मार्क टली उस भारत से रुख़सत हुए हैं, जहां सच की आवाज प्रचार से दबाई जाती है!

अद्वैत बहुगुणा- आज हमने अपने दौर के समाचार का विश्वास खो दिया। ये अस्सी का दशक था, हर शाम हर किसी के कान लगे होते थे, समाचार सुनाने वाले जैसे ही कहते थे, इस घटना को हमारे संवाददाता मार्क टाली ने रिपोर्ट किया और बताया कि…., या फिर अपने रेडियो फीचर को पूरा पढ़ने के … Continue reading मार्क टली उस भारत से रुख़सत हुए हैं, जहां सच की आवाज प्रचार से दबाई जाती है!