कृष्ण कल्पित जी की असभ्यता और अशिष्टता का भरा पूरा इतिहास रहा है!
प्रीति अज्ञात जैन- आज चार दिन बाद यहाँ आई हूँ तो एक अलग ही तमाशा देखने को मिल रहा है। नाम जाना तो आश्चर्य नहीं हुआ। मुझे समझ नहीं आता, कृष्ण कल्पित जी की भाषा और व्यवहार से पूरी तरह परिचित होते हुए भी साहित्य बिरादरी का एक बड़ा वर्ग बार-बार उनके सामने क्यों नतमस्तक … Continue reading कृष्ण कल्पित जी की असभ्यता और अशिष्टता का भरा पूरा इतिहास रहा है!
Copy and paste this URL into your WordPress site to embed
Copy and paste this code into your site to embed