छत्तीसगढ़ में टीवी पत्रकार योगेश मिश्रा के खिलाफ एफआईआर

पत्रकार योगेश मिश्रा

रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य में हाल में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में पत्रकार सुरक्षा कानून समेत कई विधेयकों पर खासी चर्चा हुई। लेकिन एक ख़बर की हकीकत लाईव दिखाकर कड़वी सच्चाई को ज़ाहिर करने वाले एक राज्य अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार के ऊपर एकतरफ़ा एफआईआर कर दिए जाने के बाद छत्तीसगढ़ की पुलिस और ख़ुद को पत्रकारों की हितैषी कहने वाली छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार आलोचना के केंद्र में आ गई है। इससे पहले भी राज्य के महासमुंद के पत्रकार दिलीप शर्मा को बिजली कटौती की खबर छापने पर आधी रात उन्हें घर से अपराधी जैसे सुलूक करके थाने में बिठा दिया गया था। अब इन घटनाओं के कारण सत्ता पर बैठे सत्ताधीशों से ये पूछा जा रहा है कि क्या पत्रकार सुरक्षा कानून सिर्फ कागजों में कैद होकर रह जाएगा?

रायपुर के पुरानी बस्ती थाने में सुदर्शन न्यूज़ चैनल के ब्यूरो चीफ योगेश मिश्रा के खिलाफ उन्माद फैलाने, धार्मिक विद्वेष पैदा करने समेत कई संगीन आरोप लगाते हुए धारा 153A का मामला पंजीबद्ध किया गया है। पत्रकार योगेश मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने अपनी खबर से आपसी सौहार्द को बिगाड़ने का प्रयास किया है। वहीं योगेश का कहना है कि इस पूरे मामले को निष्पक्षता से देखा जाए तो रायपुर पुलिस और सरकार सवालों के कटघरे में आ जाएगी क्योंकि पीड़ितों की समस्या को लगातार रायपुर पुलिस और प्रशासन ने नज़रअंदाज़ किया। पर जब पुलिस की निष्क्रियता की कलई खोलती रिपोर्ट चैनल पर चली, देशभर में व्यवस्था की फ़ज़ीहत हुई, तो पॉवर का इस्तेमाल करते हुए रिपोर्ट बनाने वाले पत्रकार पर ही एफआईआर का डंडा सरकार ने चला दिया।

योगेश बताते हैं कि वे 6 जुलाई को कुकरीपारा इलाके में पीड़ित परिवार के घर गए और दस्तावेजों के साथ ही वीडियो, ऑडियो समेत सभी पूरी पुष्टि के बाद पीड़ित परिवार से बातचीत की। इससे संबंधित खबर कवर की। योगेश बताते हैं कि इस खबर को चलाने के बाद वह लगातार रायपुर के एसएसपी आरिफ शेख के संपर्क में थे और अगले दिन यानी 7 जुलाई को उन्होंने बात की और आग्रह किया कि इस मामले का समाधान निकालें। पत्रकार योगेश के आग्रह पर एसएसपी आरिफ शेख ने मामले की भविष्य में व्यक्तिगत जानकारी लेने और पीड़ित परिवार से 8 जुलाई को मुलाकात करने की बात कही और योगेश से आग्रह किया कि वह परिवार को एसपी के पास भेजें।

8 जुलाई को एसपी कार्यालय में नहीं बैठे, परिवार से नहीं मिले। ऐसे में योगेश बताते हैं कि उन्होंने इस मामले में प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू से भी बाईट ली है। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने इस मामले को लेकर अनभिज्ञता जाहिर की और परिवार से जल्दी मुलाकात करके मामले का संज्ञान लेने की बात कही। इसके बाद खबर लगातार चलती रही और आश्चर्यजनक ढंग से 11 जुलाई की शाम रायपुर के पुरानीबस्ती थाने में पत्रकार योगेश मिश्रा, पीड़िता विजय गुप्ता, उनकी बेटी करिश्मा गुप्ता, हिंदू कार्यकर्ता ओमेश बिसेन के खिलाफ पुलिस ने 153A का मामला दर्ज कर लिया। इस मामले में एकतरफ़ा कार्रवाई को लेकर देश के कई राज्यों में भी सरकार और प्रशासन को लेकर पत्रकारों में नाराजगी देखी जा रही है।

बिना आईजी लेवल के जाँच के FIR, पत्रकार सुरक्षा कानून की उड़ाईं धज्जियाँ

छत्तीसगढ़ में सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने पत्रकारों को लेकर शुरू से ही संवेदनशीलता का परिचय देने का वादा किया था। पहले से ही यह परिपाटी रही है कि किसी भी पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज होने से पहले आईजी लेवल का अधिकारी मामले की व्यक्तिगत जांच करेगा। उसके बाद ही किसी तरह की कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पर इस मामले में पुलिस ने सारे नियमों की धज्जियां उड़ा दी और एकतरफा बात सुनते हुए पुलिस ने सीधे तौर पर मामला दर्ज कर लिया। ऐसे में पुलिस के इस एकतरफा कार्रवाई की आलोचना की जा रही है। गौरतलब है कि इससे पहले भी छत्तीसगढ़ में बिजली कटौती की ख़बर प्रकाशित करने वाले महासमुंद के वरिष्ठ पत्रकार दिलीप शर्मा को भी छत्तीसगढ़ की पुलिस ने आधी रात घर से उठाकर थाने में बैठा दिया था। जिसपर भी सरकार की बुरी तरह आलोचना हुई थी।

छत्तीसगढ़ में पत्रकार योगेश मिश्रा के खिलाफ हुए एफआईआर मामले को लेकर देश के कई राज्यों में इसकी काफी निंदा हो रही है। झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार शाहनवाज हुसैन, दिल्ली के राष्ट्रीय स्तर के कई पत्रकारों समेत विभिन्न राज्यों के पत्रकारों ने एक सुर में इस पूरी कार्रवाई का विरोध किया है और सरकार और प्रशासन के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लगातार जारी किया जा रहा है।

आश्चर्य की बात तो यह भी है कि इस पूरे मामले में पीड़ित गुप्ता परिवार काफी समय से रायपुर के एसपी आरिफ शेख समेत पुलिस के समस्त अधिकारियों को मामले की जानकारी से अवगत कराता रहा है। बकायदा एसपी आरिफ शेख को व्यक्तिगत व्हाट्सएप के जरिए पीड़ितों ने रेप की धमकी, मर्डर की धमकी समेत कई सबूत भी व्हाट्सएप लगातार किए हैं। जिसकी गम्भीरता को लगातार नज़रंदाज़ किया गया। हर बार एसएसपी आरिफ शेख ने मामले को लेकर किसी तरह की सक्रियता नहीं दिखाई और अब अनोखे अंदाज में पुलिस ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना तो छोड़ उल्टे पीड़ित परिवार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।



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