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प्रेस क्लब आफ इंडिया के सेक्रेट्री जनरल रह चुके नदीम अहमद काजमी को भी एनडीटीवी प्रबंधन ने नहीं बख्शा. भारी संख्या में छंटनी की लिस्ट में नदीम का भी नाम है. सूत्रों का कहना है कि एनडीटीवी इंडिया यानि एनडीटीवी ग्रुप के हिंदी न्यूज चैनल की सभी डेस्कों से मिलाकर सिर्फ एक शख्स को नौकरी से निकाले जाने का फरमान सुनाया गया है और वो हैं नदीम अहमद काजमी.

नदीम अहमद काज़मी

नदीम एनडीटीवी से लंबे समय से जुड़े हुए हैं और एनडीटीवी के मुश्किल वक्त में लगातार खुलकर विरोधियों से सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक मोर्चा लेते रहे हैं. नदीम और एनडीटीवी को एक दूसरे का पर्याय माना जाता रहा है. एनडीटीवी में कार्यरत बाकी लोगों के मुकाबले नदीम की तनख्वाह भी बेहद कम है. बावजूद इसके नदीम को निशाना बनाया गया. मीडिया में नदीम के विरोधियों तक को यह अंदाजा नहीं था कि एनडीटीवी अपने ही खासमखास, निष्ठावान और जुझारू कर्मी नदीम पर गाज गिरा देगा. बताया जाता है कि इस पूरे घटनाक्रम से नदीम अहमद काजमी सकते में हैं.

सूत्रों का कहना है कि नदीम ने कार्यमुक्त किए जाने के एनडीटीवी प्रबंधन के फरमान पर दस्तखत करने से मना कर दिया है. चर्चा है कि अगर एनडीटीवी प्रबंधन अपना इरादा नहीं बदलता है तो नदीम खुद को हटाए जाने के प्रकरण को कोर्ट में ले जा सकते हैं.  सूत्र कहते हैं कि एनडीटीवी प्रबंधन नदीम को हटाए जाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकता है. कई वरिष्ठ लोग एनडीटीवी प्रबंधन को समझाने में जुटे हैं कि नदीम का एनडीटीवी में बने रहना एनडीटीवी के लिए कितना जरूरी है. भड़ास के एडिटर यशवंत ने नदीम को एनडीटीवी से हटाए जाने के प्रबंधन के फैसले पर अफसोस जताया और कहा कि अगर प्रबंधन नदीम समेत सैकड़ों मीडियाकर्मियों की छंटनी के अपने फैसले को नहीं बदलता है तो एनडीटीवी के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू किए जाएगा.

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