दिल्ली विस चुनाव में न्यूज चैनल खुल्लमखुल्ला ‘आप’ और ‘भाजपा’ के बीच बंट गए हैं

Dayanand Pandey : दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार टीवी चैनल खुल्लमखुल्ला अरविंद केजरीवाल की आप और भाजपा के बीच बंट गए हैं। एनडीटीवी पूरी ताकत से भाजपा की जड़ खोदने और नरेंद्र मोदी का विजय रथ रोकने में लग गया है। न्यूज 24 है ही कांग्रेसी। उसका कहना ही क्या! इंडिया टीवी तो है ही भगवा चैनल सो वह पूरी ताकत से भाजपा के नरेंद्र मोदी का विजय रथ आगे बढ़ा रहा है। ज़ी न्यूज, आईबीएन सेवेन, एबीपी न्यूज वगैरह दिखा तो रहे हैं निष्पक्ष अपने को लेकिन मोदी के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाने में एक दूसरे से आगे हुए जाते हैं। सो दिल्ली चुनाव की सही तस्वीर इन के सहारे जानना टेढ़ी खीर है। जाने दिल्ली की जनता क्या रुख अख्तियार करती है।

Sheetal P Singh : नरेन्द्र मोदी सचमुच में एक क़ाबिल राजनेता हैं बड़ी सफ़ाई से उन्होंने दिल्ली चुनाव को केजरीवाल बनाम मोदी को नेपथ्य में डाल केजरीवाल बनाम किरन बेदी कर दिया ! बीते कुछ दिनों की मीडिया कवरेज इसकी गवाह है ! किरन बेदी कोई बीस दिन पहले तक इंडिया टुडे ग्रुप के टी वी चैनलों पर चुनाव के दौरान होने वाली बहसों में panelist का contract डिस्कस कर रहीं थीं यानि कहीं से लूप में नहीं थीं और आज दिल्ली BJP की पूरी लीडरशिप परेड में है। केजरीवाल की जीत का माहौल बनते ही तलवारें म्यान से बाहर निकल आंईं हैं । शांतिभूषण ने किरन बेदी को उस समय ईमानदारी की सनद देना तय किया जब तीस हज़ारी में दिल्ली के वक़ील उनका पुतला फूँकने के लिये इकट्ठा हो रहे थे । कल जस्टिस हेगड़े ने बीजेपी/राजनीति में आने की अफ़वाहों पर पूर्णविराम लगाकर ऐसी ही एक कोशिश धराशायी की थी । अन्ना से किरन बेदी का समर्थन कराने की कोशिशें फलीभूत न होने से भी आप” का भूषण कैम्प समय से पहले किरन बेदी की सुरक्षा में उतर पड़ा। आश्चर्यजनक रूप से कवि कुमार विश्वास भले ही केजरीवाल के साथ न दिखे हों पर मनीष और दूसरे दोस्तों के लिये वे लगातार संभायें कर रहे हैं, मीडिया बहुत समय से उन्हे मोदी कैम्प में भेज रहा है। इस नये विकास से लगता है कि जितने लोग विरोध में होने की वजह से केजरीवाल को दिल्ली जीतते नहीं देखना चाहते उससे कुछ ही कम “आप” की ऊपरी लेयर में हैं जो मुख्यमंत्री बनने के बाद केजरीवाल की सामर्थ्य/राजनैतिक क़द बढ़ने के स्वप्न से घबराये हुए हैं!

Deepak Sharma : ये राजनीति है. दंगल नही. दंगल में आखिरी वक़्त पर चन्दगी राम के खिलाफ दारा सिंह को उतारकर कुश्ती जमाई जा सकती है. पर राजनीति में आखिरी वक़्त पर प्रत्याशी बदलना भारी पड़ सकता है. वैसे भी किरण बेदी प्रत्याशी है दारा सिंह नही. सवाल अब बस इतना है कि अगर किरण बेदी की कप्तानी में बीजेपी हार गयी तो क्या होगा ? इस हार का ठीकरा किस पर फूटेगा ? इस हार से हारेगा कौन ? 15 दिन की किरण बेदी को दोष दिया नही जा सकता. हर्षवर्धन पहले से ही हाशिये पर हैं. सतीश उपाध्याय का अध्याय ही समाप्त है. मुखी सुखी को जानता कौन है . तो क्या बारी अब वजीर की है? वजीर जिसने आखिरी वक़्त पर कजरी के खिलाफ किरण को उतारा. वजीर जिसने 48 घंटे में किरण को पार्टी में शामिल करवाया और 72 घंटो में मुख्यमंत्री की उमीद्वारी दे डाली. वजीर जिसने राजा से कजरी को कचरने की सुपारी ली है. मित्रों, अगर बीजेपी दिल्ली में हारी तो ये सच है कि केजरीवाल वजीर को मात देंगे और राजा को पहली बार शह. इस शह से बचने का अब एक ही रास्ता है. बाजी अब खुद राजा को लड़नी होगी. मोदीजी अब मिस बेदी का मुखौटा उतार दीजिये. आर पार खुद लड़िये केजरीवाल से. रोज़ रैली करिए गली गली. छोडिये ओबामा को. पहले इस टोपी से बचिए. आपने कभी टोपी नही पहनी .पर कहीं अब पहनने की नौबत न आ जाय. तो मोर्चा खुद संभालिये.क्यूंकि आपका वजीर फेल हो रहा है. इसलिए खुद ही कुछ करिए. जल्दी करिए . कहीं बनारस का स्कोर 1-1 न हो जाए.

वरिष्ठ पत्रकार त्रयी दयानंद पांडेय, शीतल पी. सिंह और दीपक शर्मा के फेसबुक वॉल से.



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