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Shambhunath Shukla : मेनस्ट्रीम मीडिया, चाहे वह ‘जी’ टीवी हो, ‘आजतक’ हो या ‘एनडीटीवी’ अथवा हिंदुस्तान टाइम्स या टाइम्स ऑफ़ इंडिया सब कारपोरेट हाउस के चाकर है। आटो एक्सपो को ऐसी कवरेज दे रहे हैं मानों आज की सबसे बड़ी ख़बर किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के कारों की बिक्री ही है। यहाँ तक की वे वर्नाक्यूलर अख़बार भी, जिनका पाठक प्याज़ और टमाटर के भाव दो रुपये उछल जाने पर कल्लाने लगता है, अपना पहला और दसवाँ पेज आटो एक्सपो को समर्पित किए हैं। उनमें प्रकाशित और प्रसारित ख़बरें पढ़-देख कर दूर-दूर से लोग भागे चले आ रहे हैं।

बसों, टैक्सियों और अपनी छोटी-छोटी कारों से। ऐसे जैसे ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित एक्सपो मार्ट में मोदी जी और योगी जी फ़्री में कारें बँटवा रहे हों। सैकड़ों रुपये की टिकट ख़रीदता है और हज़ारों रुपये के समोसे, पकौड़ी, बर्गर खाकर हाथ मलता घर चला आता है। जिनके पास ढंग की एक जोड़ी चप्पल नहीं है वे बीएमडब्लू, मर्सडीज़ और लैंड क्रूजर गाड़ी के सामने खड़ी मेम को देखकर ही लहालोट हो जाते हैं।

दुख है कि किसी भी मीडिया हाउस के क़ाबिल पत्रकार ने यह नहीं बताया कि यहाँ किस तरह विज़िटर्स को क़दम-क़दम पर लूटा जाता है। कोई तो पत्रकार यह सवाल करने की हिम्मत करता कि जिस देश में अस्सी प्रतिशत लोगों के पास छत नहीं है वे कार कहाँ खड़ी करेंगे। और जिनकी एक करोड़ की गाड़ी ख़रीदने की औक़ात होती है, वे बेवक़ूफ़ों की तरह गोरी मेम को देखने नहीं आते। एक वह ज़माना था जब हम अख़बार में ऐसे सवाल भी उठाया करते थे कि क्या औचित्य है, ऐसे जमावड़े का! अब तो बस हम भी बस फ़ेसबुक पर ही सच लिख सकते हैं कि भैया! यह मेला नहीं आटो प्रमोशन है, जहाँ समोसा तक सौ रुपये का है। और उसके अँदर भरे आलू गंधाते हैं। सो तुम चूतिया न बनो!

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला की एफबी वॉल से.

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