम पहला काम यह करते हो कि उसे एक नाम दे देते हो तथा उसे आनंद या दुख की श्रेणी में रख देते हो. तुम्हारा दूसरा कदम यह होता है कि आनंददायी संवेदनाओं को बनाए रखना चाहते हो तथा दुखात्मक संवेदनाओं को रोकना चाहते हो. पहली बात तो यही कि संवेदनाओं को आनंद या दुख के रूप में पहचानना ही अपने आप में दुखपूर्ण है. दूसरे यह कि एक प्रकार की संवेदना (आनंदपरक) को बनाए रखना तथा दूसरे प्रकार की संवेदना (दुखपूर्ण) को रोकना ही दुखपूर्ण है. ये दोनों ही प्रक्रियाएं शरीर का दम घोटती हैं. वस्तुओं की स्वाभाविक स्थिति में प्रत्येक संवेदना की अपनी गहराई और समयावधि है. आनंद को बढ़ाने तथा दुख को रोकने से शरीर की संवेदनाएं तथा उनके प्रति प्रतिक्रियाएं करने की क्षमता नष्ट होती है. इसलिए तुम जो भी कर रहे हो, वह इस शरीर के लिए बहुत दर्दनाक है. यदि तुम इन संवेदनाओं को कुछ नहीं करते, तो पाओगे कि वे अपने आप में ही घुल-मिल जाएंगे.

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शरीर के लिए कोई मृत्यु नहीं है, केवल विखंडन है. विचार पदार्थ हैं, इसलिए उनसे उत्पन्न सारी इच्छाएं भी पदार्थ हैं. इसलिए तुम्हारी तथाकथितआध्यात्मिक इच्छा का कोई अर्थ नहीं है. शरीर की रुचि केवल अपने अस्तित्व को बनाए रखने में ही है. तुम्हारी सोच की संरचना मृत्यु के यथार्थ को नकारती है. वह किसी भी कीमत पर अपनी निरंतरता चाहती है. मैं किसी गहरी निद्रा या अन्य किसी सिद्धांत के बारे में नहीं बता रहा हूं, बल्कि केवल इतना संकेत कर रहा हूं कि यदि तुम बहुत गहरे जाते हो तो ‘तुम’ गायब हो जाते हो. शरीर वास्तविक चिकित्सकीय मृत्यु की प्रक्रिया से गुजरता है और कुछ मामलों में तो यह शरीर स्वयं को पुनर्नवा भी करता है. ऐसे समय में निजीपन का सारा इतिहास, जो शरीर की जींस संरचना में स्थित होता है, शीघ्र ही अपने आपको जीवन से अलग कर लेता है और अपनी ही धुन में मग्न हो जाता है. इसके बाद से यह अपने आपको किसी भी अन्य वस्तु से अलग नहीं कर सकता.

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समाज की शुरुआत ही अनैतिकता से हुई है. वही समाज अब चार सौ बीसी को अनैतिक बताता है तथा ईमानदारी को नैतिक कहता है. मैं इनमें कोई अंतर नहीं समझता. यह तो तुम्हारा अपराधबोध है जो तुम्हें अलालच के बारे में बात करने के लिए मजबूर करता है. जबकि तुम लगातार लालच भरी जिंदगी जीते रहते हो. तुम्हारे दिमाग द्वारा अलालच की खोज किया जाना अपने आप में ही लालची होने का प्रमाण है.

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तुम किसी भी उत्तर की खोज केवल इसलिए करते हो, ताकि तुम्हारी समस्या सुलझ जाए, तुम्हें दुख न मिले. लेकिन यहां जीवन दुख के सिवाय कुछ नहीं है. तुम्हारे जन्म लेने की प्रक्रिया ही दुखमय है. जन्म लेने वाली हर चीज दुखपूर्ण होती है. तुम जिस सहायता की चाह रखते हो वह केवल मृत्यु के समय ही प्राप्त हो सकती है. प्रत्येक को अंततः मोक्ष मिलता है. मोक्ष से पहले हमेशा मृत्यु होती है और प्रत्येक व्यक्ति की मृत्यु होती है.

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यह शरीर बहुत अधिक बुद्धिमान है, जो अपने अस्तित्व और पुनर्जीवन के लिए वैज्ञानिक या सैद्धांतिक उपदेशों की जरूरत नहीं समझता. तुम जीवन, मृत्यु और स्वतंत्रता के बारे में अपनी सभी कल्पनाओं को अलग कर दो, तो भी यह शरीर सुसंगत तरीके से काम करता रहेगा. इसे न तो तुम्हारी स्वतंत्रता चाहिए और न ही मेरी. तुम्हें कुछ भी नहीं करना है. तब तुम फिर कभी अमरता, मृत्यु के बाद या मृत्यु के बारे में मूर्खतापूर्ण प्रश्न नहीं पूछोगे. यह शरीर अपने आप में अमर है. जो गुरु तुमसे आध्यात्मिक जीवन की बात करते हैं, वे ईमानदार नहीं हो सकते. वे भविष्य की जीवन-संबंधी कल्पना तथा तुम्हारे डर को भुनाकर अपना पेट पालते हैं.

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किसी भी दिशा में कुछ भी करना हिंसा है. कोई भी प्रयास हिंसा है. यदि तुम अपने मस्तिष्क की शांति के लिए विचारों के जरिए कुछ भी करते हो, तो यह एक तरह के दबाव का ही उपयोग है. इसलिए यह भी हिंसा है. तुम हिंसा के द्वारा शांति लादने की कोशिश कर रहे हो. योग, ध्यान, प्रार्थना और मंत्र आदि हिंसा के ही तरीके हैं.

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यह जीवित शरीर अपने आप में अत्यंत शांतिपूर्ण है. इसके लिए तुम्हें कुछ नहीं करना होगा. शांतिपूर्ण तरीके से काम करता हुआ शरीर तुम्हारे उल्लास, आनंद और परमानंद की स्थिति की परवाह नहीं करता. मनुष्य ने इस शरीर की स्वाभाविक समझ को छोड़ दिया है. जैसे ही मनुष्य यह अनुभव कर लेगा कि वह जानवरों से अलग और श्रेष्ठ है, उसी क्षण वह अपने विनाश के बीज बोने लगता है. तुम जिस शांति की खोज कर रहे हो, वह तुम्हारे अंदर, शरीर के सामंजस्यपूर्ण कार्य करने में है. इस दुनिया को बचाने में मेरी कोई रुचि नहीं है. मनुष्य जाति का अंत होना ही है.

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तुम्हारी बौद्धिक समझ, जिसमें तुमने ढेर सारा निवेश किया है, उसने अभी तक तुम्हारे लिए एक भी अच्छा काम नहीं किया है.

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आध्यात्मिक लोग सबसे बेइमान लोग हैं. मैं उस बुनियाद पर जोर दे रहा हूं जिस पर आध्यातमिकता की पूरी इमारत खड़ी की गई है. मैं इस बात पर जोर दे रहा हूं कि आत्मा जैसी कोई चीज नहीं होती. यदि आत्मा ही नहीं है तो फिर अध्यात्म की सारी बातें बकवास हो जाती हैं. अपने आपको पाने के लिए आध्यात्मिक जीवन के उन सारे आधारों को नष्ट करना होगा, जो गलत हैं. तुम्हें अपने अंदर एक आग पैदा करनी होगी जिसमें मनुष्यों द्वारा पैदा किए गए सभी विचार और अनुभव जलकर खत्म हो जाएं. दुनिया में जो इतनी अधिक हिंसा है, वह सब ईसा मसीह और बुद्ध जैसे लोगों की देन है.

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जो ब्रह्म पर विश्वास करते हैं, जो शांति का उपदेश देते हैं, प्रेम की बातें करते हैं, उन्होंने ही यह मनुष्यों का जंगल बनाया है. मनुष्यों के इस जंगल की तुलना में प्रकृति का यह जंगल अधिक सरल और संवेदनशील है. प्रकृति में जानवर अपने ही लोगों को नहीं मारते. यह प्रकृति की सुंदरता है. इस दृष्टि से मनुष्य दूसरे जानवरों से भी बदतर है. यह तथाकथित सभ्य आदमी अपने आदर्शों और विश्वासों के लिए हत्या करता है, जबकि पशु केवल जीने के लिए ही दूसरों को मारते हैं.

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प्रकृति हमेशा कोई अनोखी चीज बनाने की कोशिश करती रहती है. ऐसा नहीं लगता कि प्रकृति किसी भी चीज को एक प्रतिरूप (मॉडल) के रूप में इस्तेमाल करती है. जब वह कोई एक अनोखी चीज तैयार कर लेती है तब विकास की प्रक्रिया में वह उसे किनारे कर देती है और वह उसमें कोई रुचि नहीं रखती. ईसा मसीह, गौतम बुद्ध, या कृष्ण को माडल के रूप में प्रयोग करके हमने प्रकृति की उन संभावनाओं को समाप्त कर दिया है, जो अनोखी चीजें बनाती हैं. जो तुमसे यह कहता है कि अपने प्राकृतिक चरित्र को भूल जाओ और किसी दूसरे संत-महात्मा जैसा बनो, वह तुम्हें गलत रास्ते पर ले जा रहा है.

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जैसे ही तुम किसी योगी या धर्मपुरुष के संपर्क में आते हो, तुम पहला गलत रुख यह अख्तियार करते हो कि अपने कार्य करने की शैली को उन लोगों के काम करने की शैली के अनुसार ढालने लगते हो. ऐसा हो सकता है कि वे जो कुछ कह रहे हैं, उसका संबंध तुम्हारे कार्य करने की शैली से बिलकुल हो ही नहीं. अनोखापन कोई ऐसी वस्तु नहीं है, जो किसी फैक्टरी में तैयार हो जाए. समाज का स्वार्थ केवल अपनी यथास्थिति को बनाए रखने में होता है. इसीलिए वह सबके सामने इस तरह के प्रतिरूप प्रस्तुत करता है. तुम उसी मॉडल (जैसे- संत, महात्मा या क्रांतिकारी) जैसा बनना चाहते हो, लेकिन यह असंभव है. तुम्हारा जो समाज स्वीकृत माडल के अनुरूप तुम्हें बदलने में रुचि रखता है, वही सच्चे व्यक्ति से चुनौती महसूस करने लगता है, क्योंकि वह उसकी निरंतरता को चुनौती देता है. एक सच्चे विलक्षण व्यक्ति के पास कोई सांस्कृतिक पृष्ठभूमि नहीं होती और वह कभी नहीं जानता कि वह विलक्षण है. वह विलक्षण व्यक्ति अपने आपको शारीरिक या आध्यात्मिक तौर पर पुनरुत्पन्न नहीं कर सकता. प्रकृति उसे व्यर्थ घोषित कर देगी. प्रकृति ही पुनरुत्पादन में रुचि रखती है और समय-समय पर कोई विलक्षण नमूना या मनोविनोद प्रस्तुत करती रहती है. यह नमूना पुनरुत्पादन करने में असमर्थ होता है, जो विकास की प्रक्रिया में नष्ट हो जाता है. यदि व्यक्ति के अंदर की विलक्षणता को विकसित करना है तो उसे अचानक या संयोगवश अपने आपको समस्त अतीत के बोझ से मुक्त कर लेना होगा. यदि मनुष्य के समस्त संचित ज्ञान और अनुभव को हटा दिया जाए, तो जो कुछ भी बचेगा, वह मूल स्थिति होगी- बिना प्राचीनता के. समाज के लिए उस तरह के व्यक्ति की कोई उपयोगिता नहीं होगी. एक घने वृक्ष की तरह यह व्यक्ति छाया तो दे सकेगा लेकिन उसे इसका अहसास कभी नहीं रहेगा कि वह छाया दे रहा है. यदि तुम उस वृक्ष के नीचे बैठोगे तो तुम्हारे सिर पर एक नारियल गिर सकता है. अर्थात वहां खतरा हो सकता है. इसलिए समाज ऐसे व्यक्तियों से खतरा महसूस करता है. जिस तरह से इस समाज की रचना हुई है, उसमें वह ऐसे व्यक्ति का कोई उपयोग नहीं कर सकता. मैं जनसेवा में, लोगों की सहायता करने में, दुख से कराहती हुई दुनिया के प्रति दया दिखाने में, दुनिया को उपर उठाने में तथा इसी तरह की अन्य बातों में विश्वास नहीं करता।

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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श्रद्धांजलि : यकीन नहीं हो रहा कि मनोज श्रीवास्तव हम लोगों के बीच में नहीं हैं

Yashwant Singh : जब मैंने लखनऊ से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की तो जिन कुछ पत्रकारों का सानिध्य, संग, स्नेह, मार्गदर्शन मिला उनमें से एक मनोज श्रीवास्तव जी भी हैं. पर इनके आज अचानक चले जाने की सूचना से मन धक से कर के रह गया. लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार साथियों ने मुझे फोन पर सुबकते हुए मनोज के निधन की सूचना दी. मनोज श्रीवास्तव शख्स ही ऐसे थे कि वे सभी के प्रिय थे. तभी तो वे लखनऊ की अच्छी खासी पत्रकारिता को त्यागकर बनारस रहने के लिए तबादला लेकर चले गए थे.

अपनी पिछली कुछ लखनऊ यात्राओं में मैंने मनोज जी के संग कई घंटे प्रेस क्लब में गुजारे थे. उनके गीत सुने, उनके-अपने जीवन के अनुभव-संस्मरण साझा हुए. क्या पता था कि ये मुलाकात आखिरी मुलाकात में तब्दील होने जा रही है. मनोज श्रीवास्तव के जाने से अब ऐसा लगने लगा है कि अपने आसपास के लोग, अपने समय के लोग, अपने साथी-संगी लोगों के जाने की बारी आ गई है. कब कौन कहां कैसे चला जाए, कुछ नहीं पता.. मनोज भाई, आपके साथ तो अभी बनारस की गलियों में घूमना था… मस्ती करनी थी.. बतियाना था.. गाना था… पर आप अचानक ऐसे सब संगी साथियों को छोड़कर चले जाओगे, यकीन नहीं हो रहा… बेहद भारी मन से श्रद्धांजलि दे रहा क्योंकि यकीन अब तक नहीं हो रहा कि आप नहीं हो हम सभी के बीच. 

(भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.)

Golesh Swami : dosto mera sabse pyara dost manoj shrivastava mujhe akela chodkar chala gaya. manoj mere saath amar ujala mai tha. mai 2003 mai hindustan aa gaya lekin meri aur monoj ki dosti nahi tuti. hum dono har dukh shuk ki baate karte the. aise dost jeewan mai kam hi milte hai. pichle hafte hi to ham mile the. maine pooch tha ab kab aoge to kahne laga deewali par mulakat hogi. par yeh nahi malum tha ki tumhare shareer se tumhari aatma gayab hogi. aise jeewant aadmi ko khamosh dekhna wakai kashtkaari hai.alwida dost. lekin dost tumhari kami hamesha khalegi.

(लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार गोलेश स्वामी के फेसबुक वॉल से.)

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मोदी जी, राजस्थान में शराब के नाम पर खरबों रुपये की इस काली कमाई को कौन डकार रहा है? (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : मोदी जी बताओ, उगाही का ये पैसा आप खा रहे हो या वसुंधरा राजे सिंधिया को खाने दे रहे हो… ये तो सच है कि भाजपा शासित केंद्र और राज्य में से कोई एक इस खरबों रुपये के शराब घोटाले का पैसा रोजाना डकार रहा है….  राजस्थान में भाजपा की सरकार है. केंद्र में भाजपा की सरकार है. तो फिर माउंट आबू से लेकर राजस्थान के विभिन्न शहरों में शराब बिक्री के दौरान आम जन से खरबों रुपयों की प्रतिदिन अवैध उगाही का पैसा कहां जा रहा है, कौन खा रहा है. मोदी जी कहते हैं कि न खाउंगा और न खाने दूंगा. पर राजस्थान में घटित हो रहे ‘शराब स्कैंडल’ को देखकर लगता है कि भाजपा के बड़े नेता, भाजपा शासित राजस्थान राज्य के नेता, मंत्री, अफसर जमकर उगाही का पैसा खा रहे हैं.

माउंट आबू में शराब की किसी भी दुकान पर जाइएगा. आपको 165 रुपये एमआरपी वाले पव्वे को खरीदने पर दो सौ रुपये देने होंगे और अगर आपने 35 रुपये एक्स्ट्रा लिए जाने पर सवाल किया तो कह दिया जाएगा कि लेना है तो लो वरना जाओ.  असल में माउंट आबू दौरे के दौरान जब फिश वर्ल्ड के मालिक द्वारा की जा रही लूट का स्टिंग https://www.youtube.com/watch?v=y90o7jyTiVY यूट्यूब-फेसबुक पर डाला तो राजस्थान के एक साथी ने फोन कर कहा कि आप माउंट आबू में बीयर, दारू के नाम पर हो रही खरबों रुपये की खुलेआम लूट को भी तो देखिए. तब मैं चल पड़ा एक शराब की दुकान की तरफ. सिमरन आफ वोदका का क्वाटर यानि पव्वा मांगा. दाम पूछा तो उसने बताया दो सौ रुपये. बोतल पर देखा तो एमआरपी 165 लिखा हुआ था. फिर शुरू हुई दुकानदार से बातचीत.

वीडियो को देखिए कि कैसे दुकानदार से मेरी बहस हो रही है. इतने आत्मविश्वास से खुली लूट करने वाले दुकानदारों की पीठ पर नेताओं, मंत्रियों, अफसरों का पूरा पूरा हाथ है. ऐसे में पूछना पड़ेगा कि मोदी जी, रोजाना घटित हो रहे खरबों रुपये के इस शराब घोटाले का पैसा कौन खा रहा है और किसे खाने दिया जा रहा है? सोचिए, यही सब अगर किसी आम आदमी पार्टी द्वारा शासित राज्य में हो रहा होता तो करप्ट और बिकाऊ मीडिया नैतिकता के इतने बड़े बड़े सवाल उठाकर विधवा विलाप शुरू कर देता कि पक्का केजरीवाल या उनके नेता को इस्तीफा देना पड़ जाता. लेकिन अगर घोटाला भाजपा या सपा या बसपा या कांग्रेस करे और मीडिया को भरपूर ओबलाइज करे तो ‘ये सब चलता है’ की तर्ज पर मीडिया वाले चुप्पी साध लेते हैं.  देखें स्टिंग…

mount abu ke lutere (2) : Modi ji, ye ugaahi ka paisa kaun kha raha hai?

http://goo.gl/NWkUFN

Yashwant Singh : माउंट आबू के लुटेरों पर जल्द ही एक स्टोरी लिखता हूँ। पर्यटन के लिए कहीं भी जाएँ तो सावधान रहें। पग-पग पे पैसा लूटने वाले विविध भेष में मौजूद रहते हैं। फिश वर्ल्ड के बाहर डालफिन की फोटो चस्पा है, लेकिन टिकेट लेकर अन्दर जाइए तो बित्ता भर से बड़ी कोई मछली नहीं मिलेगी। ऐसे दर्जनों किस्से हैं। एक्सपोज करना ज़रूरी है। इसीलिए एक दुकानदार का स्टिंग किया.. देखें जरा आप भी..

mount abu ke lutere (1) Fish World ke naam pe dhokhadhadi

http://goo.gl/JkiJrb

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. फेसबुक पर यशवंत के पेज से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :

https://www.facebook.com/yashwant.bhadas4media

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राजदीप सरदेसाई के धतकरम के बहाने अपने दाग और जी न्यूज के पाप धोने में जुटे सुधीर चौधरी

सौ चूहे खा के बिल्ली चली हज को… जी न्यूज पर पत्रकारिता की रक्षा के बहाने हाथापाई प्रकरण को मुद्दा बनाकर राजदीप सरदेसाई को घंटे भर तक पाठ पढ़ाते सुधीर चौधरी को देख यही मुंह से निकल गया.. सोचा, फेसबुक पर लिखूंगा. लेकिन जब फेसबुक पर आया तो देखा धरती वीरों से खाली नहीं है. युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार ने सुधीर चौधरी की असलियत बताते हुए दे दनादन पोस्टें लिख मारी हैं. विनीत की सारी पोस्ट्स इकट्ठी कर भड़ास पर प्रकाशित कर दिया. ये लिंक http://goo.gl/7i2JRy देखें. ट्विटर पर पहुंचा तो देखा राजदीप ने सुधीर चौधरी पर सिर्फ दो लाइनें लिख कर तगड़ा पलटवार किया हुआ है. राजदीप ने रिश्वत मांगने पर जेल की हवा खाने वाला संपादक और सुपारी पत्रकार जैसे तमगों से सुधीर चौधरी को नवाजा था..

जी न्यूज के सुधीर चौधरी और जी बिजनेस के समीर अहलूवालिया द्वारा जिंदल समूह के नवीन जिंदल से कोल ब्लाक धांधली प्रकरण की खबर रोकने के एवज में करोड़ों रुपये मांगने से संबंंधित स्टिंग की खबर को सबसे पहले भड़ास ने पब्लिश किया था (देखें http://goo.gl/x5y9Bz ) . उसके बाद इंडियन एक्सप्रेस समेत दूसरे मीडिया हाउसेज ने खबर को तब उठाया जब दिल्ली पुलिस ने नवीन जिंदल की लिखित शिकायत और प्रमाण के रूप में सौंपी गई स्टिंग की सीडी को देखकर एफआईआर दर्ज कर ली. फिर तो ये प्रकरण बड़ा मुद्दा बन गया और चारों तरफ पत्रकारिता के पतन की कहानी पर चर्चा होने लगी. सुधीर और समीर तिहाड़ जेल भेजे गए. इनके आका सुभाष चंद्रा पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी, लेकिन वो जेल जाने से बच पाने की एलीट तिकड़म भिड़ाने में कामयाब हो गए.

उन दिनों राजदीप सरदेसाई ने भी सीएनएन-आईबीएन और आईबीएन7 पर सुधीर चौधरी के ब्लैकमेलिंग में जेल जाने के बहाने पत्रकारिता के पतन पर गहरा आंसू बहाया था. अब समय का पहिया जब काफी चल चुका है तब राजदीप सरदेसाई अपनी गालीगलौज व हाथापाई वाली हरकत के कारण सबके निशाने पर हैं और इनकी करतूत के चलते पत्रकारिता की हालत पर दुखी होकर टपाटप आंसू बहा रहे हैं सुधीर चौधरी. सोचिए जरा. इस देश के आम आदमी को मीडिया का संपूर्ण सच भला कैसे समझ में आएगा क्योंकि उसे कभी राजदीप सरदेसाई में सच्चा पत्रकार दिखता होगा तो कभी सुधीर चौधरी पत्रकारिता के हनुमान जी लगते होंगे.

इस विचित्र और घनघोर बाजारू दुनिया में दरअसल जनता के लिए सच जैसी पक्षधरता / चीज पर कोई मीडिया वीडिया काम नहीं कर रहा. सब अपने अपने एजेंडे, अपने अपने राग द्वेष, अपने अपने मतलब पर काम कर रहे हैं और इसे जन पत्रकारिता का नाम दे रहे हैं. ब्लैकमेलिंग में फंसे सुधीर चौधरी हों या हाथापाई-गालीगलौज करने वाले राजदीप सरदेसाई. इन जैसों ने असल में केवल खुद की ब्रांडिंग की है और अपनी ब्रांडिंग के जरिेए अपने लालाओं और अपनी तिजोरियां भरी हैं. क्या गलत है, क्या सही है, इस पर हम लोग भले तात्कालिकता / भावुकता के शिकार होकर फेसबुक-ट्विटर पर एक दूसरे का सिर फोड़ रहे हों, एक दूसरे को समझा ले जाने या निपटा देने में जुटे हुए हों लेकिन सच्चाई यही है कि अंततः राजदीप, सुधीर, हम, आप… हर कोई अपनी सुरक्षा, अपने हित, अपने दांव, अपने करियर, अपनी जय-जय में जुटा हुआ है और जो फिसल जा रहा है वह हर हर गंगे कहते हुए खड़ा होने की कोशिश मेें जुट जा रहा है.

देखिए इन्हीं मोदी महोदय को. गुजरात के दंगों के दाग से ‘मुक्त’ होकर विश्व नायक बनने की ओर चल पड़े हैं. इनकी बातें सुन सुन कर अब तो मुझको भी लगने लगा है कि सच में भारत को बहुत दिनों बाद कोई कायदे का नेता मिला है जो देश को एकजुट कर, एक सूत्र में पिरोकर बहुत आगे ले जाएगा… लेकिन जब मोदी की विचारधारा, मोदी के भक्तों, मोदी के अतीत को देखता हूं तो सारा उत्साह ठंढा पड़ जाता है क्योंकि ये लोग अपने हित के लिए कुछ भी, जी हां, कुछ भी, बुरा से बुरा तक कर डालते हैं. पर, समय और हालात, दो ऐसी चीज हैं भाइयों कि इनके कारण बुरे से बुरे को अच्छे से अच्छा में तब्दील होते देखा जा सकता है और अच्छे से अच्छा को बुरे से बुरा बताया जा सकता है. ऐसे ही हालात में मिर्जा ग़ालिब साहब ने कहा होगा…

रहिये अब ऐसी जगह चलकर जहाँ कोई न हो
हमसुख़न कोई न हो और हमज़बाँ कोई न हो

बेदर-ओ-दीवार सा इक घर बनाया चाहिये
कोई हमसाया न हो और पासबाँ कोई न हो

पड़िये गर बीमार तो कोई न हो तीमारदार
और अगर मर जाईये तो नौहाख़्वाँ कोई न हो

और अंत में… जाते-जाते…

जी न्यूज के सुधीर चौधरी और जी बिजनेस के समीर अहलूवालिया के स्टिंग की वो सीडी जरूर देखिए जिसकी खबर भड़ास पर आने के बाद तहलका मचा और बाद में इन दोनों संपादकों को ब्लैकमेलिंग के आरोप में जेल जाना पड़ा… आज यही सुधीर साहब देश को जी न्यूज पर राजदीप सरदेसाई के धतकरम के बहाने सच्ची-अच्छी पत्रकारिता सिखा रहे थे… इस लिंक पर क्लिक करें… http://goo.gl/N96BR8

बाकी, सुधीर चौधरी और जी न्यूज की संपूर्ण कथा इस लिंक में है… http://goo.gl/6k7p41

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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गलती राजदीप सरदेसाई की है, खुद पहले गाली दी और खुद पहले हमला किया (देखें नया वीडियो)

Yashwant Singh : इतना बड़ा फ्रॉड निकलेगा राजदीप सरदेसाई, मुझे अंदाजा नहीं था. नया वीडियो साबित कर रहा है कि पहले गाली राजदीप सरदेसाई ने दी और पहले हमला भी राजदीप सरदेसाई ने किया. लेकिन कांग्रेसी और अंबानी परस्त इस पत्रकार ने घटनाक्रम के वीडियो को अपने हिसाब से संपादित कर केवल वो हिस्सा रिलीज कराया जिसमें उन (राजदीप) पर एनआरआई हमला करते हुए दिख रहा है. इसे देखकर मुझे भी लगा कि किसी पत्रकार पर कोई कैसे भला हमला कर सकता है, वो भी अमेरिका जैसी जगह में. पर अब जब दूसरा पक्ष सामने आ रहा है, पूरा वीडियो सामने आ रहा है तो पता चल रहा है कि राजदीप ने खुद सब तमाशा क्रिएट किया, गाली-हमले की शुरुआत करके.

इस प्रकरण को वैचारिक चश्मे से देखने वालों को उनका चश्मा मुबारक. न मुझे कभी संघ से प्रेम रहा है और न मोदी से. न मुझे अब वामपंथ से प्रेम है और न ही कांग्रेस परस्त क्रांतिकारिता से. इसलिए मैं कह सकता हूं कि राजदीप सरदेसाई ने खुद को टीआरपी दिलाने, खुद को ट्विटर पर ट्रेंड कराने, खुद को कांग्रेस की नजरों में चढ़ाने के लिए ये सब हरकत की होगी. सुब्रमण्य स्वामी ने सब कुछ विस्तार से सामने रख दिया है. इसे http://goo.gl/2El989 पढ़-देख सकते हैं. राजदीप अपनी चाल में कामयाब भी रहे. मोदी की अरबों रुपये वाली पीआर मायाजाल में सेंध लगा गए और ट्विटर पर ट्रेंड करने लगे, और मोदी की ट्रेंडिंग न्यूज से होड़ लेने लगे. एक नहीं बल्कि दो-दो हैश टैग ट्रेंड करने लगा, एक पक्ष में एक विपक्ष में. देखते ही देखते एक खेमा राजदीप को हीरो मानने लगा और उन पर कथित हमले को मीडिया पर, अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला मानने लगा और मोदी-संघ को गरियाने लगा. मोदी और संघ परस्त खेमा राजदीप पर हमले को उचित बताने लगा और राजदीप के कांग्रेसी अतीत व मोदी विरोधी अतीत का हवाला देने लगा.

इन दोनों छोरों की सरगर्मी चल ही रही थी कि असली सच्चाई सामने आई. राजदीप किस तरह गाली दे रहे हैं और जवाबी गाली सुन रहे हैं, राजदीप किस तरह हमला कर रहे हैं और जवाबी हमला पा रहे हैं, इसका वीडियो सामने आ गया. इस लिंक http://goo.gl/7lPcEp पर क्लिक करके वीडियो देख सकते हैं. इसे देखने के बाद अंबानी के इशारे पर सैकड़ों मीडियाकर्मियों की नौकरी खाने वाले राजदीप से सिर्फ घृणा ही की जा सकती है. राजदीप का काम किसी राजनेता जैसा है जो अपने फायदे के लिए उल्टा-सीधा करके जनमत को पोलराइज करता है. अगर राजदीप को राजनीति ही करनी है तो उन्हें पत्रकारिता छोड़कर सीधे कांग्रेस का दामन थाम लेना चाहिए और मैदान में उतर जाना चाहिए. एमजे अकबर ने भाजपा का दामन थामा, उसी तरह राजदीप को कांग्रेस वाला हो जाना चाहिए. संसद घूस कांड के स्टिंग को हजम कर जाने वाले राजदीप के पाप कम नहीं हैं.

विचारधारा के चश्मे से चीजों को देखने वालों के लिए सब कुछ आग्रह-दुराग्रह के हिसाब से गलत-सही होता है. इसीलिए अब भी कई लोग राजदीप पर हमले की निंदा कर रहे हैं. मैं अपने पुराने वक्तव्य को वापस लेता हूं. अब मैं कहूंगा कि राजदीप सरदेसाई ने जो हरकत की है वह परम निंदनीय है. ऐसे अपराध को अंजाम देने वाले राजदीप को टीवी टुडे ग्रुप से मुक्त हो जाना चाहिए या कर दिया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने पत्रकारिता की स्वस्थ और गंभीर परंपरा को दागदार किया है. उनके जैसे वरिष्ठ पत्रकार से ये कतई अपेक्षा नहीं की जाती कि वे किसी को गाली देंगे और फिर उस पर हमला करेंगे. इस प्रकरण से संबंधित अन्य खबरों के लिए इन लिंक पर क्लिक कर सकते हैं…

http://goo.gl/qe2moy

http://goo.gl/jdwJo2

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


संबंधित खबरें…

न्यूयार्क में राजदीप सरदेसाई को सरेआम थप्पड़ मारा, मीडिया जगत स्तब्ध

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हाथापाई प्रकरण को लेकर ट्विटर और फेसबुक पर तीव्र प्रतिक्रिया, राजदीप सरदेसाई भी बोले…

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राजदीप हाथापाई प्रकरण पर पत्रकारों के बीच भी ध्रुवीकरण : कोई पक्ष में तो कोई विपक्ष में

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अंबानी के दलाल और पत्रकारों की नौकरी खाने वाले राजदीप की ताज़ा गुंडई के दीदार करें

 

 

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‘जानेमन जेल’ किताब गाजीपुर जिले में भी उपलब्ध, लंका पर शराब की दुकान के बगल में पधारें

Santosh Singh : जेल भी जानेमन हो सकती है, अगर वो शख्स यशवंत भाई जैसा दिलेर हो… “जानेमन जेल” की एक प्रति खुद लेखक के हाथ से प्राप्त करते हुए… यशवंत भाई की यह अद्भुत किताब मैंने तो पूरी पढ़ ली…और इतनी अच्छी लगी कि एक बैठक में ही पढ़ ली…. एक बात और कहूँगा …”वो जवानी..जवानी नही, जिसकी कोई कहानी न हो”… और यशवंत भाई की यह कहानी रोमांचित करती है!

बीएचयू से एमबीए कर चुके और भारतीय रेल, कानपुर में कार्यरत संतोष सिंह के फेसबुक वॉल से.

Yashwant Singh : मेरे गृह जिले गाजीपुर में ‘जानेमन जेल’ किताब उपलब्ध. लंका बस स्टैंड पर शराब की दुकान के बगल में दो किताब की दुकानें हैं. दोनों पर ही ‘जानेमन जेल’ की पांच पांच प्रतियां रखवा दी गई हैं. कोई भी इन्हें खरीद सकता है. एक दुकान की तस्वीर भी यहां डाल रहा हूं. सो, गाजीपुर वाले अब न कह पाएंगे कि उन्हें तो किताब मिली ही नहीं.

और हां, अगर आप गाजीपुर जिले में नहीं रहते तो आपके लिए किताब मंगाने का एक बेहद आसान तरीका है. आप अपना पूरा पता (मोबाइल नं और पिन कोड भी डाल दें) लिखकर मोबाइल नंबर 09873734046 पर SMS कर दें, साथ में यह भी लिख दें कि ‘जानेमन जेल’ किताब चाहिए. किताब आपके दरवाजे पर पहुंच जाएगी और पैसा तभी देना है जब किताब आपके हाथ में हो.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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जो लोग पत्रकारिता छोड़कर खेती करना चाहते हों, उनके लिए एक जरूरी सूचना…

Yashwant Singh : मेरे पास एक मेल आई है. खेती-किसानी से संबंधित. कई दिनों से इसे न तो डिलीट कर पा रहा और न ही भड़ास पर लगा पा रहा क्योंकि भड़ास तो मीडिया से संबंधित खबरों का पोर्टल है. डिलीट इसलिए नहीं कर पा रहा क्योंकि मेरे भीतर भी एक किसान है और चाहता है कि ये नई चीजें सीखी जाएं. काफी समय से सोच रहा हूं कि क्यों न गांव पर चलकर हर्बल फार्मिंग की तरफ कदम बढ़ाया जाए ताकि पैसे भी बन सकें और खेती-किसानी से जुड़े रहने का सुख भी मिले. तो इसी इच्छा के कारण इस मेल को पढ़ने के बाद भी डिलीट न कर पाया, सोचता रहा कि इसका प्रचार-प्रसार होना चाहिए ताकि मेरे जैसे जो नए व प्रगतिशील किसान बनने को इच्छुक हों, उन्हें फायदा मिल सके. जिन लोगों का पत्रकारिता से मोहभंग हो गया हो और वे गांव जाकर कुछ करना चाहते हों तो ऐसे पत्रकारों के लिए भी यह प्रशिक्षण शिविर काफी लाभदायक हो सकता है…तो लीजिए, खेती किसानी से संबंधित मेल का कंटेंट यहीं फेसबुक पर डाल दे रहा हूं…

बनारस में ‘शून्य लागत, विष मुक्त प्राकृतिक खेती’ पर 5 दिनी प्रशिक्षण 15 -19 अक्टूबर को

वाराणसी : ‘शून्य लागत, विष मुक्त प्राकृतिक खेती’ की विधा का 5 दिवसीय प्रशिक्षण 15-19 अक्टूबर २०१४ को वाराणसी जनपद के चौबेपुर स्थित संकट मोचन महाविद्यालय में आयोजित किया जा रहा है. इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को विषमुक्त खेती की तरफ वापस लाना और पर्यावरण अनुकूल खेती की तरफ प्रेरित करना है. शून्य लागत प्राकृतिक खेती अभियान के संयोजक प्रो सोमनाथ त्रिपाठी और संरक्षक रामधीरज भाई हैं. इनके नेतृत्व में अभियान के सक्रिय सदस्यों ने विगत दो दिनों में बनारस के चोलापुर और चिरईगांव विकासखंड के अनेक गांवों में जनसंपर्क किया और किसानों को इस विधा के बारे में बताया तथा प्रशिक्षण में सम्मिलित होने हेतु प्रेरित किया. उक्त प्रशिक्षण में शून्य लागत प्राकृतिक खेती की विधा के प्रणेता और महान किसान वैज्ञानिक श्री सुभाष पालेकर जी द्वारा किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा. भंदहाकला, कैथी, राजवारी, बहादुर पुर, बहरामपुर, धौरहरा और भगवानपुर आदि गांवों के किसान उक्त प्रशिक्षण के प्रति काफी जिज्ञासु हैं. 5 दिवसीय प्रशिक्षण में कई जिलों के लगभग 600 किसानो के सम्मिलित होने की सम्भावना है. जनसंपर्क अभियान में डा आनंद प्रकाश तिवारी, वल्लभाचार्य पाण्डेय, गिरसंत कुमार, अभिषेक, दीन दयाल सिंह, प्रदीप सिंह, रमेश यादव, जागृति राही, हरिशंकर सिंह किसान आदि सक्रिय हैं. कार्यक्रम के संयोजक प्रो.सोमनाथ त्रिपाठी हैं.

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भ्रष्टाचारी के यार हजार, सदाचारी अकेले खाए मार… (संदर्भ- डीजीपी सिद्धू, आईपीएस अमिताभ और देहरादून पत्रकार प्रकरण)

Yashwant Singh : पत्रकार अगर भ्रष्ट नेताओं और अफसरों की पैरवी न करें तो भला कैसे जूठन पाएंगे… मार्केट इकानामी ने मोरल वैल्यूज को धो-पोंछ-चाट कर रुपय्या को ही बप्पा मय्या बना डाला तो हर कोई नीति-नियम-नैतिकता छोड़कर दोनों हाथ से इसे उलीचने में जुटा है.. नेता, अफसर, कर्मचारी से लेकर अब तो जज तक रुपये की बहती गंगा में हाथ धो रहे हैं.. पैसे ले देकर पोस्टिंग होती है, पैसे ले देकर गलत सही काम किए कराए जाते हैं और पैसे ले देकर मुकदमें और फैसले लिखे किए जाते हैं, पैसे ले देकर गड़बड़झाले-घोटाले दबा दिए जाते हैं… इस ‘अखिल भारतीय पैसा परिघटना’ से पत्रकार दूर कैसे रह सकता है.. और, जब मीडिया मालिक लगभग सारी मलाई चाट जा रहे हों तो बेचारे पत्रकार तो जूठन पर ही जीवन चलाएंगे न…

ऐसे ही जूठनबाज पत्रकारों के एक दल ने उत्तराखंड के भ्रष्ट डीजीपी सिद्धू की पैराकोरी का अघोषित अभियान चला रखा है… वो कहते भी हैं न कि भ्रष्टाचारी के यार हजार, सदाचारी अकेले खाए मार… इन यार पत्रकार ने सिद्धू के गड़बड़झाले को निजी हैसियत से जांचने गए आईपीएस अधिकारी Amitabh Thakur को ही निशाना बना डाला… इन पत्रकारों ने अगर इतना ही साहस उत्तराखंड की भ्रष्ट सरकार और भ्रष्ट अफसरों की पोल खोलने में दिखाया होता तो जनता जनार्दन की जाने कितनी भलाई हो गई होती.. पर अब जनता की कौन सोचता है… जनता बस मोहरा है… मोहरे की आड़ में सब माल पीट रहे हैं.. डीजीपी सिद्धू कांड तो सच में आंख खोलने वाला है… पता चला है कि दलाली के पैसे से गाल लाल कर मीडिया उद्यमी बने कुछ नए किस्म के अंतरदेशीय दल्ले भी सिद्धू की गुपचुप पैरोकारी में देहरादून के अखबारों के संपादकों को पटाते घूम रहे हैं… देखना, एक न एक दिन ये साले सब नंगे होंगे… रुपये-सत्ता के जोर से और भ्रष्टों के मेल से ये मीडिया के छोटे बड़े दल्ले भले ही आज खुद को पावरफुल महसूस कर रहे हैं लेकिन जब अचानक इनके पिछवाड़े कोई अदृश्य लात पड़ेगी तो इन्हें समझ में नहीं आएगा कि धूल चाटने गिरे कहां, दाएं बाएं या बीच में… क्योंकि तब भू-लुंठित होना कंपल्सरी होगा, आप्शन होगा केवल जगह चुनने की…

फिलहाल तो अमिताभ ठाकुर को सलाम
जो अपने कबीराना-फकीराना अंदाज में
नित नए नए कर रहे हैं जोरदार काम…

आगे पढ़ें मीडिया के दल्लों का सच, Amitabh Thakur की जुबानी…

भ्रष्ट डीजीपी सिद्धू के पैरोल पर हैं देहरादून के कई बड़े पत्रकार!
http://goo.gl/pYIMkR

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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हम परम कुशिक्षित और चरम अहंकारी उत्तर भारतीय…. (संदर्भ- मंगलयान प्रोजेक्ट की शीर्ष टीम में सभी दक्षिण भारतीय)

Yashwant Singh : इसरो जैसी महान संस्थाओं में खुद को या खुद के बेटे-बेटियों को भेजने के बारे में हम उत्तर भारतीय परम कुशिक्षित और चरम अहंकारी लोग तभी सोच पाएंगे जब रिश्वत लेने, दलाली करने, जातिवाद फैलाने, धार्मिक पाखंडों के पक्ष में भोंकने और कुत्ते नेताओं के लिए कांव कांव करने से टाइम पाएं. मंगलयान के सफल और चमत्कारी प्रोजेक्ट में शामिल इसरो के प्रमुख लोगों में कोई उत्तर भारतीय खोजे नहीं मिलेगा…

http://www.thenewsminute.com/technologies/201

इसरो में जाने का मतलब होता है कि आप भविष्य के लिए काम कर रहे हैं… आप ब्रह्मांडों के अनदेखे, अनभेदे चीजों को लेकर प्लान व एक्जीक्यूट कर रहे होते हैं… यह सब करते हुए आपका ओछापन खत्म होता है, आपकी घटिया सोच नष्ट होती है और आप उदात्त व महान बनते जाते हैं… ऐसी उदात्तता जिसमें तनिक अहंकार शेष नहीं रह जाता… ऐसी महानता जिसमें किसी को छोटा मानने की सोच नहीं रह जाती…

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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कैंसर पीड़ित पत्रकार सत्येंद्र को भड़ास की तरफ से पांच हजार रुपये की मदद

Yashwant Singh : कैंसर पीड़ित पत्रकार साथी Satyendra आईसीयू से बाहर आ चुके हैं. उनकी आर्थिक मदद के लिए कई सारे साथी आगे आए हैं, यह अच्छी बात है. भड़ास की तरफ से पांच हजार रुपये देने का जो वादा मैंने किया था, आज पूरा किया. सत्येंद्र के एकाउंट में पैसा क्रेडिट हो गया है.

Yashwant Singh : फेसबुक के अपने एक पत्रकार मित्र Satyendra P Singh इन दिनों संकट में हैं. उनका कैंसर का आपरेशन हुआ है. अभी वो आईसीयू में हैं. आर्थिक मदद की अपील उनके करीबियों और परिजनों ने की है. भड़ास की तरफ से मैंने एक छोटी राशि पांच हजार रुपये उनके एकाउंट में ट्रांसफर करने का वादा किया है. आप सबसे भी अपील है कि सत्येंद्र की यथासंभव आर्थिक मदद करें. सत्येंद्र का निजी एकाउंट नंबर खबर में उल्लखित है. याद रखिए, हमारी आपकी छोटी छोटी मदद एक पत्रकार को इलाज के दौरान आने वाले आर्थिक संकट से निजात दिला सकती है.

Yashwant Singh : कैंसर अस्पताल में Satyendra P Singh स्वस्थ, मस्त, फेसबुक-पेंटिंग में व्यस्त मिले. साथी प्रेम भाई सेवा में रत मिले. हंसते, मुस्कराते, खिलखिलाते रहे हम सब. कैंसर अस्पताल से बीमारी भगाते रहे हम सब. — at Rajiv Gandhi Cancer Hospital.

Yashwant Singh : Please help Satyendra P Singh in winning his battle against cancer & deposit your contribution (as much as you can) in the account below-

Satyendra Pratap Singh
Kotak Mahindra Bank
Ac No -01720030181324
Branch- KG Marg
New Delhi
IFSC- KKBK0000172

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

अगर आपने भी कैंसर पीड़ित पत्रकार सत्येंद्र की आर्थिक मदद की है तो भड़ास को bhadas4media@gmail.com पर मेल भेजकर सूचित कर सकते हैं ताकि आपके नेक काम को प्रकाशित किया जा सके. सत्येंद्र से संबंधित अन्य जानकारियां नीचे दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करके पा सकते हैं….

मुख कैंसर के थर्ड स्टेज से जूझ रहे हैं बिजनेस स्टैंडर्ड हिंदी के पत्रकार सत्येंद्र प्रताप सिंह

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पत्रकार सत्येंद्र का छह घंटे तक चला मुख कैंसर का आपरेशन, आर्थिक मदद की अपील

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आईसीयू से बाहर आए पत्रकार सत्येंद्र, हालत बेहतर, स्वामी बालेंदु ने भी की आर्थिक मदद की अपील

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कैंसर पीड़ित सत्येंद्र की कहानी : 33 रेडियेशन के साथ 4-5 कीमोथेरेपी होगी, आर्थिक संकट से अवसाद

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जितनी देर हम रहे, कैंसर पीड़ित पत्रकार सत्येंद्र के चेहरे पर मुस्कान बनी रही

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पत्रकार सत्येंद्र का छह घंटे तक चला मुख कैंसर का आपरेशन, आर्थिक मदद की अपील

दिल्ली के रोहिणी-5 स्थित राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर में पत्रकार सत्येंद्र प्रताप सिंह का कल मुख कैंसर का आपरेशन हुआ. आपरेशन करीब छह घंटे तक चला. डाक्टरों का कहना है कि आपरेशन सफल रहा. सत्येंद्र को अभी आईसीयू में रखा गया है और अगले कुछ दिनों तक आईसीयू में ही रहने की संभावना है. सत्येंद्र दिल्ली में हिंदी बिजनेस डेली बिजनेस स्टैंर्डड में मुख्य उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं.

सत्येंद्र गोरखपुर के रहने वाले हैं. बनारस स्थित बीएचयू से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने ईटीवी यूपी में संवाददाता के रूप में करियर की शुरुआत की. कई नौकरियां बदलते हुए दिल्ली आए और पिछले पांच साल से बिजनेस स्टैंडर्ड हिंदी में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. सत्येंद्र को मुख कैंसर का तीसरा स्टेज था. इसी कारण उन्हें आपरेशन कराना पड़ा. सत्येंद्र की देखरेख के लिए आए उनके छोटे भाई ने बताया कि आपरेशन में करीब ढाई लाख रुपये का खर्च है. दो लाख रुपये अलग से लगेंगे दवाओं और रेडियेशन आदि में. इस तरह लगभग पांच लाख रुपये के आसपास खर्च आने की संभावना है. सत्येंद्र से जुड़े पत्रकारों ने फेसबुक पर इस मुश्किल घड़ी में सत्येंद्र की आर्थिक मदद की अपील की है. सत्येंद्र का निजी सेविंग एकाउंट नंबर इस प्रकार है…

Satyendra Pratap Singh
Kotak Mahindra Bank
Ac No -01720030181324
Branch- KG Marg New Delhi
IFSC- KKBK0000172

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह ने सत्येंद्र के एकाउंट में भड़ास की तरफ से पांच हजार रुपये की मदद राशि ट्रांसफर करने की घोषणा की है. साथ ही उन्होंने मीडिया से जुड़े सभी वरिष्ठ-कनिष्ठ लोगों से अपील की है कि वे अगर स्वयं के स्तर पर एक राशि सत्येंद्र के एकाउंट में जमा कर देंगे तो एक होनहार युवा पत्रकार को संकट से निपटने में काफी आसानी होगी.

मूल खबर…

मुख कैंसर के थर्ड स्टेज से जूझ रहे हैं बिजनेस स्टैंडर्ड हिंदी के पत्रकार सत्येंद्र प्रताप सिंह, परसों होगा आपरेशन

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यशवंत पर लड़की छेड़ने का एफआईआर कराया इसीलिए वह मेरा विरोधी बन गया है : कविता कृष्णन

विवादित नारीवादी कविता कृष्णन से बिहार के गया जिले के चर्चित वकील मदन तिवारी ने फोन पर लंबी बात की.  कविता कृष्णन पर उठ रहे ढेर सारे सवालों, लग रहे ढेर सारे आरोपों को लेकर मदन तिवारी ने उनसे एक-एक कर विस्तार से बात की. पर अपने पाखंडी स्वभाव के अनुरूप कविता बात करते-करते मदन पर ही भड़क गई और उन्हें नानसेंस तक कह डाला. मतलब ये कि बातचीत करने तक का धैर्य नहीं दिखा सकी. यही हड़बड़ी वह राजनीति और नारीवाद में भी करती है जिसके कारण कई जेनुइन लोग बुरी तरह फंस गए, आत्महत्या करने को मजबूर हुए या उनकी इज्जत तार-तार कर दी गई. कविता की ओछी मानसिकता और टीआरपी खोर महिलावादी सक्रियता को लेकर एक बड़ा खेमा विरोध में खड़ा हो चुका है. इसी सबको लेकर मदन ने कविता से बातचीत की और उनका पक्ष जानना चाहा.

Kavita Krishnan

पूरी बातचीत को मदन तिवारी ने फेसबुक पर डाला है. इस बातचीत में जब मदन तिवारी ने कविता कृष्णन से पूछा कि आखिर यशवंत और अविनाश पांडेय समर आपका विरोध क्यों करते हैं तो कविता ने यशवंत के बारे में बताया कि कुछ साल पहले लड़की छेड़ने का मुकदमा यशवंत पर मेरी मदद से संभव हुआ, जिसके कारण वह मेरे खिलाफ है. मदन तिवारी के स्टेटस पर यशवंत ने भी कमेंट कर अपना पक्ष रखा है. पूरे प्रकरण को विस्तार से आप नीचे पढ़ सकते हैं और कविता कृष्णन जैसी कथित नारीवादियों की सोच, हकीकत जान सकते हैं.

कविता कृष्णन से मदन तिवारी की बातचीत यानि कविता कृष्णन के पक्ष को भड़ास पर यहां इसलिए प्रकाशित किया जा रहा है ताकि यह कतई न कहा जा सके कि भड़ास किसी के खिलाफ एकतरफा अभियान चलाता है. अगर भड़ास के एडिटर यशवंत यानी मेरे खिलाफ भी कोई कुछ कहता है, कोई आरोप लगाता है, कोई नकारात्मक कमेंट करता है तो उसको भी भड़ास पर प्रमुखता से प्रकाशित होना चाहिए. अगर कोई संपादक या कोई पत्रकार खुद का चीरफाड़, पोस्टमार्टम, इंट्रोस्पेक्शन अपने हाथों अपने मीडिया माध्यम पर नहीं कर सकता तो वह दूसरों के खिलाफ किस नैतिकता से लिख सकता है. पत्रकारिता को अंततः पारदर्शिता ही बचाएगी अन्यथा कारपोरेट की मदद से मीडिया मालिकों और मीडिया दल्लों ने पूरे सत्कर्म-जनकर्म को धत्कर्म-एलीटकर्म में तब्दील कर दिया है.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


मदन तिवारी, वरिष्ठ वकील, गया (बिहार)

Madan Tiwary : नीचे मैं कविता कृष्णन के साथ हुई बातचीत को दे रहा हूं। एक बात तो ये स्पष्ट है यह शार्ट टेंपर लड़की है और अहंकारी भी। बातचीत के अंत में उसका यह पूछना कि मैं कौन होता हूं यह सब पूछने वाला, इसके अहंकार को प्रदर्शित करता है। हालांकि किस्मत अच्छी थी हट गई अन्यथा आज उसको अपने अहं का पता चला जाता।

madan :what is the truth behind khurshid anwar case and what you know . this issue has brought storm over facebook.

kavita : Please read the statement by feminists including me in Nov, posted on Kafila. Anyway why are the ISD members asking me about it, why not question those inside ISD who initiated the enquiry against Khursheed? They are targeting me mainly because I present a political target.

madan: No other reason. actually in beginning my view was different and mayank had admitted but now few social activist are blaming you and mayank to conspire that is why i am asking. i am not member of any group or organisation but want to know the truth. have you ever interviewed that north east girl and if so whats your opinion about her version .

kavita: I have never even met Mayank in my life. I can assure you the Manipuri complainant is not a BJP person or even a political person. Beyond that no one can know the truth. Truth might have been known had Khursheed not committed suicide and instead faced enquiry. I never appeared in India TV studio, only gave brief byte saying it’s good that the girl has filed FIR, now enquiry can proceed. Isnt that what Khursheed’s friends say he himself was wanting? If so why attack me?! Can they dare make public minutes of ISD meetings on this topic? So that we can know who, including Khursheed etc, said what in there? You should ask them these questions. Pl dont quote me. Just look at the feminists statement and share that please.Yes I have spoken to the girl. I believe her to be most genuine. But I can’t prove that she is right since Khursheed is no more and no enquiry is possible. In fact the girl herself has faced hell and has needed a lot of help and support in coming back to normal. And yet these people are openly calling her a liar. Why? I NEVER called Khursheed a rapist.

madan: yes i know it now no enquiry is possible becoz even law prohibits proceeding if accused expire . i had used the word rapist for khurshid and had made posting about him but many of his supporter tried to convince me about a conspiracy hatched by mayank, ila and you in order to get command of boond and to stop enquiry regarding some misappropriation of fund.if you dont mind may i ask few questions ?

kavita: All questions are answered.in two Kafila posts – one by me & Kalyani Menon Sen and one by many feminists together. Oh and also one by Sucheta De and Shivani Nag. I neither know nor am interested in Mayank Ela etc. I just know that the girl herself has spoken against Mayank and Ela also. So she can hardly be their conspiracy.

madan: yes and when i countered mayank he admitted many things thereafter i advised him to go to police. but why samar and yashwant are against you ? perhaps they not associated with ISD.

kavita: Yashwant molested daughter of a comrade in his house some years ago and she filed FIR with my help. And Samar himself was thrown out of PSU in jnu because he beat up his girlfriend badly. These 2 hate women and feminists. And I told you Kafila website! Not answered.in! That is typo.

madan : ok i check that website kafila. one more thing why these ISD people are defending khurshid . what lust they have ? those two girls made posting about your rude behaviour which, after conversation with you ,i think is baseless. difficult to search that article can you provide link or category

kavita:What rude behaviour?! Is it not rude of them to phone me to call me names?!Why should I respond to their kangaroo court?! They have questions they haven’t answered yet. Read http://kafila.org/2014/02/17/feminist-reflections-on-the-tragic-suicide-of-khurshid-anwar/ Also read this brief response by Ranjana who was a friend of Khurshid’s for much longer than Samar etc who actually did not know him that well. https://groups.google.com/forum/m/#!msg/humanrights-movement/OGHUwffaiAI/5Bz4M-Wb6j0J

madan:ok right now i was busy with my client kavita ji even hardcore communist and sympathisers are against of your rigidity and stand to support JNU molestation accused. why double yardstick ? better introspect ,rectify and tender apology.

kavita : I have not supported any molestation in jnu. please don’t talk nonsense. Who are you by the way? Please prove that I supported molestation.

madan : kavita krishnan mind your language . what the word nonsense denotes? so far your question about my locus standi is concerned, i am a nameless, identity less common people .whether raising common issue required authority ?why die hard communist sympathiser are critising you one more thing kavita i believe in transparency so i may make this whole conversation public. i least bother consequence once decide to fight against wrong.

बिहार के गया जिले के जाने-माने वकील, पत्रकार और एक्टिविस्ट मदन तिवारी के फेसबुक वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ कमेंट यूं हैं…

Sheeba Aslam Fehmi Mujtahida hmmm… Madan ji in this case we can not Club Mayank-Ila with Kavita. And Kavita entered into this at much later stage. Mayank-Ila had the proof of Khurshid sahab’s innocence in Ila’s mobile msg box (Ila herself told me all this in my office), and he himself requested them both to provide their evidence to the internal investigation committee of ISD, but they were having vicarious pleasures at the cost of his extreme humiliation and victimization on social media and in ISD.
 
Samar Anarya मधु किश्वर की जरखरीद गुलाम है ये, पैसा लेती है इतना तो साफ़ हो गया. कितना, ये पता लगाना बाकी है.
 
Asad Jafar arre band kro isko kyu mre ko aur marte ho bhai
 
Anand Kumar अरे रिलैक्स.. cool down Samar Anarya भाई.. ये सब आपके कल परसों वाले शादी के पोस्ट को देख के लिख रही होगी.. उनकी इर्ष्या जायज है.. कोई ढंग का मिला नहीं मिस किलर को.. कहीं तो खुन्नस निकलेंगी और कुत्ता (and कुतिया) दोनों वफ़ादार प्राणी हैं आपने इनके नाम के साथ उनका नाम जोड़ के जो पाप किया है इसके लिए भी आपकी मेनका गाँधी से शिकायत होनी चाहिए.. थोड़े बेहतर शब्द आते हैं.. लेकिन अब वो public फोरम पे टाइप न करें cool down..

Samar Anarya Sheeba Aslam Fehmi सही कह रही हैं Madan Tiwary भाई. कविता कृष्णन के रिश्ते मयंक इला से नहीं हैं. वैसे भी मयंक लखनऊ में कुछ वक़्त एसएफआई में रहा है सो आइसा के लिए अछूत हुआ. कविता बूँद पर कब्जे के के लिए लड़ रहे जहरीला तपन (उर्फ़ तपन कुमार) की करीबी है. इस तपन कुमार का दिल्ली सर्कल से परिचय उसके गुर्गे, दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रोफ और वीडिओ वितरक जहरीले प्रोफ़ेसर आशुतोष कुमार ने करवाया था, 2012 में आइसा की छात्र युवा कन्वेंशन में हिस्सा लेने बहुत त्याग करके ‘जनरल’ डिब्बे में बैठ के चला आया था 

Madan Tiwary Samar Anarya Sheeba Aslam Fehmi Mujtahida Asad Jafar what i gathered ,she does not know anything worthwhile and perhaps she was not even approached but the name of khurshid ,a social activist ,was reason to get involve and she did so just to exploit the incidence for own gain. without going into depth of consequences. her role is limited to defame khurshid anwar . Asad saheb if there was a conspiracy then avoiding discussion or dropping issue will only create confusion and doubt. both side don’t have expert to investigate or enquire the matter and solve mystery . best way is that get it solved.
 
Sheeba Aslam Fehmi Mujtahida I spoke to Kavita in person to request that she first ascertain the genuineness of the case. I suggested her to listen to both parties as KA had very different version of turn of events. Kavita refused to pay any heed to my suggestion. KA told me several times that her involvement denotes some greater game plan.  as the narration of the case in social media was grossly fudged up.
 
Samar Anarya She definitely had designs. She refused to listen to you, Mohit, Shakil bhai and many others while maintaining that she ‘knew’ that the allegations were correct.
 
Sheeba Aslam Fehmi Mujtahida I still feel that its some kind of ego-trap she is caught in. Wish she overcome it herself soon and make some just contribution to the case.
 
Samar Anarya I don’t think it’s about ego Sheeba. See Kranti bhai’s comment… he was a national level leader when I had just joined in. All of them slowly left the party, terming it a giroh! And it definitely has something to do with this super elite gang’s efforts to keep the Bihar based party in tight control.
 
Madan Tiwary Samar Anarya I not a common people, i know procedure to investigate and to find the facts. we teach others so i cant buy kavita’s version. we cross examine witnesses ,even experts and derive the things we required. i quoted two factor in my another posting. we believe in evidence and just one hour with any witness or victim is enough to reach on conclusion. we even cross examine doctors . in a case, hairline fracture was shown to make injury grievous and in support , ultrasonography of head was produced but when i asked the question about suture that gentleman doctor admitted the similarity and even mal positioning of injured reason for wrong finding. so it is easy . unfortunately i dont have any link to talk with that north east girl.
 
Samar Anarya Unfortunately, that will be pointless with one party lynched by the other. However, those who played dirty role in lynching must be punished.
 
Samar Anarya बाकी इसकी हरक़त यहीं देख लीजिये- Yashwant भाई और मुझ पर दोनों पे आरोप लगा गयी! और मेरे केस में तो इसे वो पता है जो मेरी गर्लफ्रेंड को नहीं है! बाकी उसी जेएन यू में खड़े होकर एक आरोपी को बचाया था, अब दूसरे को बचा रही है. वजह? पार्टी के हैं.
 
Madan Tiwary Samar Anarya भाई सच के सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं है इन्हें। मेरे केस में इनको अपनी औकात पता चल गई थी जब गया का हर राजनीतिक दल, पत्रकार, नेता मेरे पक्ष में आ खड़े हुए थे । मेरी पत्नी तो मेरे जेल में रहने के दौरान ही जिसकी हत्या हुई थी उसके घर और माले के आफिस में पहुंच गई पूछने की क्यों फंसाया। आज मुझे भी वह समय याद आ रहा है शायद मैं भी आत्महत्या कर लेता या जेल तोड़कर भाग जाता और इनके खिलाफ हथियार उठा लेता… वह तो अच्छा हुआ जमानत हो गई। इन्होने स्वीकार किया था कि मुझे जानबुझकर गलत फसाया है..
 
Samar Anarya हाँ कल ही बताया आपने। कितनों पर आरोप लगाये हैं इन्होने कितनों पे लगायेंगे। इसीलिए उखड़ रहे हैं जमीन से।

Ravi Sinha Madan Tiwary Bhai we may differ with each other on many issues but I admire you for stuff like this. My only assessment is that once again Left Brigade will start calling you Sanghi and Brahmanical…
 
Madan Tiwary Ravi Sinha sir difference of opinion should not be turned into character assassination or to settle score. a biased and pre judgmental person doesn’t deserve to be a public figure and if he or she is rigid, required condemnation .
 
Rahul Anand मदन सर, आज मैं ख़ुद को भाग्यशाली मानने को तत्पर हूँ कि आपने मुझे अपने मित्र सूचि में स्थान दिया है, एक सच्चे सामाजिक कार्यकर्ता का साथ अद्भुत आभास कराता है ।
 
Madan Tiwary Rahul Anand जी हम सब इंसान है और एक बराबर है । दोस्ती दो तरफा होती है आपने भी तो मुझे अपना दोस्त बनाया..
 
Rahul Anand सर आप द्वारा बिना किसी पूर्वाग्रह के और बिना लाग लपेट के वैसे सामाजिक विषयों पर जो प्रबुद्ध लड़ाई लड़ी जाती है जिसे कोई दूसरा सोशल मीडिया में छूना भी पसंद नहीं करता , मैं इसका कायल हूँ …….. खुर्शीद अनवर और उस मणिपुरी लड़की से सम्बंधित घटना की बस मुझे सुनी सुनाई जानकारी है, आज कुछ जानने का प्रयास करूंगा और कुछ आपके इस पोस्ट ने बता ही दिया है …….. आपके जुझारूपन को सलाम !

Praveen Shekhar बाबा को सलाम… कभी समझ नहीं पाता आपको… एक पोस्ट पर आपका विरोध करता हूं कि अगले में निरुतर… आप बहुत साहसी हैं… काश मैं भी इतना साहसी होता…
 
Yashwant Singh कई दिनों से लगातार यात्रा के कारण चैन से बैठ नहीं पाया ताकि इस पोस्ट को पूरा पढ़ कर इत्मीनान से कमेंट कर सकूं. आज फुर्सत में हूं. पहले आपके आरोपों पर मैं अपनी सफाई दे दूं. कविता जी, मालेस्टेशन में आपने एफआईआर कराके बड़ा अच्छा काम किया. लेकिन कम से कम पीड़िता और आपको इसका फालोअप तो करना चाहिए था. न तो आप गवाही देने पहुंची और न ही पीड़िता कोर्ट आई. नतीजा हुआ ये कि मेरे जैसा छेड़छाड़कारी, सांड़, रेपिस्ट, बलात्कारी छुट्टा बाहर घूम रहा है. हां, उन दिनों जब मेरे खिलाफ आपने अविनाश दास को कहकर मोहल्ला ब्लाग पर मीडिया ट्रायल चलवाया था, ”दुनिया के सबसे शैतान आदमी यशवंत” के खिलाफ, तो वो सब पढ़-सुन-देख कर मेरा दिल अक्सर सुसाइड करने का करता था, लेकिन जाने क्यों रुक गया. लगा, ये मुश्किल वक्त मुझे मजबूत बनाने के लिए आया है, टूटने, हराने या मारने के लिए नहीं. बस, तभी से जुट गया, मुकदमा झेलने और भड़ास चलाने में. लड़की को चूमने की कोशिश करने के आरोप में आप की मदद से कराई गई एफआईआर के मुकदमें में अगर एक बार भी कोर्ट जाना भूल जाउं तो मेरे खिलाफ गैर जमानती वारंट निकल जाते. चार-पांच गैर जमानती वारंट झेला. लेकिन कोर्ट ने आप जैसे गवाहों और पीड़िता को दर्जनों बार सम्मन नोटिस सूचना भेजकर बुलाया, कहा कि आप लोग आकर कोर्ट में अपनी बात रखिए, लेकिन आपमें से कोई भी एक लोग एक बार भी कोर्ट नहीं आए, और चूंकि आप लोग पीड़ित पक्ष के थे, इसलिए आप लोगों को कोर्ट न आने पर जमानती या गैर-जमानती वारंट भी नहीं झेलना पड़ता. शायद आप लोग किन्हीं दूसरे लोगों के खिलाफ एफआईआर कराने या बाइट देने या मीडिया ट्रायल चलाने में व्यस्त रहे होंगे. इस कारण आप सभी की गैर-मौजूदगी, बयान न देने आने के कारण कोर्ट को मजबूरन मुझे बरी कर देना पड़ा. कविता जी, आपकी सारी सक्रियता शुरुआती कंगारू कोर्ट ट्रायल तक ही क्यों सीमित रहती है. शायद इसलिए कि आपको तात्कालिक वाहवाही मिल जाए और आप महान नारीवादी के रूप में संसार में इस्टैबलिश हो सकें. अगर आप आरोपियों को दंड भी दिलातीं तो शायद सही किस्म का नारीवाद होता और इससे बाकी लोग भी सबक लेते. मैं यहां कतई सफाई नहीं दे रहा कि मैंने छेड़छाड़ की या नहीं और यह कि पीड़िता गलत थी या नहीं. मैं सिर्फ आपकी वे आफ वर्किंग पर सवाल खड़ा कर रहा हूं कि आपने मेरे कुकृत्य को एफआईआर कराने लायक माना लेकिन उसके बाद अचानक से पूरी तरह विस्मृति लोप की शिकार होकर मामले को भूल गईं. ऐसा नहीं है कि मैं अपने उपर लगे आरोपों को छिपाता फिरता हूं या इससे दूर भागता हूं. अगर हम धरती पर हैं तो हमारे सामने अच्छे बुरे दोनों तरह के दिन, हालात आते हैं और दोनों को झेलना ही पड़ता है, वो चाहे आप हों या मैं हूं. देखिए न. समय का पहिया ऐसा चला कि आपको भी सफाई देते घूमना पड़ रहा है कि आप सच्ची, अच्छी है, बुरी या घटिया बिलकुल नहीं. खैर, आपकी आप जानो, मैं तो अपनी जानता हूं. जिस दिन मैं कोर्ट से आपके द्वारा पहल से कराए गए छेड़छाड़ के मुकदमे से बरी हुआ, तो उस दिन मैंने भड़ास पर एक पोस्ट लिखकर प्रकाशित किया था, पढ़ लीजिएगा. उसमें कोर्ट के बाहर की वो तस्वीर भी है जिसमें मैं खड़ा हूं और कोर्ट का एक सिपाही मेरे बरी होने के पत्र को जज साहिबा की कोर्ट के बाहर लगे बोर्ड पर चिपका रहा है. लिंक ये है…

छेड़छाड़, अदालत, आदेश, आटो, उम्र, जीवन और दर्शन…. ओ भोला भाई!

http://old1.bhadas4media.com/vividh/16130-y.html

अगर दंडित भी हुआ होता तो उसको भी भड़ास पर लिखता छापता. असल मसला ट्रांसपैरेंसी का है. आपकी सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि आप ट्रांसपैरेंट बिलकुल नहीं हो. अपने पार्टी के साथियों के लिए कोई दूसरा नियम-कानून रखती हो और पार्टी के दायरे से बाहर निकल गए लोगों के लिए बिलकुल दूसरा स्टैंड. अविनाश पांडेय समर ने आपके दोगले चरित्र को बड़े अच्छे ढंग से दुनिया के सामने खोल दिया है. बात-बात पर उखड़ने, गुस्सा करने और दूसरों को बेवजह फंसाने-परेशान करने की जगह आपको अब खुद के भीतर झांकना चाहिए और आगे का जीवन ज्यादा डेमोक्रेटिक व ट्रांसपैरेंट तरीके से जीना चाहिए. खैर, भला मैं कौन होता हूं आप जैसी महान क्रांतिकारी कामरेड नारीवादी को सलाह समझाइश देने वाला… बाबा रे बाबा… हां, यह कह सकता हूं खुद को लेकर कि मेरी सेहत पर बिलकुल असर नहीं पड़ता है कि आप या आप जैसे पाखंडी, हिप्पोक्रेट किस्म के कामरेड लोग मुझे अच्छा आदमी मानते हैं या नहीं. अपने पास वक्त नहीं कि इगनोर किए जाने लायक लोगों की चर्चाओं, प्रतिक्रियाओं पर सोचूं और रिएक्ट करूं… आज यह सब इसलिए लिख दिया ताकि दुनिया कविता कृष्णन की ‘महान’ मानसिकता और यशवंत सिंह की ‘ओछी’ सोच को जान सके. बाकी फैसला जनता जनार्दन को करना है कि कौन गलत है कौन सही है.

Bhaskar Agrawal People here need to introspect themselves ego and self praising raised up to extent which vanishes the border of humanity and natural justice . One thing shall always be remembered that everything is fatal in this world.

Madan Tiwary Yashwant Singh जी ये परले दर्जे के पूर्वाग्रह वाले लोग हैं। मेरे केस में तो इन लोगों ने एडमिट किया कि मुझे हत्या के झूठे मुकदमे में फंसाया क्योंकि इनके गैरकानूनी कार्यालय को बंद करवाने का आदेश पारित करवा चुका था। बाद में सफाई दी कि इनके आफिस का झंडा पताका उखाड़ने फेंकने के कारण फंसाया। इनमें नैतिकता नहीं है। दीपांकर खुद को सच्चा मानते हैं न, बुलाये अपने गया की टीम को। पूछे कि गलत फंसाया था या नहीं। वैसे भी फुर्सत मिली तो खुद इनके पटना कार्यालय पहुँच जाउंगा। मैं भी आत्महत्या के लिए सोचने लगा था। इन्हें हिसाब तो देना होगा गलत फंसाने का।

पढ़िए क्या हुआ जब मदन तिवारी ने कविता से बातचीत को फेसबुक पर डाल दिया…

मदन ने कविता कृष्णन से चैट को एफबी पर डाला तो भड़क उठी पाखंडी नारीवादी, किया ब्लॉक

कविता कृष्णन की कुंडली जानने के लिए इन पोस्टों / आलेखों को भी पढ़ सकते हैं…

‘तहलका’ में पेशेवर आंदोलनकारियों पर निशाना, पढ़िए कविता कृष्णन की दास्तान

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श्रुति और उत्पला के सवालों का जवाब देने से डर क्यों रही भाकपा माले लिबरेशन की कविता कृष्णन?

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जेएनयू यौन शोषण कांड : कुछ तो है जो Kavita Krishnan गैंग छुपा रहा है…

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क्या आपने इस मुद्दे पर कम्युनिस्टों की सुपारी किलर Kavita Krishnan का कोई बयान सुना?

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कविता कृष्णन और गैंग का असल सच

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Kavita Krishnan कविता कृष्णन जैसी तथाकथित नारीवादियों का स्टैंड उनकी असलियत बेनकाब कर देता है : समर

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खुर्शीद अनवर का जाना : कामरेड प्रो. आशुतोष कुमार और कामरेड कविता कृष्णन पर सवाल….

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गैंगरेप की शिकार पीड़िता हिंदी पत्रकार है, इसीलिए अंग्रेजीदां नारीवादियों ने चुप्पी साध रखी है!

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ये Kavita Krishnan ‘आप’ पर इतनी आक्रामक क्यों हैं चचा?

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

पहले यश मेहता को गालियां दी, नौकरी से निकाला गया तो भड़ास पर खबर छपने के कारण यशवंत को गालियां दे रहा

Yashwant Singh :  कल रात एक बंदे ने मुझे फोन किया और बिना नाम पहचान बताए धाराप्रवाह माकानाका करने लगा यानि गालियां बकने लगा. खूब दारू पिए हुए लग रहा था. उससे मैं पूछता रह गया कि भाई साब आप कौन हैं, क्या समस्या है.. पर वो सिवाय गाली बकने के दूसरा कोई काम नहीं कर रहा था, न सुन रहा था, न सवालों का जवाब दे रहा था. वह सिर्फ गालियां बकता जा रहा था. फोन कटा तो मैं हंसा. उस बंदे का नंबर फेसबुक पर डाला और फेसबुकिया साथियों से पता लगाने को कहा कि ये कौन शख्स है, जरा काल कर के इससे पूछें.

Divya Ranjan

Divya Ranjan

Divya Ranjan FB Profile


एफबी वाले कितने मित्रों ने पूछा, ये तो नहीं पता लेकिन ढेर सारे साथियों ने उसी के अंदाज में उस गालीबाज शख्स को फोन कर उसकी धुलाई की. मीडिया और पुलिस के कई साथियों को इसका नंबर देकर पता लगाने को कह दिया कि इस नंबर से गाली बकने वाले का नाम पता लोकेशन आदि सर्विलांस के जरिए पता करें व बताएं. सुबह होते-होते सब पता चल गया. आज सुबह मालूम हुआ कि ये शख्स ‘दिव्य रंजन’ नामक प्राणी है जो कभी ‘4रीयल न्यूज’ चैनल में पीसीआर में सेवारत हुआ करता था. वहां के तत्कालीन सीईओ यश मेहता के साथ ऐसी ही ओछी व गाली-गलौज वाली हरकत इसने की थी. तब यश मेहता ने इसके खिलाफ नोएडा में एफआईआर दर्ज कराई और नौकरी से बाहर कर दिया. सीईओ को फोन पर गरियाने, धमकाने आदि से संबंधित एफआईआर की खबर मय दस्तावेज भड़ास पर छपी थी. ये बात इसी साल अप्रैल की है. संबंधित खबर का लिंक ये http://goo.gl/Cq4ozm है, इस पर क्लिक करें और पढ़ें.

भड़ास पर छपी इसी खबर के कारण वह बंदा चिढ़ा हुआ था और करीब चार महीने बाद उसकी चिढ़न कल रात अचानक सतह पर आ गई. उसने मुझे बतौर खलनायक अपने मन-मस्तिष्क में पेंट किया और दिल में छुपा रखी महीनों पुरानी खुन्नस को सामने ले आया. इसी क्रम में उसने नशे की अधिकता में फोन मिलाया और गालियां बकने लगा. हालांकि भड़ास पर छपी खबर में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसका कोई कम अक्ल पत्रकार भी बुरा माने. अगर किसी के खिलाफ कोई एफआईआर हुई है तो उस एफआईआर की कापी के साथ खबर छापने में कोई गलत बात नहीं. यह एक रुटीन किस्म की खबर है. इसमें आहत करने होने जैसी कोई बात ही नहीं है. पर इस खबर के कारण अगर खबर में उल्लखित कोई आरोपी खार खा जाए, कुंठित हो जाए, रिएक्ट करने लगे और दुबारा वही हरकत करे जिसके कारण वह खबर का हिस्सा बना था तो उसे पत्रकार हरगिज नहीं माना जा सकता. वह प्रोफेशनल क्रिमिनल माइंडसेट रखने वाला शख्स माना जाएगा.

ऐसे लोगों का क्या इलाज है? अब सुबह से इस प्राणी को फोन कर रहा हूं तो यह फोन नहीं उठा रहा. ऐसे लोग रात में दारू की उर्जा में स्कोर सेटल करने बैठते हैं. वैसे, सच कहूं तो कुछ-कुछ मेरी तरह का लगता है ये दिव्य रंजन नामक प्राणी. बस एक बड़ा फर्क यह है कि अपन ने कभी नाम पहचान छिपाकर किसी से बदतमीजी नहीं की. जिससे भी बुरी या खरी बात कही तो पहले नाम पता परचिय बताया उसके बाद सुनाया या समझाया. दूसरी बात ये कि अपन कभी छोटे मोटे मसलों को लेकर रिएक्ट नहीं हुए. ज्यादातर मामलों को इगनोर किया, चित्त से देहि उतार के अंदाज में. फिर भी, मैंने भी मदिरापान करके ढेर सारे कांड और कुकृत्य किए हैं, इससे इनकार नहीं. पर जो नाम पहचान छुपाकर और बिना कारण बताए गाली गलौज करने लगे उसे मैं ओछा व महाकुंठित प्राणी मानूंगा. अबे दम है तो पहले नाम पता बताओ, फिर जो कहना है कहो. वैसे मदिरा मस्त विभाग में एक ऐसा रोग है, जो महाकुंठित लोगों को हो जाया करता है. वो ये कि ऐसे लोग पीते ही अथाह उर्जा से खुद को लैस पाते हैं और इसी ताव में कुछ ही देर में विवेक शून्य हो जाते हैं. फिर इन्हें एहसास नहीं होता कि ये क्या कह रहे, क्या कर रहे.

ऐसे लोगों से जब आप सुबह बात करने की कोशिश करेंगे तो ये बात नहीं करेंगे, आंखें नीची किए रहेंगे, आमना-सामना करने से कतराएंगे. यह एल्कोहलिक एब्यूज और डिसार्डर भारत में काफी कामन है. ऐसे मेंटल स्टेट में ढेर सारे अपराध घटित हो जाया करते हैं. सुबह जब दिव्य रंजन ने फोन नहीं उठाया तो उसे मैसेज करके बता दिया कि तुम्हारा नाम पहचान करतूत सब पता है और तुमने रात में जो किया है वह अक्षम्य है, लेकिन अगर तुम्हें गल्ती का एहसास तनिक भी हो तो क्षमा मांग लो, मेरा दिल बहुत उदाहर है, माफ कर दूंगा. अगर ऐसा नहीं हुआ तो लीगल प्रक्रिया में मुझे जाना पड़ेगा. मजेदार है कि दिव्य रंजन मेरे फेसबुक फ्रेंड भी हैं : उनका फेसबुक प्रोफाइल और तस्वीर यहां दे रहा हूं… मैं हमेशा से मानता रहा हूं कि लिखने पढ़ने वाले बरास्ते पुलिस से बात नहीं करते, कलम के जरिए बात करते हैं. इसी कारण पूरे घटनाक्रम को यहां लिख रहा हूं. अगर पुलिस में जाना होता तो अभी तक एफआईआर करा चुका होता. लेकिन किसी की भी एक दो गल्तियां माफ की जानी चाहिए. खासकर तब जब वह घोड़े पर सवार होकर हवा से बात करने वाली दारूबाजी की स्थिति में हो.

दिव्य रंजन को देर सबेर अपने एल्कोहलिक व्यवहार का इलाजा कराना पड़ेगा अन्यथा ये जीवन में कभी बड़ा गड़बड़ कर बैठेगा जिसके चलते उसे पूरे जीवन पश्चाताप करना होगा. इसलिए मैं दिव्य रंजन से अनुरोध करूंगा कि वह नार्मल स्थितियों में बात करे और अपनी बात रखे. अगर उसे भड़ास से कोई शिकायत है, मेरे से कोई शिकायत है तो लिखकर भेजे, उसके पक्ष को प्रमुखता से भड़ास पर प्रकाशित किया जाएगा. भड़ास इसीलिए जाना जाता है कि यह निष्पक्ष मंच है, एकपक्षीय मंच नहीं है. अगर हम गल्तियां करते हैं तो उससे सबक लेते हैं और उसका परिमार्जन भी प्रकाशित करते हैं. सभी के जीवन में उतार चढ़ाव आता है और सभी हालात से निपटने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हैं. पर कई साथी मुश्किलों चुनौतियों को फेस करने की जगह नकारात्मक दृष्टिकोण लिए अतीतजीवी हो जाते हैं. इस अतीतजीविता में सिवाय डिप्रेशन, तनाव, कुंठा, विवाद के कुछ मिलता नहीं है. खैर, यहां काफी लंबा भाषण हो गया लेकिन यह सब लिखना जरूरी था ताकि मेरे दिल दिमाग पर कोई बोझ न रहे और सब कुछ ट्रांसपैरेंट रहे. दिव्य रंजन के लिए मेरी शुभकामनाएं हैं. वो खुद को संभालें, सफल हों, यह कामना है. दिव्य रंजन का फेसबुक प्रोफाइल लिंक ये https://www.facebook.com/dibya.ranjan.792 है.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. इसी मामले पर यशवंत की शुरुआती पोस्ट यूं है…

Yashwant Singh : +917870199133 Es number se ek aadmi makanaka kar raha hai. Apna naam pehchaan bhi nahi bata raha. Chhup ke gaali dene wala ye shakhs kaun ho sakta hai? Vigyaan aawo kar ke dekhen Aap bhi lagiye zara aur apna feedback dijiye. Ek call aapki taraf se en bhayi saab ko banta hai na.. — feeling excited.

इस पोस्ट पर आए कुछ कमेंट इस प्रकार हैं…

UmaShanker Sharma यह फोन अभी गया बिहार के आस पास कही है बाकी सुबह पुलिस में एक कम्प्लेंट डालिए , बाकी वो सम्भाल लेगी

Yashwant Singh Subah police mei jaana hi hai. Tab tak raat ka aanand liya jaaye..

UmaShanker Sharma कोई फायदा नहीं इन उच्चको के मुह लगने का ये सब अपने माता पिता की ग़लतफ़हमी से इस धरती पे आ गए हैं

Shekhar Subedar Great Yashwant Singh ji .Bilkul banta hai.

Arsh Vats Sahb ye kh rha h danish bol rha hu isko alankaar lga diye h bhut ab phn nhi utha rha msg kar diye h bhut sare or sewa btyo sirSee Translation

Ashok Aggarwal स्विच आफ जा रहा है अब ? शायद फट गई ….

Pradeep Sharma दादा अगर इस नंबर वाले को गाली देने की छुट दे तो में कर सकता हू अपनी जुबान भी जरा साफ़ हो जायेगी…..आज्ञा दे दादा..

Prashant Mishra are good ,bahut din se kisi ki gariyaye nhi hai…

Mukesh Gairola KYa aap bhi hamre ley aise taiyar rhengy ?

Anurag Singh Mob.switched off……

Punit Bhargava bihar-jharkhand circle ka number hai

Gyanesh Tiwari Busy ja raha hai. Shayad kayi log ek saath try kar rahe honge.

Vikash Kumar Gupta ha ha iska no. to switch off ja raha hain

Prashant Mishra shubham v.c. to mila nhi.esi sale ko gariaao……abhi sala off aa rha..See Translation

Pradeep Sharma ऑफ़ आ रहा है नंबर दादा..

Prashant Singh Bhaiya meri awaz unko pasand nahi kutch bol hi nahi rahe. waise mai puri rat jaga hi hu check karta rahungaSee Translation

Gyanesh Tiwari Number on hai. Koi uthaya tha lekin bol nahi raha hai.

Yashwant Singh Jab bhi number on ho, en bhayi saab ko phone kariye. Baaki servilance ki sewaaye lene ki taiyaari hai. Jald hi mahashay ko saamne le aata hu.

Shubham Pandey Hum bhi try kiye. Waisa hi mann mera hai. Frustiyaaye huye hai tab se yaar. Gariyaya jaaye saale ko kuttu smjh ke hi Prashant Mishra

Yashwant Singh Number on hai. Busy bata raha hai. Mai bhi try kar raha. Aap sabhi bhi kariye. Gaali do lekin naam pehchaan ke saath. Chhupa khel pasand nahi aata apan ko.

Pradyumna Yadav एक धक्का गाली-गलौज हुयी है । उसका पूरा खानदान किये है । ससुरा , दांत चियार रहा था । बहुत बेहया लगता है ।

Yashwant Singh Pradyumna Yadav ha ha ha … Wo bhi sochega kaha fas gaya

Ashok Aggarwal मुझे लगता है उसे ये न0 बन्द करना पडेगा वो सोच रहा होगा पडी लकडी ले ली….

Kamal Kumar Singh हम एक ठो उससे बात पूछे, उसके बाद वो भड़क गया। नंबर सदाबहार मनोरंजन का साधन है ये। मजे लिजिए समय समय पर सब।

UmaShanker Sharma यशवंत भाई, गुस्ताखी के लिए अग्रिम माफ़ी उसके लिए क्या है वो तो निर्लज्ज होगा , लेकिन अपने तो निर्लज्ज नहीं न हो सकते अपनी जुबान काहे को कडवी करे इन सब को ट्रेस आउट करने में पुलिस को केवल चार घंटे लगते हैं, और थोड़ी पहचान हो तो ६ घंटे में गिरफ़्तारी भी हो जाती है सामने आएगा तो उसके समझ में आ जायेगा के अगले तीन पीढियों को ये समझाना है के ऐसा काम नहीं करने का

Yashwant L Choudhary मैंने तो कुछ सुना ही नहीं, फोन उठाते ही अपनी पूरी भड़ास निकाल दी, फोन ही काट दिया मेरा

Yashwant Singh UmaShankar Sharma bhayi. Aap se sahmat hu. Kal din mei ho jaayega kaam. Lekin raat mei kyu karen aaraam

Aman Singh Yah sala kisi bikau mediahause ka pilla hoga..

मुकेश कुमार http://www.truecaller.com/in/7870199133

Alpna Chauhan Hahaha…thakur shab k sath prani n ye vyabhar kiya h kya isko chor diya jaye?

Gyanesh Tiwari Diya hoon khaane bhar ko. Saala palat ke gaali bak raha hai. Subah iska ilaaj hona hi chahiye.

Yashwant Singh Mere paas abhi uska phone aaya. Bol raha hai ki dusro se gaali dilwa rahe ho.. es sadachaari pe to mar mar jaawan.

Gyanesh Tiwari Hahahaha… Jo bhi hai, bahut bada wala patit hai…

Syed Shakeel Good hai boss …..kamaal hai ap bhi wo ek apke pochhe laga tha apne ek hajar log uske pichhe laga diye ….uski to maa ka ho gaya saki nakaSee Translation

Abdul Noor Shibli Oo kaisa besharm hai re bhai…..

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