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ईनाडु की जवाबी नोटिस का एक हिस्सा

एक अदना से पत्रकार से इस्तीफा लेने हेतु ईनाडु डिजिटल के अधिकारी तरह तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। मई से चल रहे विवाद का अभी तक अंत नहीं लाये। मैनेजमेंट के तीनों अधिकारी (प्रसनजीत रोय-जीएम, अजीज अहमद खान-डीआई, मुरलीधर बंदारू-एचआर) अपनी गलती छिपाने एवं बात उपर तक न पहुंचे, इसलिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।

सामंतवादी विचारधारा वाले जीएम के इशारों पर नाचने वाले डीआई-एचआर के कारण ही सारा विवाद खड़ा होता हैं। वहां काम करने गए लोगों को गुलाम समझते हैं! किसी की मिन्नत को अपने फैसले से मजबूरी में पलट देते हैं! बातों से मुकर जाने की उनकी आदत पर मैं आज भी आफरिन हूं। अब इतने भी मासूम न बनें। जैसा कि आपको कुछ पता ही न हो। अपनी माजूर निगाहों से मैंने न जाने क्या-क्या नहीं देखा!

१० मई / १७ को मुझसे (ज़हीर) जबरदस्ती आईकार्ड ले लिया गया और ११ से ओफिस आने को मना कर दिया गया। अब कह दिया गया कि बिना बताए मैं गायब हूं। वाह रे 'गिरगिटों'! जबरदस्ती रिजाइन मांगने लगे। ये सब दोगलापन बंद कीजिए सर! क्या आप नहीं जानते मेरे साथ आप लोगों ने कैसा दुर्व्यवहार किया। अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली वाली आपकी ओफिस में बिना आईकार्ड परिंदा भी पर मार सकता है क्या? और तो और, बिना आईकार्ड के ओफिस लेने आ रही बस ड्राइवर भी झिड़क देता है!

पीड़ित कंटेंट एडिटर
ज़हीर भट्टी

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