जयशंकर की पुस्तक पर परिचर्चा में इतिहास, सत्ता, पत्रकारिता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर विमर्श!

राजगोपाल सिंह वर्मा- आपातकाल से अमृतकाल तक : लोकतंत्र के सवाल! जयशंकर की पुस्तक पर परिचर्चा में इतिहास, सत्ता, पत्रकारिता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर विमर्श आपातकाल के पचास वर्ष बाद भारतीय लोकतंत्र कहाँ खड़ा है? क्या हमारी संवैधानिक संस्थाएँ पर्याप्त स्वतंत्र हैं? राजनीतिक दलों में लोकतंत्र कितना बचा है? और क्या पत्रकारिता आज भी … Continue reading जयशंकर की पुस्तक पर परिचर्चा में इतिहास, सत्ता, पत्रकारिता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर विमर्श!