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सुख-दुख

मार्क टली नहीं रहे, भारत में हमारे लिए कभी वही BBC थे!

ओम थानवी-

मार्क टली नहीं रहे। भारत में हमारे लिए कभी वही बीबीसी थे। उन्हें सुनते हुए हम बड़े हुए। बाद में — कह सकता हूँ — उनसे दोस्ती भी हो गई।

आइआइसी में उनके साथ अक्सर बैठकी हो जाती थी। दिल से बात करते। बहुत साफ़। पत्रकारिता में निडर थे। लेकिन दुराग्रह पालते नहीं देखा। उनका गद्य भी सरस है, जैसे उनकी उपस्थिति थी।

कल शाम ही आइआइसी के बाग़ में उनके एकजान-सहयोगी रहे सतीश जेकब से मुलाक़ात हुई थी। दोनों की कैसी नायाब जोड़ी थी। आज टूट गई। हम सब का भी एक जोड़ टूट गया।

मुझे मार्क साहब की सहज हँसी याद आ रही है। जैसे आसपास ही हों कहीं और पूछ रहे हों — ओम, कैसा है?

बहुत ग़मगीन, सर टली! आँखें नम हैं। अलविदा। आरआइपी।

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1 Comment

1 Comment

  1. R.R.SHARMA प्रधान संपादक

    January 29, 2026 at 12:50 am

    मार्क्स टेली बीबीसी का एक प्रख्यात नाम है। भारत में बीबीसी उनके ही नाम से पहचानी जाती थी।

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