बहुत जल्दी चले गए बिहार के जिंदादिल पत्रकार विनायक विजेता!

vinayak vijeta

पटना के वरिष्ठ पत्रकार विनायक विजेता का बीते सोमवार को निधन हो गया। वे मूल रूप से जहानाबाद जिले के बंधुगंज गांव के रहने वाले थे। इधर कुछ सालों से वे गांव में ही रह रहे थे। अपने पीछे वे पत्नी, एक बेटा व बेटी को छोड़ गए।

परिजनों ने बताया कि एक महीना पहले वे घर में ही गिर गए थे जिससे उनके सिर में गहरी चोट लगी थी। इसके अलावे भी वे कई अन्य छोटी-मोटी बीमारियों से जूझ रहे थे।

विनायक जिंदादिल इंसान थे। किसी भी फोरम पर अपनी बात बेबाक तरीके से रखते थे। पत्रकारिता की दुनिया में, खासकर क्राइम रिपोर्टिंग में उनकी एक अलग पहचान बनी। अपराध की खबरों पर गजब की पकड़ थी उनकी। लंबे अर्से तक पटना के हिंदुस्तान अखबार में उन्होंने काम किया।

पटना के पत्रकारों को जैसे ही पता चला कि विनायक विजेता जी उनके बीच नहीं रहे, सभी की आंखें नम हो गईं। हर एक ने उनके साथ बिताए समय को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी।

विनायक ने अपने जन्म दिवस 1 दिसम्बर 2020 के मौके पर अपने फेसबुक वॉल पर जो संदेश लिखा था उसे पढ़िए-

इतनी शक्ति हमें देना दाता…… कल यानी 1 दिसम्बर को मैंने अपने जीवन की अर्धशतकीय पारी पूरी कर 51वें वर्ष में प्रवेश कर रहा हूं। जीवन की इस अर्धशतीय पाली के बीच सुख- दुख के साथ कई झंझावातों से भी गुजरना पड़ा। कुछ अच्छे मित्र और शुभचिन्तक कुछ कारणों से मझसे विमुख भी हुए जिसके लिए मैं अपनी ही गलती माता हूं और ऐसे लोगों से वादा करता हूं कि जल्द ही उनकी गलतफहमियां दूर हो जाएंगी। अपने मित्रों और शुभचिन्तकों की हौसला-आफजाई और बड़े-बुजुर्गो के आर्शीवाद से मैंने हर परिस्थितियों का डटकर समाना किया। जब भी कोई विकट परिस्थिति आती परम श्रद्वेय पं. आचार्य स्व. श्री राम शर्मा यह उक्ति हमारा साहस बंधाती कि ‘मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं बल्कि वह उसका निर्माता, नियंत्रणकर्ता और स्वामी है।’ आगे भी अभी काफी चुनौतियां शेष हैं, पर भगवान से यही प्रार्थना है कि ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना। हम चलें नेक रस्ते पर हमसे भूलकर भी कोई भूल हो ना।।’ सभी बड़े जनों, अभिभावकों, शुभचिन्तक-गणों और मित्रों का तहे दिल से आभार जिनका आशीर्वाद, स्नेह और साथ हमें समय-समय पर मिलता रहा! – विनायक विजेता।

कुछ पत्रकारों की टिप्पणियां पढ़ें-

Gyaneshwar Vatsyayan-

विनायक विजेता नहीं रहे…सुन कर मन कांप गया . अपने जमाने के ठोस क्राइम रिपोर्टर . अभी नहीं जाना था आपको विनायक भाई . बहुत याद आएंगे आप . कोई तो था, जब हम भी क्राइम रिपोर्टिंग करते थे, तब आप जैसे के साथ मुकाबला होता था . कभी आप आगे, तो कभी हम . यह चलता रहता था . लेकिन, जब मिलते थे, तो गर्मजोशी से . ॐ शांति .

Pankaj Srivastava-

इस खबर पर भरोसा ही नहीं हो रहा कि विनायक विजेता भईया अब हमारे बीच नहीं रहें। बिहार के खोजी पत्रकारों में से एक विनायक विजेता भईया से मेरी पहली मुलाकात जहानाबाद के बहुचर्चित ‘सरकारी भऊजी’ केस कवर के दौरान हुई थी। संदेह नहीं उनके सम्पर्क सूत्र बेहद पुख्ता थे। मुझे जब भी मदद की जरुरत पड़ी निसंकोच उनके पास पहुंचा और उन्होंने मदद की। सच भईया आप बहुत याद आएंगे।

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One comment on “बहुत जल्दी चले गए बिहार के जिंदादिल पत्रकार विनायक विजेता!”

  • विजय शंकर says:

    विनायक विजेता जी अब हमारे बीच नहीं रहे पर उनकी यादें सदैव जीवंत रहेंगी । साथ में काम करने और अपने संस्थान की क्रिकेट टीम में साथ खेलने और उनकी बेजोड़ क्राईम रिपोर्टिंग को भुलना मुश्किल होगा । दिल से शोक संवेदना व्यक्त करता हूँ और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूँ । भगवन उनके बच्चों व परिजनों को दुःख सहने की शक्ति दें और हमेशा उन्हें सलामत रखें । ॐ शान्ति

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