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सहारा मीडिया के न्यूज चैनल 'सहारा समय' में अंधेरगर्दी मची हुई है. चैनल हेड मनोज मनु समेत कई बड़े पदाधिकारियों के खिलाफ छेड़छाड़ की एफआईआर दर्ज करने के कोर्ट के आदेश को लेकर कई रिपोर्टरों पर गाज गिरा दी गई है. इन्हें पूरे मामले को न मैनेज कर पाने की सजा सुनाई गई है. इन पत्रकारों में आलोक द्विवेदी, आलोक मोहन नायक, मृगांक, बिजेंद्र सिंह, कोमल, खालिद वसीम, ऋषिकेश आदि का नाम शामिल है.

ये पत्रकार प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय, दिल्ली सरकार से लेकर बिजनेस और एंटरटेनमेंट बीट आदि पर तैनात रहे हैं. लेकिन अब इन्हें पीसीआर में काम करना पड़ रहा है. इनसे पहले इस्तीफा मांगा गया. इस्तीफा नहीं देने पर इन सभी लोगों को प्रताड़ित करते हुए पीसीआर में डाल दिया गया. इस मामले की जानकारी कंपनी में सर्वेसर्वा बनाकर लाये गए कौस्तुब रे को भी पत्रकारों ने दी और विस्तार से अपनी समस्या बताई. लेकिन कोई भी सहारा की राजनीति में पैठ बना चुके मनोज मनु के खिलाफ मोर्चा नहीं खोलना चाहता है.

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  • Guest - sanjay kumarr

    "ये तो साला होना ही था" फिल्म गंगाजल में ये डायलॉग काफी मशहूर हुुआ था...लेकिन यहां थोड़ी देर हो गई....जिस पा्पी के खिलाफ माननीय अदालत ने केस दर्ज करने का आदेश दिया है..उसे काफी पहले सलाखों के पीछे होना चाहिए था, और जिन रिपोर्टर्स को आज सजा मिली है, उन्हें काफी पहले संभल जाना चाहिए था, लेकिन, वो बेचारे करते तो भी , उनके पास कोई विकल्प भी नहीं रहा होगा, जैैसा कि, मैने पहले भी कहा है कि, गौतम सरकार इंसान बुरा नहीं है लेकिन, चापलूसी पसंद सरकार भी उस नीच के पाप में शामिल हो गया!, रही बात अवस्थी की तो, उसे न तो अपनी उम्र का ख्याल है, और न ही पद की गरिमा का, मनोज मनु ने उसे कुत्ते की तरह अपने इर्द गिर्द नाचने पर मजबूर कर रखा था, अरे सहारा के कर्ता-धर्ता लोग, अभी तो अदालत में गवाही बाकी है, अब देखते जाओ क्या-क्या होता है.

    Comment last edited on about 8 months ago by B4M Reporter

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