बदले की भावना से उपेंद्र राय के पीछे हाथ धोकर पड़ी हैं केंद्रीय जांच एजेंसियां, दो वकील भागे

फाइल फोटो : वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय

कई केंद्रीय जांच एजेंसियां निहित स्वार्थ और बदले की भावना के तहत वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय के पीछे हाथ धोकर पड़ी हैं. सीबीआई से लेकर ईडी तक ने न सिर्फ उपेंद्र राय बल्कि इनके करीबियों को भी डरा-धमका रखा है. यही कारण है कि उपेंद्र राय का केस लड़ने वाले दो वकीलों ने चुपचाप इस केस से अलग हो जाना उचित समझा. इन वकीलों ने फोन तक बंद कर लिया है. ऐसे में उपेंद्र राय के करीबियों को नए वकील करने पड़ रहे हैं.

उपेंद्र राय के साथ आमतौर पर वकील के रूप में केशव मोहन रहा करते थे. केशव मोहन एक तरह से उपेंद्र राय के फेमिली वकील हुआ करते थे. लेकिन सीबीआई और ईडी की तगड़ी घेराबंदी के कारण केशव मोहन के भी हाथ पांव फूल गए और इन्होंने फोन आफ कर चुपचाप केस से अलग हो जाने में गनीमत समझा. ऐसे ही एक अन्य वकील ने भी बिना बताए खुद को केस से अलग कर लिया है. बताया तो यहां तक जा रहा है कि अगर कोई गैर-पारिवारिक सदस्य उपेंद्र राय से मिलने जेल या कोर्ट जाता है तो केंद्रीय जांच एजेंसियों के लोग गुपचुप ढंग से उसका पीछा करना शुरू कर देते हैं और बाद में पकड़ कर पूछताछ के लिए अपने आफिस में घंटों बिठाए रखते हैं.

इतने झंझावातों के बावजूद मानसिक रूप से टूटे नहीं हैं उपेंद्र राय

ऐसे मानसिक उत्पीड़न से डरकर उपेंद्र राय के कई करीबी लोगों ने उनसे जेल या कोर्ट में मिलना बंद कर दिया है. सूत्रों का कहना है कि प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी राजेश्वर सिंह और वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय के बीच कई बरस से चल रही लड़ाई का इन दिनों चरम रूप देखने को मिल रहा है जहां राजेश्वर सिंह ने अपनी सारी ताकत उपेंद्र राय को बर्बाद करने में लगा दी है. इसके लिए नौकरशाही, पुलिस और जांच एजेंसियों को खुली छूट दिला दी गई है.
सूत्रों का कहना है कि उपेंद्र राय इतने विपरीत हालात में भी टूटे नहीं हैं. उनका मनोबल पहले जैसा है. उपेंद्र राय से कोर्ट में मिलने गए कुछ लोगों ने बताया कि उपेंद्र राय को तेइस मई को कोर्ट में पेश किया गया था जहां से उन्हें छह जून तक के लिए दुबारा न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया. अट्ठाइस मई को उपेंद्र राय की जमानत के लिए सीबीआई कोर्ट में अर्जी लगी हुई है.

उपेंद्र राय ने अपने करियर में दर्जनों लोगों को प्रमोट किया होगा, जॉब दी होगी, उन्हें अपने परिवार सरीखा माना होगा लेकिन इस मुश्किल वक्त में उनके साथ बस एक दो लोग आधे-अधूरे मन से खड़े दिख रहे हैं, बाकी किसी का कोई अता-पता नहीं है. उपेंद्र राय के करीबियों का कहना है कि जेल से छूटने के बाद उपेंद्र राय भ्रष्टाचारी अफसरों के खिलाफ जंग तेज करेंगे और उन कुछ अफसरों को नंगा करेंगे जो खुद को खुदा मानकर इन दिनों दूसरों के जीने के अधिकार को नष्ट करने का व्यवहार कर रहे हैं.

सूत्रों का कहना है कि उपेंद्र राय को उस वक्त साजिशन फंसाकर पकड़ा गया जब वह खुद का न्यूज चैनल लगभग प्लान कर चुके थे. इसके लिए वह फिल्म सिटी में आफिस वगैरह ले चुके थे. बताया जा रहा है कि करीब सौ करोड़ रुपये का निवेश इस चैनल के लिए विभिन्न स्रोतों से इकट्ठा कर चुके थे या करने वाले. अगर ये न्यूज चैनल शुरू हुआ होता तो देश भर के हजारों मीडियाकर्मियों को जॉब मिला होता.

पर न्यूज चैनल खोलने के लिए अपने नाम पहचान के साथ अपने एकाउंट में इकट्ठा किए गए पैसे को ऐन मौके पर सीबीआई और ईडी ने पकड़ कर उपेंद्र राय को भ्रष्टाचारी घोषित करने का काम किया है जबकि इस देश में जितने भी निजी न्यूज चैनल शुरू हुए हैं, उनके मालिकों को पकड़ कर सही से छापा मारा जाए तो उनके पास हजारों करोड़ रुपये की घोषित-अघोषित संपत्ति मिल जाएगी. पर सेलेक्टिव तरीके से, निहित स्वार्थ वश और बदले की भावना के तहत केवल किसी एक उपेंद्र राय को इसलिए परेशान किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने झुकने की बजाय कुछ ताकतवर और भ्रष्ट अफसरों से पंगा लेने का साहस दिखाया.

भड़ास के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह का इस प्रकरण के बारे में कहना है कि बेलगाम नौकरशाही की तानाशाही और उत्पीड़न देखना हो तो उपेंद्र राय प्रकरण सबसे सटीक उदाहरण है. ये नौकरशाह खुद को खुदा से कम नहीं मानते. इसलिए वो अपने खिलाफ लिखने वाली हर कलम को या तो खरीदना चाहते हैं या फिर तोड़ देना पसंद करते हैं. उपेंद्र राय पर जो आरोप लगाए गए हैं, उसका फैसला कोर्ट में होना है. पर उन्हें यूं इस कदर परेशान किया जाना बताता है कि दाल में कुछ काला है.

जांच एजेंसियों का काम चार्जशीट दाखिल करना है, न कि किसी का घनघोर उत्पीड़न कर उसका जीना मुहाल करना, उसका मनोबल तोड़ देने का प्रयास करना. उपेंद्र राय और उनके करीबियों को जिस कदर जांच एजेंसियों ने परेशान किया हुआ है, वह बेहद शर्मनाक है, निंदनीय है और अलोकतांत्रिक है. कायदे-कानूनों को हाथ में लेकर जांच एजेंसियां जैसा व्यवहार कर रही हैं वह देश के बेहद बुरे दौर से गुजरने का संकेत है.

यशवंत ने सभी पत्रकारों और पढ़े-लिखे लोगों से अपील की कि उपेंद्र राय, उनके वकीलों, परिजनों और करीबियों के निहित स्वार्थवश किए जा रहे उत्पीड़न के खिलाफ खुलकर लिखें-बोलें, एक मंच पर आएं अन्यथा कल को किसी को भी भ्रष्टाचारी बताकर ऐसे ही अरेस्ट कर लिया जाएगा और बिना वजह लंबा-चौतरफा उत्पीड़न किया जाएगा. फिर तब आपके लिए भी कोई बोलने-लड़ने आगे न आएगा. हमें एक दूसरे से मतभेद रखना चाहिए पर मनभेद नहीं. ऐसी नाजुक स्थितियों में हम सब मीडियाकर्मियों की एकता सामने आनी चाहिए, जगजाहिर होनी चाहिए.

इस पूरे प्रकरण के बारे में जनसत्ता अखबार में वरिष्ठ पद पर कार्य कर चुके और सोशल मीडिया पर अपनी बेबाक लेखनी के लिए चर्चित वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह कुछ यूं कहते हैं-

गजब। कोई सरकारी अधिकारी इतना मजबूत नहीं हो सकता। और पत्रकार से कैसी निजी लड़ाई? मामला तो पेशेवर ही होगा पर वो कहते हैं ना कि, “आज हमारी तो कल तुम्हारी बारी है” और सरकारी अफसर की बारी तो सरकार बदलने पर ही नहीं, रिटायरमेंट के बाद भी आती है। इसलिए मुझे तो यह मामला दिलचस्प लग रहा है। काश! मुझे इसकी रिपोर्टिंग का मौका मिलता। खबर छपती, नहीं छपती – सच तो जान पाता। एक सरकारी अफसर पारिवारिक वकील को भी धमका ले- क्या बात है। एक अफसर के निरंकुश हो जाने की दिलचस्प कहानी का प्लॉट है यह प्रकरण।

Sanjaya Kumar Singh

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Comments on “बदले की भावना से उपेंद्र राय के पीछे हाथ धोकर पड़ी हैं केंद्रीय जांच एजेंसियां, दो वकील भागे

  • LN Shital says:

    उपेन्द्र राय जी से मेरे गहरे सम्बन्ध हैं, जिन्हें मैं बिल्कुल नहीं छिपाना चाहता। क्या आपकी इस पोस्ट को फेसबुक पर शेयर कर रहा हूं.

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  • Ashwini Sharma says:

    आप सही कह रहे है भाई… आपसे पूरी तरह सहमत हूं… ईश्वर की मर्जी के आगे किसी का वश नहीं सर…मेरे नसीब में भी जो लिखा है वो होकर रहेगा..लेकिन मेरा मानना है कि हमाम में कई नंगे हैं..लेकिन सिर्फ उपेंद्र राय ही क्यों..उपेंद्र राय जी को जमीन से आसमान तक पहुंचते देखा है..उम्र में मेरे वो समकक्ष हैं..दिल का रिश्ता है मेरा..बदले की नीयत से किसी भी कार्रवाई का विरोध होना चाहिए…

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    • दिलीप सोनी says:

      पर भाजपा सरकार तो फिलहाल यही करते नजर आ रही हैं कि अपनी राजनीतिक विरोधियों के पीछे अपने अपने सिपहकार एजेंसियों के लोगों को उसके पीछे लगा कर उसे अपने ताकत का अनुसरण करा दो।।

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  • Yashwant Singh says:

    देखिएगा, इस पोस्ट पर लाइक कमेंट करने वो लोग भी डर के मारे नहीं आएंगे जो उपेंद्र राय के कभी बहुत करीबी हुआ करते थे. अगर हम लोग किसी के बेवजह उत्पीड़न के खिलाफ आवाज न उठाएंगे तो कल हमारा बेवजह उत्पीड़न होगा तो कौन आवाज उठाएगा. मैं सबसे अपील करता हूं कि इस पोस्ट को लाइक-शेयर करें ताकि एक वरिष्ठ पत्रकार और उनके परिजनों के नाजायज उत्पीड़न की तरफ इस देश की सत्ताओं को ध्यान आकर्षित किया जा सके. कोर्ट का काम है न्याय करना. जांच एजेंसियां अपना काम अपने दायरे में रह कर करें. किसी का परिवार और करीबियों समेत उत्पीड़न, वकीलों को धमकाना डराना ताकि न्याय न मिल सके, मनोबल तोड़ने के लिए तरह तरह के उपक्रम करना, यह सब अनैतिक, गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक है. हम इसका विरोध करते हैं.

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  • Dev Kumar Pukhraj says:

    शासन में बैठे लोग अधिकारियों के बहकावे में अक्सर आ जाते हैं। यह प्रवृति उन सरकारों में ज्यादा होती है जहां का मुखिया अधिकारियों पर ज्यादा भरोसा करता है। अधिकारी अपने रुतबे और पावर का दुरुपयोग खूब करते हैं। उपेन्द्र राय का मामला ताजा है। बिहार में भी नीतीश के अधिकारी आए दिन ऐसी हरकतें करते रहते हैं। इस अनर्थ के खिलाफ गोलबंदी जरुरी है। यह समय की मांग है।

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    • किंतु एक बात यह भी सत्य है कि अधिकारी तो सरकारों के अधीनस्थ होकर काम करते है तो सरकारे उन अधिकारियों से ज्यादा जिममेदार होती है।

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  • Vishnu Prabhakar Vishnu says:

    मेरे यहाँ के हैं बहुतो की नौकरी दी बहुतों को आगे बढ़ाया है उपेंद्र राय ने।

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  • LN Shital says:

    उपेन्द्र राय जी प्रिन्ट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक बड़ा नाम है. उससे भी बड़ी बात यह कि शेर दिल इंसान हैं. मैं उनकी बहुत इज़्ज़त करता हूँ. आज वह संकट में हैं. वरिष्ठ पत्रकार Yashwant Singh की यह पोस्ट एक बड़े कुचक्र का खुलासा करती है, जिसे मैं यहाँ शेयर कर रहा हूँ.

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  • Rajiv Tiwari Baba says:

    संकट की इस घड़ी में मैं उपेंद्र भाई के साथ हूं

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  • Navneet Mishra says:

    साफ-साफ बदले की भावना से की गई कार्रवाई है। उपेंद्र राय को अपना बचाव करने का पूरा हक़ है, वकीलों को डराकर उन्हें बुनियादी न्यायिक सुविधा से वंचित किया जा रहा। जाँच-पड़ताल होने में बुराई नहीं है मगर वह एक उचित प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए न कि विद्वेषात्मक।

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  • रोहित यादव says:

    ये तो सरासर गुंडागर्दी है अफसरशाहो की, हम सब मीडिया वालों को इसपर खुलकर बोलना चाहिए और इस तानाशाही सरकार को करारा जबाव देना चाहिए। इस घड़ी में हम उपेन्द्र राय सर के साथ हैं।
    रोहित यादव
    शाहजहाँपुर खबर

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  • विजय पाल सिंह says:

    इस समय ये बहुत जरुरी हो गया है कि हमें एक मंच बनाकर उपेंद्र राय के खिलाफ चल रही साजिश के खिलाफ खड़ा होना चाहिए। कहने को देश में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया भी है लेकिन वो पत्रकारों के लिए कम दारू पीने का अड्डा ज्यादा हो गया है।

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  • Syed Abu Obaida says:

    वकील क्यों डरे हैं? ये बात समझ में नहीं आ रही… एडवोकेट मिलना तो हक है. ये हक तो कसाब से लेकर आतंकियों तक को मिला था. उपेंद्र राय तो तो शुद्ध भारतीय हैं और वरिष्ठ पत्रकार भी. सच तो सच होता है. बेगुनाह कभी नही फंसते. यही उम्मीद करता हूं कि श्री उपेन्द्र राय भी निर्दोष साबित हों.

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  • Anand Prakash says:

    ये तो बहुत ही विचित्र स्थिति खडी कर रही है केंद्र सरकार

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  • Sanjaya Kumar Singh says:

    गजब। कोई सरकारी अधिकारी इतना मजबूत नहीं हो सकता। और पत्रकार से कैसी निजी लड़ाई? मामला तो पेशेवर ही होगा पर वो कहते हैं ना कि, “आज हमारी तो कल तुम्हारी बारी है” और सरकारी अफसर की बारी तो सरकार बदलने पर ही नहीं, रिटायरमेंट के बाद भी आती है। इसलिए मुझे तो यह मामला दिलचस्प लग रहा है। काश! मुझे इसकी रिपोर्टिंग का मौका मिलता। खबर छपती, नहीं छपती – सच तो जान पाता। एक सरकारी अफसर पारिवारिक वकील को भी धमका ले- क्या बात है। एक अफसर के निरंकुश हो जाने की दिलचस्प कहानी का प्लॉट है यह पोस्ट।

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  • Syed Quasim says:

    यशवंत भाई की यही खूबी है मदद भी दिल खोलकर करते हैं

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  • Pankaj Rai says:

    यशवंत जी आपकी भावनाओं का कद्र करता हूं इतना बढ़िया लिखा है. झुक के सजदा करता हूं आपको. मैं किसान का बेटा हूं. मेरा गांव शेरपुर जिला गाजीपुर है. उपेंद्र राय हम बचपन से एक साथ पले-बढ़े हैं. अफसोस इस देश के भ्रष्ट सिस्टम की जो कठपुतली की तरह किसी के इशारे पर पूरा नाच रहा है. उसी बदले की भावना का शिकार हुआ है हमारा भाई. आप सारे लोगों का आशीर्वाद बना रहे इस दुख की घड़ी में. हमारा भाई और निखर कर हम सभी के बीच में नया आयाम लेकर आएगा. बाकी सत्यमेव जयते.

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  • Syed Raza Abbas Rizvi says:

    जो कुछ उपेन्द्र भाई के साथ हो रहा है गलत है

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  • इस हाई प्रोफाईल मामले की जानकारी क्या केन्द्र सरकार को नही है? ऐसे भ्रष्ट अधिकारियो की वजह से पहले भी कई मामलो मे सरकार की काफी किरकिरी हो चुकी है, परन्तु ऐसे भ्रष्ट अधिकारी ईडी और सीबीआई में किसके रहमो करम पर है, इनके खिलाफ कोई कार्यवाही अब तक क्यो नही हुई, घोर आश्चर्य?

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  • Madan kumar tiwary says:

    यह कुछ अजीब लगता है कि जांच एजेंसियों के भय से वकील को हटना पड़े, हमारा तो पेशा ही है अपने क्लाइंट के लिए लड़ना ,चाहे जांच एजेंसी के खिलाफ लड़ना हो या बाहुबलियों के खिलाफ। वैसे. I offer my service if Mr. Roy requires. I think you are well acquainted about my determination, for the sake of my profession, I can sacrifice everything and can go to any extend , . like the third law of Newton, I emerge more determined under pressure. Instead of fear, I enjoy retribution..

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  • शुभम कश्यप says:

    ये सरकारी मशीनरी का कैसा खेल है।इसमें सारे पत्रकार यूनियन को आगे आना चाहिए जल्द से जल्द ये केवल फसबूक पर लाइक और कमेंट से कुछ नही होने वाला।अन्यथा हम सभी एक न एक दिन इस तरह के उलझन में उलझ सकते है। इसमें सारे पत्रकार यूनियन को आगे आना चाहिए। यशवंत भईया आप आगे आईये…जल्द ही कुछ बेहतर परिणाम आएंगे।

    शुभम कस्यप मीडिया /पी.आर.ओ.

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  • वेद प्रकाश मिश्रा says:

    यशवंत सर मैं syed abu साहेब से बिल्कुल सहमत हूँ की वकील क्यूँ भाग रहे है रही बात उपेंद्र जी की तो वो एक जिंदा शेर है ये सकारत्मक है और सत्यता है लेकिन हर बात के पीछे एक नकारात्मक पहलू भी होता है यशवंत सर आप की पहल सराहनीय है मैं साडेर नमन करता हूँ कि आप जैसे लोग आज भी समाज को जगाने की प्रबल इच्छा रखते है मैं ये कहना चाह रहा हूँ की अगर चिंगारी लगेगी तो ही धुंआ निकलता है रही बात उपेंद्र जी की तो अपने इस कार्यकाल वो किसी का बुरा नहीं किये वो एक निहायत ही बड़े अछे व्य्कीत्व के धनी आदमी है लेकिन ये स्क्य्न्डल क्यूँ? क्या जबरदस्ती इंडिया की कोयी भी जांच एजेन्सी सेंट्रल गवर्नमेंट के इशारे पर किसी को भी अरेस्ट कर सकती है ? अगर ऐसा है तो ये बेहद ही निंदनीय है यशवंत सर आप सही है हम लोग उनके बेहद ही फैन है लेकिन ………….सर आप के इस मुहिम हम सब आप के साथ है लेकिन सत्यता ……….

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  • वेद प्रकाश मिश्रा says:

    यशवंत सर आप का मेडिआ के प्रति सराहनीय कदम बहुत ही सराहनीय रहा है आज तक धन्यवाद

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