माई लॉर्ड ने वरिष्ठ पत्रकार को अवमानना में तिहाड़ भेजा पर मीडिया मालिकों के लिए शुभ मुहुर्त का इंतजार!

बड़ा आदमी बनने के लिए गलत रास्ता चुनने पर जेल भेज दिया लेकिन बड़ा आदमी जो बन चुका है वह लगातार गलत रास्ते पर चल रहा है तो उसका बाल तक बांका नहीं हो पा रहा माई लॉर्ड!

पत्रकार प्रकाश स्वामी ने पहले तो गल्ती मानी, रोया, गिड़गिड़ाया और फिर अपनी दलील में कहा कि उन्होंने अंजाम जाने बिना यारी-दोस्ती में हलफनामा दायर कर दिया था. इस पर जस्टिस दीपक मिश्रा बोले- बड़ा आदमी बनने के लिए गलत रास्ता चुना तो नतीजा भी भुगतो. पीठ में शामिल अन्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायाधीश ए.के. सीकरी थे. मतलब ये कि जज साहब लोग बड़ा आदमी बनने के लिए गलत रास्ता चुनने पर जेल भेज देते हैं लेकिन जो बड़ा आदमी बन चुका है, वह लगातार गलत रास्ते पर चलता रहे तो उसका बाल तक बांका नहीं होता… संदर्भ मजीठिया वेज बोर्ड है और बड़ा आदमी देश के बड़े बड़े अखबारों के मीडिया मालिकों को कहा जा रहा है जो एक साथ चारो खंभे को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं और कर भी रहे हैं क्योंकि वे तथाकथित चौथा खंभ खुद हैं इसलिए खुदा से कम नहीं हैं, सो उनका अपराध क्या अपराध नहीं कहा जाएगा?

उल्लेखनीय है कि न्यायाधीश रंजन गोगोई ही मजीठिया वेज बोर्ड के मामले को भी देख रहे हैं जिसमें देश भर के दर्जनों मीडिया मालिकों ने सुप्रीम कोर्ट की अवमानना कर रखी है और याचिका लगाने वाले पत्रकारों को उत्पीड़ित कर रहे हैं पर इन मीडिया मालिकों पर सुप्रीम कोर्ट की फिलहाल कृपा दृष्टि बनी हुई है. अवमानना याचिका लगाने वाले सैकड़ों पत्रकार या तो भुखमरी के शिकार हैं या दूर तबादला करके प्रताड़ित किए जा रहे हैं या फिर जबरन नौकरी से निकाले जा रहे हैं. इनकी आह पुकार शायद सुप्रीम कोर्ट के जजों तक नहीं पहुंच रही या फिर मीडिया मालिकों की तगड़ी औकात का असर है जो अवमानना प्रकरण लगातार चींटी की तरह रेंगते हुए चल रहा है और न्याय में देरी करके अन्यायियों को समर्थन दिया जा रहा है.

…जारी…

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वो रोता गिड़गिड़ाता रहा और जस्टिस लोग लगातार सख्त बनकर उपदेश देते रहे…

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