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Dinesh Shukla : घोर आपत्तिजनक... एक न्यूज़ चैनल के एडिटर इन चीफ ने अपने मातहत मीडियाकर्मी पर हाथ उठाया.. सूत्रों ने बताया कि उस कर्मचारी का सिर्फ इतना सा कसूर था कि उसने पिछले चार माह से नहीं मिले वेतन के बारे में बात की थी... यह किस तरह की पत्रकारिता हो रही है... यह असहनीय है... मेरी उस कर्मचारी के साथ संवेदनाएं हैं... अगर मीडियाकर्मी सामने आकर मदद की बात करता है तो हम उसके साथ हैं... घोर असहनीय, आपत्तिजनक और निंदनीय ...

भोपाल के पत्रकार दिनेश शुक्ल की एफबी वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए ढेर सारे कमेंट्स में से कुछ प्रमुख यूं हैं...

Suhrid Tiwari कहिये तो उसके ऑफिस चलकर कूट दें उस मालिक को... अब गांधीगिरी का जमाना नही रहा भैया... जैसे को तैसा जवाब ही देना पड़ेगा तभी समझेगा सामने वाला

Dinesh Shukla फिर हममें और व्यक्ति में फर्क क्या रहा भाई ....

Ramakant Upadhyay यह बहुत ही गलत किया उन्हें माफी मांगनी चाहिए इतनी बड़ी पद पर बैठे हुए इस प्रकार की हरकतें करते हैं तो यह उन को शोभा नहीं देती है

Vaibhav Sharma जिस जर्नलिस्ट को थप्पड़ नसीब हुआ है.. अब उसको आगे आना चाहिए... नही तो कल किसी और के साथ ये हो सकता है।

Tajnoor Khan बुरे लोगों के अच्छे दिन चल रहे है भाई समय सदा एक सा नही होता हम ने अच्छे अच्छो को आसमान से नीचे गिरते देखा है एक शायर कहते है ऐसे लोग जो ऊँची जगह पर जाकर मालिक समझ बैठते है ऐसे लोगो के लिए की ये सब किराए दार है मकान मालिक थोडी है तो मेरे भाई बुरे लोगों के बुरे दिन आने का इंतेज़ार करें जय हिंद

Naveen Nayak जहां तक हमें जानकारी लगी है, यह मामला रीजनल चैनल न्यूज़ वर्ल्ड का है.... आगे आप सब खुद समझदार हैं...

Rizwan Ahmad Siddiqui वेतन मांगना हर कर्मचारी का वाजिब हक़ है और मै इस मामले में उसके साथ हूँ ... लेकिन यह मिडिया संस्थान और उसके एडिटर इन चीफ़ का मामला है तो ज़ाहिर हैं वो भी एक पत्रकार है इन परिस्थितियों में उससे भी समस्त घटनाक्रम के सम्बन्ध में संवाद होना चाहिये ऐसा मेरा सुझाव है ... ऐसा करने से वास्तविकता सामने आयेगी ...

Nitin Dubey Journalist उसको भी तुरंत रसीद कर देना था. वैसे पूरा घटनाक्रम क्या है ये जानना भी जरूरी है..कभी कभी कुछ इतने तेजी में होते हैं कि उन्हे भी ध्यान नहीं रहता है कि हम किससे बात कर रहे हैं..मेरे हिसाब से अब थप्पडबाज चीफ बचे नहीं हैं सब मिल बांटकर खा रहे हैं..अगर कसूर केवल वेतन मांगना था तो बहुत निंदनीय है.

Ankit Sahu सर, इस बात से स्पष्ठ है कि, ऐसे लोग पत्रकार हो ही नहीं सकते, और ऐसा करके उन्होंने अपनी मूर्खता और नीचता का परिचय दिया है। ये यह भूल जाते हैं कि बिना कर्मचारी के कोई बॉस नहीं बन जाता।

Manoj Singh Rajput इसलिए तो कहता हूं कि सरकार की दलाली करने वालों के यहां नौकरी करोगे तो यही हाल होगा। अब उस बेचारे पत्रकार की क्या गलती जिसने अपना वेतन मांग लिया। यह दलाल तो यह चाहते हैं कि मुफ्त में बेगारी कराई जाए। लगता है भाजपा सरकार के राज में कहीं अंग्रेजों के राज की झलक तो नहीं आ गई। हम भी मीडियाकर्मी के साथ हैं जहां मदद लगे बता देना। कहीं का भी चीफ होगा घर में जाकर ठुकाई करने की भी हिम्मत रखते हैं।

Deepak Mishra अति निंदनीय... सम्पादक महोदय की भी आवश्यक ठुकाई बनती है...

पूरे मामले को विस्तार से समझने के लिए इस शीर्षक पर क्लिक करें :

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