ओम थानवी- मार्क टली नहीं रहे। भारत में हमारे लिए कभी वही बीबीसी थे। उन्हें सुनते हुए हम बड़े हुए। बाद में — कह सकता हूँ — उनसे दोस्ती भी हो गई। आइआइसी में उनके साथ अक्सर बैठकी हो जाती थी। दिल से बात करते। बहुत साफ़। पत्रकारिता में निडर थे। लेकिन दुराग्रह पालते नहीं … Continue reading मार्क टली नहीं रहे, भारत में हमारे लिए कभी वही BBC थे!
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मार्क टली नहीं रहे, भारत में हमारे लिए कभी वही BBC थे!
ओम थानवी- मार्क टली नहीं रहे। भारत में हमारे लिए कभी वही बीबीसी थे। उन्हें सुनते हुए हम बड़े हुए। बाद में — कह सकता हूँ — उनसे दोस्ती भी हो गई। आइआइसी में उनके साथ अक्सर बैठकी हो जाती थी। दिल से बात करते। बहुत साफ़। पत्रकारिता में निडर थे। लेकिन दुराग्रह पालते नहीं … Continue reading मार्क टली नहीं रहे, भारत में हमारे लिए कभी वही BBC थे!