माई लॉर्ड ने वरिष्ठ पत्रकार को अवमानना में तिहाड़ भेजा पर मीडिया मालिकों के लिए शुभ मुहुर्त का इंतजार!

सुप्रीम कोर्ट को ‘औकात’ दिखा रहे मीडिया मालिकों के मामले में सुस्ती क्यों है माई लॉर्ड!

कुछ लोग सवाल कर रहे हैं कि पत्रकार को तो सुप्रीम कोर्ट ने एक छोटे से मामले में जेल भेज दिया, लेकिन मीडिया मालिक तो सुप्रीम कोर्ट को कई साल से ‘औकात’ बताते-दिखाते-चिढ़ाते आ रहे हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट लगातार न सिर्फ चुप है बल्कि उन्हें तरह तरह से समय मुहैया कराकर हक की लड़ाई लड़ रहे पत्रकारों को उत्पीड़ित करने की खुली छूट भी दे रखी है, ऐसा क्यों है?

बात सहारा के होटल खरीद वाले मामले की करें तो जिस पत्रकार को अवमानना का दोषी मानते हुए जेल भेजा गया है उसकी उम्र 64 साल है और वह 34 साल तक संयुक्त राष्ट्र में बतौर संवाददाता काम कर चुका है. न्यूयॉर्क स्थित एमजी कैपिटल होल्डिंग्स के पावर ऑफ अटॉर्नी रखने वाले स्वामी ने सहारा के न्यूयॉर्क में होटल प्लाजा खरीदने की रुचि दिखाई थी. यह पत्रकार सहारा के होटल खरीद मामले में दायर अपने हलफनामा में कही गई बातों पर कायम नहीं रहा. इसी के चलते उसे न्यायालय की नाराजगी झेलनी पड़ी.

सहारा-सेबी विवाद की सुप्रीम कोर्ट में हुई ताजी सुनवाई में प्रकाश स्वामी सिर से ऊपर हाथ जोड़कर कोर्ट में पहुंचे और जेब से तिरूपति बालाजी की तस्वीर निकाल कर बचने की दुआ करने लगे. इस दौरान वे लगातार बुदबुदाते रहे- भगवान, गलती हो गई, बचा लो. तभी कोर्ट ने स्वामी के बारे में पूछा तो उसने तुरंत सिर के ऊपर हाथ जोड़ लिया और खड़ा हो गया. स्वामी ने अपनी दलील में कहा कि उन्होंने अंजाम जाने बिना यारी-दोस्ती में हलफनामा दायर कर दिया था….

…जारी…

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बड़ा आदमी बनने के लिए गलत रास्ता चुनने पर जेल भेज दिया लेकिन बड़ा आदमी जो बन चुका है वह लगातार गलत रास्ते पर चल रहा है तो उसका बाल तक बांका नहीं हो पा रहा माई लॉर्ड!

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