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नई दिल्ली, June 19, 2017-  जीएसटी के हाईटैक्स स्लैब में रखी ग्रेनाइट/स्टोन इंडस्ट्रीज व्यापारियों में नयी कर प्रणाली को लेकर बेहद डर का माहौल है। वर्तमान में मात्र 5 पर्सेंट टैक्स अदा कर रहे मार्बल, ग्रेनाइट,स्टोन व टाइल व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी काउंसिल द्वारा निर्धारित 28 पर्सेंट की टैक्स रेट नोटबंदी के बाद पहले से मंद पड़े व्यवसाय को और मुश्किल में ला देगी। पिछले कई दिनों से फिग्सी यानी फेडरेशन ऑफ इंडियन ग्रेनाइट एंड स्टोन इंडस्ट्री के व्यापारी दिल्ली में डटे हैं। व्यापारियों ने सरकार से गुजारिश की है कि जीएसटी रेट को रिकंसीडर (पुनर्विचार) किया जाए।

फेडरेशन ऑफ इंडियन ग्रेनाइट एंड स्टोन इंडस्ट्री के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य और जिगनी ग्रेनाइट इंडसट्रीज ओनर्स वेलफेयर असोसिएशन के संस्थापक सदस्य नरेश पारिक ने बताया कि'राजस्थान समेत देश के सात राज्यों में पत्थरों के काम में लगे करीब 20 लाख परिवारों पर जीएसटी के 28 प्रतिशत टैक्स की वजह से रोजगार जाने का खतरा मंडरा रहा है। बीते साल हुई नोटबंदी के बाद व्यापार किसी तरह वापस पटरी पर लाने के प्रयासों में लगे व्यापारियों के लिए 28 पर्सेंट जीएसटी एक धक्के जैसा है।

ग्रेनाइट स्टोन के व्यापारी पहले से ही हेवी इंपोर्ट ड्यूटी और मंदी की समस्याओं से जूझ रहे हैं, ऐसे में अगर 5 प्रतिशत से टैक्स की ये रेट सीधे 28 प्रतिशत की गयी तो व्यापारियों की कमर टूट जाएगी। बहुत से व्यापारियों को तो अपना धंधा भी बंद करना पड़ेगा और ये कोई धमकी नहीं है बल्कि ये आप कुछ ही दिनों में होता हुआ देख लेंगे'

जिगनी ग्रेनाइट इंडसट्रीज ओनर्स वेलफेयर असोसिएशन के संस्थापक सदस्य ललित राठी कहते हैं, 'स्टोन व्यवसाय की बनावट ऐसी है कि हमारा ज्यादातर बिजनेस क्रेडिट पर चलता है और कई बार 3-6 महीनों में पेमेंट आता है। ऐसे में हर महीने रिटर्न फाइल करना और इनपुट क्रेडिट से जुड़ी पेचीदगी हमारे लिए बड़ी मुश्किलकी बात होगी। अभी अगर टैक्स रेट को 28 की जगह 12 प्रतिशत रखा जाए तो ही बिजनेस करना संभव हो पाएगा। उससे भी मार्बल,ग्रेनाइट व स्टोन की कीमतों में 10-12 प्रतिशत की बढोतरी हो सकती है।'

फेडरेशन की प्रमुख मांगें-

टैक्स स्लैब को सीधे बढ़ाकर 28 प्रतिशत की जगह 12 प्रतिशत की रीज़नेबल दर पर रखा जाए। कृषि और कपड़े के बाद देश में सबसे ज्यादा रोज़गार देने वाली इंडस्ट्री ग्रेनाइट-मार्बल इंडस्ट्री इतने ज्यादा टैक्स स्लैब में रखे जाने से खतरे में पड़ जाएगी।

अगर टैक्स स्लैब इतना ज्यादा हुआ तो इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित होगी। राजस्थान समेत देश भर में 10,000 फैक्ट्रियां हैं और इसमें काम करने वाली लेबर, लोडिंग-अनलोडिंग लेबर, 2000 माइंस में काम करने वाली लेबर सीधे प्रभावित होगी। राजस्थान में तोएक्साइज था ही नहीं और रेट डिसाइड करते वक्त 14 पर्सेंट एक्साइज व 14 पर्सेंट वैट के हिसाब से 28 पर्सेंट रेट निर्धारित कर दिया गया।व्यापारी सिर्फ 5 पर्सेंट वैट देते आए हैं और अब 28 पर्सेंट टैक्स तो संभव ही नहीं।'

स्टोन ग्रेनाइट जैसी चीजें आजकल हर आदमी अपने घर में इस्तेमाल कर रहा है और ये विलासिता की वस्तु नहीं रह गयी है। लिहाजा इस सेक्टर को 28 प्रतिशत टैक्स नेट में रखना बेतुकी सी बात है। टैक्स में बढ़ोतरी से सरकार के टैक्स कलेक्शन कम होगा। कीमतें ज्यादा बढ़ने से बिक्री कम होगी व इसका असर रोजगार पर होगा।

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