जब कत्थे और गुलकंद की महक छोड़कर मौसिक़ी के मंच से चल दिए उस्ताद राशिद खान

नवीन रांगियाल- जब मैं उनके पास पहुंचा तो उनसे आती कत्थे और गुलकंद की महक से भर उठा. बैंगनी रंग का कुर्ता और मुंह में बचा हुआ पान. सांवले रंग के चेहरे पर पसीने की हल्की बूंदें देखकर में कुछ क्षण यही सोचता रहा कि यह वही शख्स है, जिसे बहुत पहले जान लिया जाना … Continue reading जब कत्थे और गुलकंद की महक छोड़कर मौसिक़ी के मंच से चल दिए उस्ताद राशिद खान