मृत्यु-दुख चिंतन : मन की लॉजिक का टूटना, तन का ऊर्जा-संसाधन के लिए लड़ना!

पुत्र आयुष सिंह ने हाल ही में दो आर्टकिल मीडियम वेबसाइट पर लिखे हैं। आयुष फिलोसफी व साइकोलॉजी में पीजी हैं और टेक एंटरप्रिन्योर के रूप में सक्रिय हैं! लिखने पढ़ने में उनकी खूब रुचि है! उनके दोनों आर्टकिल पढ़ने के बाद मैं काफ़ी देर सोचता रहा। मृत्यु और दुख को लेकर इस नजरिये से मैं ख़ुद कभी नहीं सोच पाया था। मैंने चैट जीपीटी से हिंदी ब्रीफ बनाया ताकि आप सब लोग तक भी बात पहुँचे। पढ़िये, आप को शायद पसंद आए। -यशवंत (एडिटर, भड़ास4मीडिया)