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हरिवंश राय बच्चन 'मधुशाला' रच गए और वह जन-जन में लोकप्रिय हो गया. 'मधुशाला' के आगे की कहानी 'मेरा प्याला' नाम से मेरठ के शायर बिजेंद्र सिंह परवाज़ ने रचा है. 'मेरा प्याला' नाम से उनकी ग़ज़लों-गीतों की किताब सन 2004 में आ गई थी लेकिन इस पर लोगों ने ध्यान नहीं दिया. बिजेंद्र सिंह परवाज़ साहब भी खेमेबंदी से अलग रहकर फक्कड़ जीवन जाने वाले शख्स हैं, सो उन्होंने भी ज्यादा इसके प्रचार-प्रसार पर ध्यान नहीं दिया.

परवाज़ ने भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह को अपनी ग़ज़लों-गीतों की किताब 'मेरा प्याला' भेंट दिया था. दिवाली पर साफ-सफाई के दौरान यशवंत को जब यह रचना दिखी तो उन्होंने फौरन मोबाइल से रिकार्ड कर यूट्यूब पर अपलोड कर दिया ताकि इसे ज्यादा से ज्यादा लोग सुनें-गुनें. 'मधुशाला' की तर्ज पर रचित 'मेरा प्याला' में कुल 337 चौपाई हैं. इनमें से कुछ चुनिंदा को यशवंत ने गाया और वीडियो के रूप में अपलोड किया. इस बारे में खुद भड़ास के एडिटर यशवंत ने अपनी फेसबुक वॉल पर जो लिखा है, उसे पढ़िए--

Yashwant Singh :  ''जब अमीरी में मुझे ग़ुरबत के दिन याद आ गए, कार में बैठा हुआ पैदल सफ़र करता रहा।'' ये अदभुत दो लाइनें जिनने रची हैं, उन्हीं की तस्वीर नीचे है, जिन्हें विजेन्द्र सिंह 'परवाज़' कहते हैं.

आजकल परवाज़ साब मोहननगर (गाजियाबाद) में रहते हैं, अपने डाक्टर पुत्र के पास. परवाज़ जी ने मधुशाला के आगे की कड़ी 'मेरा प्याला' नाम से सन 2004 में रच कर उसकी एक प्रति उन्हीं दिनों भेंट की थी. आज साफ-सफाई के दौरान इस किताब के दिखने पर मैंने इसे पढ़ना-गाना शुरू कर दिया... सुनिए 'मेरा प्याला' की कुछ लाइनें... वीडियो लिंक ये रहा : https://www.youtube.com/watch?v=krJtHWgDVLQ

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