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राष्ट्रीय चैनल की तर्ज पर दम भरने वाला जीबीसी न्यूज़ हुआ फुस्स। नोएडा सेक्टर 6 स्थित जीबीसी न्यूज़ चैनल जनवरी 2017 में शोर शराबे के साथ मार्किट में आया था, लेकिन गलत टीम और अनुभवहीन लोगों के कारण चैनल चलने से पहले ही बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। बीते सोमवार को चैनल से एक साथ 40 से ज्यादा लोगों को निकाल दिया गया है। निकाले जाने वाले लोगों में वही लोग शामिल है जो मज़बूरी और लुभावने वादे के लालच में अपनी अपनी नौकरी छोड़ कर आये थे।

चैनल में कार्यरत एक कर्मचारी ने बताया कि शुरुआती दौर चैनल अच्छे मुकाम पर था लेकिन चैनल की कोर टीम ने गंदी राजनीति के कारण चैनल से मुँह फेर लिया है। उसके बाद दिन पर दिन चैनल में आपसी झगड़ों के कारण माहौल बद से बदतर होता गया। निकाले गए लोग इस राजनीति और फैसले से बहुत नाराज हैं लेकिन मालिकान के डर से सब चुप औऱ सहमे हुए हैं।

जीबीसी न्यूज में कार्यरत एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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  • Guest - vivek

    छुटभैया चैनलों से तौबा तौबा
    हाल के कुछ सालों में देखा गया है कि कई छोटे-मोटे चैनल चिड़िया के घोसले की तरह नोएडा में खड़े हो गए हैं यह चैनल अपनी किसी निजी मकसद से खड़े किए जाते हैं और उसको पाने के बाद या नाकाम होने की सूरत में यह बंद हो जाते हैं इसी कड़ी में नोएडा के सेक्टर 63 में एक तथाकथित न्यूज़ चैनल प्रतिनिधि के नाम से शुरु हुआ कहने को तो यह न्यूज़ चैनल के नाम से चला पर इसमें न्यूज़ चैनल जैसी एक भी खासियत नहीं थी शुरू में इसने अपने यहां इंप्लॉइज को ठीक-ठाक पैसा देने के बाद लंच तक करने की व्यवस्था की और दो महीने बाद ही इस चैनल के दावों की पोल खुल गई इस चैनल के मालिक जोकि चैनल को 3 महीने में नंबर वन बनाने की बात करते थे पर करीब 1 साल होने के बाद भी यह चैनल किसी टीआरपी चार्ट तक में नहीं आ पाया और आज यह स्थिति है चैनल को छोड़े हुए 10 महीने के बाद भी अपने पूर्व कर्मचारियों को उनकी तनख्वाह नहीं दे पाया इसके साथ ही चार पांच महीनों से यहां घुट रहे कर्मचारियों को भी सैलरी नहीं दी गई है ऊपर से चैनल के प्रबंधक कर्मचारियों को चैनल के पेज को जबरदस्ती अपनी फेसबुक पेज पर शेयर करने के लिए कहते हैं और ऐसा ना करने के परिणाम में 5 दिन की सैलरी काटने की धमकी भी देते हैं ऐसी स्थिति में वहां काम कर रहे कर्मचारियों की मनोस्थिति को समझ सकते हैं यह चैनल शुरू तो हो जाते हैं पर बिना किसी प्लानिंग के ना ही किसी फंड के यह चैनल बंद होने की कगार पर आ जाते हैं इससे ना सिर्फ पत्रकारों को नुकसान होता है बल्कि अपने करियर की शुरुआत में ही ऐसे चैनल में काम करने आए बच्चों का भी मनोबल गिरता है यहां ना सिर्फ कर्मचारियों का मानसिक शोषण होता है बल्कि उनके भूखे मरने तक की नौबत आ जाती है भड़ास मीडिया के माध्यम से मैं आप सभी से अपील करुंगा कि ऐसे चैनलों का सभी पर्दाफाश करें ताकि बाकी सहयोगियो का भविष्य बचाया जा सके धन्यवाद

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