टीवी9 के नए आने वाले हिंदी चैनल से जुड़ने के लिए इस मेल आईडी पर भेजें बायोडाटा

अगर आप टीवी या डिजीटल मीडिया में कुछ अलग करना चाहते हैं, अगर आपके पास कोई ऐसा आइडिया है जो आपके हिसाब से अलग है तो आपके लिएनया चैनल और नया डिजीटल प्लेटफॉर्म आपका इंतजार कर रहा है. TV9 समूह के नेशनल हिन्दी चैनल के लिए ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं के साथ-साथ अनुभवी लोगों की तलाश हो रही है जो कुछ अलग करना चाहते हैं.

बहुत से नए पुराने पत्रकार कहते हैं कि नया कुछ नहीं हो रहा है, जो हो रहा है वो बेकार है या भेड़ियाधसान की तरह है, लेकिन जब बात आइडिया की आती है तो कई बार ऐसे लोग भी बेहतर विकल्प नहीं सुझा पाते हैं. खारिज करना एक बात है, आइडिया के साथ बेहतर कंटेंट का मुहैया कराना और बात.

जानकारी के मुताबिक टीवी9 के टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए ऐसे ही लोगों को तवज्जो दिया जा रहा है जो नई सोच के साथ आना चाहते हैं. नए चैनल औऱ नए डिजिटल वेंचर के लिए आप भी आवेदन दे सकते हैं. इसके लिए मेल आईडी hrhindi@tv9.com है. जो लोग अपने आइडिया के साथ अपना बायोडेटा भेजेंगे, उन्हें ज्यादा तवज्जो दी जाएगी. एंकर, प्रोडयूसर, रिपोर्टर , कैमरामैन, वीडियो एडिटर, ग्राफिक्स डिजायनर से लेकर जिला संवाददाता और जूनियर लेवल तक के लोग आवेदन कर सकते हैं.

नोएडा के फिल्म सिटी से शुरू होने वाले इस चैनल के लिए वरिष्ठ पदों पर कईअहम नियुक्तियां हो चुकी हैं और लगातार भर्तियों का दौर जारी है. फिल्म सिटी स्थित टी सीरीज के प्लॉट नंबर एक वाले कैंपस में TV9 का भव्य न्यूज रुम और स्टूडियो बन रहा है. कहा जा रहा है कि किसी भी चैनल के न्यूज रुम में इतना बड़ाऔर हाईटेक स्टूडियो पहली बार बन रहा है.

फिलहाल TV9 की कोर टीम किसी और दफ्तर में बैठ रही है, जहां इंटरव्यू का दौर चल रहा है. TV9 से नईप्रतिभाओं को जोड़ने के लिए प्रतिष्ठित मीडिया कॉलेजों के कैंपस में छात्रों से इस ग्रुप की कोर टीम के लोग मिल रहे हैं. आईआईएमसी और जामिया समेत कईशिक्षण संस्थानों के कुछ छात्रों का कैंपस सेलेक्शन की भी तैयारी चल रही है.

आपको बता दें कि TV9 समूह के चार रीजनल चैनल पहले से नंबर वन और नंबर टूके पोजीशन पर कायम हैं. मराठी, तेगलू, गुजराती और कन्नड़ चैनलों के बाद अब सीईओ और प्रोमोटर रवि प्रकाश के नेतृत्व वाला TV9 समूह बड़ी तैयारी के साथ हिन्दी चैनलों की प्रतिस्पर्धा में कूदने जा रहा है.

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Comments on “टीवी9 के नए आने वाले हिंदी चैनल से जुड़ने के लिए इस मेल आईडी पर भेजें बायोडाटा

  • शिवेंद्र सिंह says:

    देश में अनुशासन (discipline) सिर्फ फौज तक सीमित रह गया है। कोई भी अनुशासन में नहीं है न जनता, न नेता, न कर्मचारी। गजब की जाहिलियत समाज में फैली हुई है। अनुशासन ही व्यक्ति को देशभक्त, जिम्मेदार, ईमानदार बना सकता है। आन्दोलन के नाम पर निजी और सार्वजनिक सम्पत्तिओं नुकसान पहुंचा कर जरा सा भी एहसास नहीं करते कि यह उनकी सुविधा के लिए था।
    अनुशासन के लिए जागरुकता पर एक कार्यक्रम होना चाहिए।

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    • अनुशासन ऊपर से चलकर नीचे की तरफ आता है और जहां से अनुशासन सही सलामत अपने अंतिम छोर तक पहुंचना चाहिए उस ऊंचाई पर अनुशासन रक्षक के भेष में कुछ लट्ठधारी अनुशासन के हाथ पैर तोड़ने के लिए बैठे हों तो अनुशासन औंधे मुंह खाई में ही गिरेगा जो आज देश देख और भुगत रहा है..

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  • Durgesh Kumar says:

    एक दौर था जब पत्रकारिता और प्रेस स्वतंत्र रूप से निष्पक्षता के साथ जनता के मध्य अपनी बात सही मायने में रखते थे और सत्य की क्रांति का हिस्सा हुआ करते थे । एक अच्छी पत्रकारिता ने समाज के विभिन्न पहलुयों में बदलाब किया है व सामाजिक मूल्यों का ह्रास होने से बचाया है । समाज में नई चेतना का विकास किया है । धीरे – धीरे लोगो में मीडिया और प्रेस के प्रति लोगों में आशा की किरण जागी लोगो ने महसूस किया ये समाज के शोषितों की नयी ताकत है ।
    आज भी अगर किसी पीड़ित व्यक्ति को जब न्याय नहीं मिलता तो मीडिया उसके सामने न्याय का दूत बन उसके काम आती है और उसे शोषण से मुक्ति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ।
    वर्तमान में मीडिया के दो स्वरुप देखने को मिल रहे है एक सरकार की नीतियों के खिलाफ उसका प्रोपेगेंडा और दूसरा सरकार की नीतियों का महिमा मंडन करना मानो की ये ही सरकार है बस अब तो । ये तरीका समाज के मूल्यों में भी देखा जा रहा है । कुल मिलाके मीडिया दो धड़ो में बट गयी है । मीडिया ने अपने दर्शक भी तय कर लिए है । जिस तरह बाजार में किसी एक उत्पाद के दो प्रतियोगी होते है तो आपस में थोड़ा बहुत परिवर्तन कर अपने उत्पाद को एक दूसरे से बेहतर बना के और ये कह के कि हम ही श्रेष्ठ है , दूसरा हम जैसा कोई नहीं है ।
    ऐसी स्थिति में समाज और सच कही न कही गुमराह होता जा रहा है । वास्तविक सच को सभी मीडिया बताने में असफल दिखाई दे रही है । आप जो परोसना चाहते है समाज उसे या तो उसे स्वीकारता नहीं है या उस पर वेबजह थोप दी जा रही है ।
    अगर आप पत्रकारिता के सही महत्व और निष्पक्ष विश्लेषण को समाज के सामने रखे तो समाज और सूचना क्रांति में नया बदलाव हो जायेगा और अन्य लोग भी आपको फॉलो करने लगेंगे । आप वो बताये जो जनता नहीं जानती है ।
    ।। सत्यमेव जयते ।।
    आपका शुभेच्क्षु

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  • साहिल खान says:

    पत्रकारिता के इस दौर में स्याही में कलम तोड़ अब तेल में कलम को डुबाकर आम जनता के सामने बड़े ही सलीके से खबरें परोसी जा रहे हैं, और कौन किस कदर अपनी कलम को कितनी गहराई में तेल में डुबोकर खबर को लिखने में माहिर है जिससे सत्ता में बैठे लोग और नौकरशाह उसकी खबर की दिल खोलकर सराहना कर सकें, लेकिन देश में बिगड़ते हालात महंगाई भ्रष्टाचार और भुखमरी की दास्तान तो अब जैसे खबरों की दुनिया से ग़ायब ही नजर आते हैं। ऐसे में अब जरूरत है ऐसे कलमकारों की जो सत्ताधीशों और नौकरशाहों की जद से बाहर आकर , सिर्फ जनता की आवाज़ बनकर सिर्फ और सिर्फ देश हित मे आवाज़ उठाते

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  • Charu Gupta says:

    एक बात बताएं क्या एंटरटेनमेंट न्यूज के लिए कोई पद है.

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  • अम्बुज यादव says:

    कभी राजनीति कर रहे नेताओ नई नीति पर सवाल उठना और जनता की आवाज बनी मीडिया का दौर अब सिर्फ सरकार के कामो पर पर्दा डाल अपनी पेट भरने काम कर रही है। आज के इस दौर में समाज के लिए ऐसे पत्रकारों और संस्थाओं की जरूरत है जो देश के सभी तबको के लिए सरकार से सवाल पूछ सके।जिससे सरकार होश में आये और जनता के हेल्प की नीति से राजनीति का नया आयाम हिंदुस्तान में स्थापित करे।आशा है आप के यह इसी तरीके के कलम के जादूगरों को मौका दिया जाएगा।

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