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न्यूज नेशन की चिंदी चोरी... एक तरफ तो पत्रकार दुनिया में हो रहे अन्याय की आवाज उठाते हैं वहीं दूसरी ओर खुद पर हो रहे अन्याय को चुपचाप सह लेते हैं। इसके उदाहरण तो कई हैं मगर आज यह बात मीडिया के एक बहुत बड़े संस्थान से जुड़ी है। बात हो रही है न्यूज़ नेशन न्यूज़ चैनल की। प्रबंधन के 2 चैनल (न्यूज नेशन, न्यूजस्टेट) हैं। न्यूज नेशन टॉप 5 का चैनल है और न्यूज स्टेट यूपी-उत्तराखंड में काफी समय से पहले पायदान पर काबिज है। साथ ही तीसरे चैनल (न्यूजस्टेट MP-CG) की तैयारियां भी जोरों पर हैं। इससे साफ है कि संस्थान के पास पैसों की कमी नहीं है।

मगर फिर भी न्यूज नेशन लगातार 3 महीने से अपने कर्मचारियों का अप्रेजल करने से कतरा रहा है। मई के आखिर में अप्रेजल फॉर्म भरवाने को बाद 3 बार तनख्वाह आई लेकिन बस तनख्वाह अकेले ही आई, संग में अप्रेजल नहीं लाई। संस्थान में कुछ कर्मचारी अब भी आस लगाए बैठे हैं कि शायद अगले महीने अच्छे दिन आ जाएं। कुछ का अप्रेजल से भरोसा उठ चुका है।

कुछ मानते हैं कि मुख्य लोग जिन्हें मालिकान लोग अप्रेजल देना चाहते थे और जो उनके खास थे, उन्हें दे चुके हैं। कुछ का यह भी कहना है कि संस्थान से लोग छोड़ रहे हैं इसलिए भी अप्रेजल नहीं किया जा रहा है। वजह चाहे जो हो, इन सबके बीच पिसने वाला वही पत्रकार है जो जुर्म और अन्याय की आवाज बनता है, जो दूसरों के लिए कैमरा उठा जान पर खेल कर रिपोर्टिंग करता है, वही पत्रकार असहाय होकर सब कुछ चुपचाप झेलता है और किसी से कुछ बिना कहे काम करता रहता है।

संस्थान से पूछना चाहूंगा कि जब चैनल की पैसे देने की ताकत नहीं थी तो उसने अप्रेजल फॉर्म ही क्यों दिए। अगर संस्थान के पास पैसों की कमी है तो तीसरा चैनल लाने के बजाय कर्मचारियों को उनका पैसा ही दे देते। अगर अप्रेजल ना करना हो तो इस बात को साफ सरल और सीधे शब्दों में कर्मचारियों को मेल या किसी दूसरे तरीके से बता दिया जाय ताकि कोई भी इसकी उम्मीद मन में ना पाले।

न्यूज नेशन के एक कर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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  • Guest - अनिल

    अपने कर्मचारियों की क्या इन्होंने तो रात दिन काम करने वाले स्ट्रिंगरो को भी नही बख्श रखा उन्हें पैसे देते नही अब तो खबरे भी बंद कर दी लेनी

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