A टीम आउट, B टीम की इन्ट्री…समझिए तेज प्रताप का पूरा खेल… देखें तस्वीरें

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राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के बेटे तेज प्रताप यादव पिछले कुछ दिनों से कुछ पत्रकारों से तंग आ चुके थे। जिसको लेकर उन्होंने 9 पत्रकारों पर मानहानि का नोटिस जारी किया। उनके नोटिस को देखकर ऐसा लग रहा था कि अब उन्हें पत्रकारों की जरूरत नहीं। लेकिन यह क्या! दूसरे ही दिन कुछ पत्रकारों को स्पेशल निमंत्रण देते हुए अपने आवास बुलाए जहां उनकी मेहमान नवाजी की गई। अब सबसे बड़ा सवाल है कि अगर तेज प्रताप पत्रकारों से नाराज थे तो दूसरे पत्रकारों को बुलाने की ऐसी क्या जरूरत पड़ गई थी।

तो इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक चश्मे के अनुसार अगर देखा जाए तो यही कहा जाएगा कि तेज प्रताप A टीम के पत्रकारों को आउट करते हुए B टीम के पत्रकारों की इंट्री करवाई है। अब तेजप्रताप B टीम के पत्रकारों के साथ पॉलिटिकल लड़ाई लड़ने के साथ-साथ अपनी वाहवाही वाली खबर दिखाएंगे क्योंकि जिन पत्रकारों के खिलाफ उन्होंने नोटिस जारी किया है वह पत्रकार तो अब उनके समर्थन में अगरबत्ती छाप और साइकिल रेस की खबर तो दिखाएंगे नहीं तो इस खबर को दिखाने के लिए ही दूसरी टीम की एंट्री करवाई गई है। इसके पीछे और भी कुछ मकसद हो पर अपना काम निकालने के लिए तेजप्रताप का पत्रकारों की मेहमान नवाजी की तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रही है जिसको लेकर कई तरह के कमेंट भी आ रहे हैं।

A टीम आउट, B टीम की इन्ट्री…
पिछले दिनों तेज प्रताप यादव द्वारा यूट्यूबर के साथ बदतमीजी की गई जिसका वीडियो सोशल मीडिया के साथ-साथ नेशनल न्यूज़ चैनल पर भी दिखाया गया। तेज प्रताप के इस वीडियो का असर क्या हुआ यह तो सामने नहीं आया लेकिन मार्केट में पत्रकारिता करने वाले A टीम के 9 पत्रकारों पर मानहानि का नोटिस जारी किया गया। अब तेज प्रताप यादव नोटिस जारी करने के बाद पत्रकारों का मूड जांचने के लिए दूसरे ही दिन Bटीम के 9 पत्रकारों की अपने सिस्टम में एंट्री करवाई। यह सभी पत्रकार सेटेलाइट मीडिया के है। जिनके ऊपर मानहानि का नोटिस जारी किया गया वह भी सेटेलाइट मीडिया के ही थे। अब आप समझ ही गए होंगे कि 9 पत्रकारों को आउट करने के बाद अपनी वाहवाही की न्यूज़ दिखाने और आगे की रणनीति के लिए दूसरे 9 पत्रकारों को अपने आवास पर गेट टुगेदर के लिए बुलाया और मेहमान नवाजी भी की। अब सबसे बड़ा सवाल उनके आवास पर पहुंचे पत्रकारों ने उनसे यह भी जानने की कोशिश नहीं की कि उन्होंने हमारे साथी पत्रकार पर मानहानि का नोटिस क्यों भेजा ? अगर वहां पहुंचे पत्रकार इस तरीके का सवाल करते तो शायद वह भी A टीम में शामिल हो जाते हैं।

ापत्रकारिता के घटते स्तर का नमूना…
देखते ही देखते पत्रकारिता अब देश का सबसे घृणित पेशा बनते जा रहा है। वह भी एक वक्त था जब पत्रकार को देखने और सुनने के लिए लोगों की लाइन लग जाती थी अधिकारी के साथ-साथ नेता मंत्री भी उनके लिए कुर्सी छोड़ खड़े होते थे। और आज भी एक वक्त है जब पत्रकार बोलने से ही लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठने लगते हैं तो दूसरी तरफ नेता मंत्री अधिकारी कुर्सी छोड़ने की बात तो दूर सीधे मुंह बात करना भी उचित नहीं समझते हैं। महज कुछ वर्षों में पत्रकारिता एक घटते स्तर का जिम्मेवार सरकार और उनके चाटुकार हैं। जिनकी वजह से अब सच्ची पत्रकारिता दम तोड़ती नजर आ रही है। आज के वक्त में देश ने सत्ताधारी विधायक के खिलाफ खबर चलाने के एवज में पत्रकारों को नंगा होते भी देखा है। पत्रकार को नंगा करने वाले पर कार्रवाई के नाम पर सरकार के द्वारा सिर्फ दिखावा किया जाता है। या यूं कहें कि सरकार के द्वारा पत्रकारों पर कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहन देने का काम किया जाता है। क्योंकि पहले सरकार पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानती थी लेकिन अब सरकार ही उसे अपने रास्ते का कांटा समझती है जब कभी सरकारी विभाग की नाकामी को पत्रकार दिखाते हैं तो अधिकारी और सरकार दोनों मिलकर उसे इतना दबा देते हैं कि दूसरा कोई पत्रकार उस तरफ नजर उठाकर देखने की हिम्मत ही नहीं करता है। कुछ वर्षों से सरकार और उनके अधिकारियों के द्वारा अंग्रेजों की नीति पत्रकारों पर अपनाई गई है फूट डालो और राज करो। जैसे कोई पत्रकार सरकार के किसी भी सिस्टम का विरोध करें तो उस को बदनाम करने तथा दबाने की पूरी रणनीति तैयार करो। देखते ही देखते स्थिति अब ऐसी हो गई है कि पत्रकार का मालिकाना भी सरकार के सामने घुटने टेक चुका है अब ऐसी स्थिति में पत्रकारिता कहां जिंदा है। फिर भी कुछ पत्रकार अपने आप को सरकार और उनके पूंजी पतियों की वाहवाही कर लोकतंत्र के चौथा स्तंभ समझते हैं यह दुर्भाग्यपूर्ण है। आने वाले कुछ वर्षों में अब पत्रकारिता की स्थिति कैसी होगी यह तो कहना मुश्किल है पर अभी जो पत्रकारों का हालात है वह जीवंत पत्रकारिता के लिए ठीक नहीं है। इसमें सुधार की जरूरत है। पूरे देश के पत्रकारों को अब अंग्रेज की नीति फूट डालो और राज करो के सिस्टम में कैद कर लिया गया है इसी का फायदा बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने उठाया और 9 पत्रकारों को आउट करते हुए अन्य 9 पत्रकारों को अपने सिस्टम में इन करवाया है।

पटना से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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  • पत्रकारिता के दामन को दागदार करने वाले लोग कौन हैं? कौन सा तबका हावी है, यह उन सब को पता है...जो मीडिया से जुड़े हैं। पब्लिक को बिल्कुल ही पता नहीं है। जिन लोगों ने संस्कृत भाषा को गर्त में डाला, वही लोग आज पत्रकारिता को भी कलंकित कर रहे हैं। चाटूकारिता आज से नहीं शुरू हुई है, सफेदपोश मेरिटधारी वर्ग हमेशा से अपना उल्लू सीधा करता रहा है।

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