भारतीय पत्रकारिता में “पिशाचों” की एंट्री!
Shams Ur Rehman Alavi- पत्रकारिता के पिशाच, जर्नलिज्म का मृत्यु काल.. इससे ज्यादा खतरनाक क्राइम हो सकता है! नीचे ये खबर देख रहे हैं, ऐसे लोगों के लिए और ऐसी हैवानियत के बाद भी हेडलाइन में उनके लिए न दरिंदे छपेगा न नराधम, आरोपी पकड़ लिए गए हैं मगर उनकी फोटो नहीं छपेगी, अगले दिन … Continue reading भारतीय पत्रकारिता में “पिशाचों” की एंट्री!
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