Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

ये दुनिया

कुनबे समेत पूरी ताकत लगाने के बाद भी प्रियंका को मिले 15 में से 2 अंक

सुतानपुर/अमेठी/रायबरेली। सोनिया मैडम ने माना और हम भी इससे गुरेज़ नहीं करते कि कांग्रेस की शर्मनाक हार के तीन मुख्य कारण रहे, ‘कमर तोड़ महंगाई, भ्रष्टाचार, गलत टिकट वितरण’। इस मसले की पहल चुनाव से पहले शुरू हुई जो अब तक बदस्तूर जारी है। पर मैडम ने चुनाव के दरम्यान की दो वजहों पर चुप्पी साध ली, वह यह कि ‘कद्दावर नेताओं का बड़-बोलापन एवं भितरघात’ इन दोनों ही वजहात का हार में अहम किरादर रहा। मैडम इस बात से इत्तेफाक रखें या नज़र अंदाज कर जायें लेकिन यह कटु सत्‍य है, जिसे भांपकर ‘गेहूं में घुसे घुन’ के मानिन्द कांग्रेसियों ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफों की झड़ी लगा दी। काश! प्रदेश खासकर ‘अमेठी-रायबरेली और सुलतानपुर’ के कांग्रेसियों ने पहले ही इस जागृति का परिचय दे दिया होता तो शायद ‘गांधी-नेहरु’ खानदान में परिवारिक दर्जे के इन तीनों इलाकों में कुनबे संग चुनावी कमान संभालने पहुंचीं कांग्रेस की ‘स्टार प्रचारक प्रिंयका गांधी’ को चुनावी नतीजे आने के बाद 15 में से 2 अंक नहीं मिलते।

सुतानपुर/अमेठी/रायबरेली। सोनिया मैडम ने माना और हम भी इससे गुरेज़ नहीं करते कि कांग्रेस की शर्मनाक हार के तीन मुख्य कारण रहे, ‘कमर तोड़ महंगाई, भ्रष्टाचार, गलत टिकट वितरण’। इस मसले की पहल चुनाव से पहले शुरू हुई जो अब तक बदस्तूर जारी है। पर मैडम ने चुनाव के दरम्यान की दो वजहों पर चुप्पी साध ली, वह यह कि ‘कद्दावर नेताओं का बड़-बोलापन एवं भितरघात’ इन दोनों ही वजहात का हार में अहम किरादर रहा। मैडम इस बात से इत्तेफाक रखें या नज़र अंदाज कर जायें लेकिन यह कटु सत्‍य है, जिसे भांपकर ‘गेहूं में घुसे घुन’ के मानिन्द कांग्रेसियों ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफों की झड़ी लगा दी। काश! प्रदेश खासकर ‘अमेठी-रायबरेली और सुलतानपुर’ के कांग्रेसियों ने पहले ही इस जागृति का परिचय दे दिया होता तो शायद ‘गांधी-नेहरु’ खानदान में परिवारिक दर्जे के इन तीनों इलाकों में कुनबे संग चुनावी कमान संभालने पहुंचीं कांग्रेस की ‘स्टार प्रचारक प्रिंयका गांधी’ को चुनावी नतीजे आने के बाद 15 में से 2 अंक नहीं मिलते।

6 मार्च को दूसरे पहर जब प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों की मतगणना में रुझान सपा के हक़ में जाता दिखाकर तो प्रमुख विपक्षी दल बसपा-भाजपा और कांग्रेस मुंह के बल गिर पड़े। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को अपने 45 दिनों की मेहनत पर पानी फिरता नज़र आया। कल तक जिस हिन्दुस्तानी मीडिया से श्री गांधी सीधे मुंह बात करने के रवादार नहीं होते थे, उसी मीडिया के समक्ष वह दुःखी भाव से बोले कि हार की नैतिक ज़िम्मेदारी वह खुद लेते हैं। श्री गांधी के यही अलफाज़ प्रदेश से लेकर ज़िला इकाई तक के कांग्रेसियों के लिये संजीवनी का काम कर गया। दरअसल राहुल ने मौके की नज़ाकत को देखते हुए इतना कहकर इतिश्री कर लिया, लेकिन लाख टके का एक सवाल खड़ा होता है क्या सिर्फ नैतिक ज़िम्मेदारी से हार का कलंक खत्म हो जायेगा। क्योंकि प्रदेश की 388 सीटों के नतीजों से हटकर यदि ‘गांधी-नेहरु’ परिवार के अभिन्न अंग माने जाने वाले अमेठी, रायबरेली और सुल्‍तानपुर में कांग्रेस को करारी शिकस्त मिली। बस करम रहा तो अमेठी लोकसभा सीट का जो कि राहुल का लोकसभा क्षेत्र है, यहां तो कांग्रेस के खाते में 2 सीटें आ गई, परन्तु सोनिया के संसदीय क्षेत्र रायबरेली एवं अमेठी के राज घराने से ताल्लुक रखने वाले सुल्‍तानपुर के सदर सांसद डा. संजय सिंह के संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। दोनों संसदीय क्षेत्र को मिलाकर दस सीटे थीं जिसमें समाजवादी पार्टी को 9 और एक सीट पीस पार्टी को मिली है।

चौंकाने वाली बात तो यह है कि अमेठी-रायबरेली-सुल्‍तानपुर को मिलाकर 15 सीटों पर राहुल के अलावा स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी ने कमान संभाल रखी थी। साथ ही साथ उन्होंने कुनबे के साथ इन इलाकों में पखवारे भर तक पड़ाव डाल रखा था। फिर यह करारी शिकस्त जिसे कांग्रेसी पचा नहीं पा रहे। हैरान कुन बात तो यह है कि करीब ढाई बरस पहले सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव में इन तीनों सीटों पर कांग्रेस ने रिकार्ड जीत दर्ज कराई थी। अमेठी से युवराज राहुल को जहां 3 लाख 70 हज़ार मतों से विजय प्राप्त हुई थी, वहीं रायबरेली से यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को 3 लाख 72 हज़ार मत से जीत हासिल हुई थी। जबकि सुल्‍तानपुर से पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं अमेठी के नरेश संजय सिंह ने 98 हज़ार मतों से जीत दर्ज कराई थी। उधर 2004 में अमेठी से राहुल ने 2 लाख 90 हज़ार और रायबरेली से सोनिया ने 2 लाख 49 हज़ार मत से जीत कर सीट को कांग्रेस की झोली में डाला था। एक अन्य पहलू जो राहुल को सोचने पर मजबूर कर रहा है कि 2007 के विधानसभा चुनाव में अमेठी की गौरीगंज और तिलोई विधानसभा सीट को छोड़ तीन सीटें अमेठी, जगदीशपुर एवं सलोन कांग्रेस के पाले में गई थी। लेकिन 2012 के नतीजे आने के बाद सिर्फ जगदीशपुर सीट पर ही कांग्रेस का कब्ज़ा बरकारार रह सका जबकि तिलोई सीट को कांग्रेस ने सपा से छीना है। वहीं अमेठी सीट पर जीत की हैट्रिक बनाने का ख्वाब सजोये बैठीं रानी अमिता को सपा प्रत्याशी ने शिकस्त दे दिया।

चौकाने वाला दृश्य तो रायबरेली लोकसभा सीट का है। 2007 में जहां सदर सीट को छोड़ जहां अन्य चारों सीट बचरावां, सरेनी, डलमऊ और हरचांदपुर कांग्रेस के पास थी, इन सीटों में से एक सदर सीट फिर से उसी हाथ में गई। बस फर्क यह है कि अब कि रायबरेली सदर सीट से चुनाव लड़ रहे अखिलेश सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के बजाए पीस पार्टी के सिम्‍बल पर जीत हासिल की है। जबकि अन्य चारों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों को शिकस्त का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस के लिये सबसे अधिक गम्भीर विषय सुल्‍तानपुर लोकसभा सीट रही। यहां इसौली और सदर सीट से कांग्रेस के दो पूर्व मंत्रियों ने हार की हैट्रिक बनाई है। जबकि दस जनपथ से नाक रगड़कर टिकट लाये सुल्‍तानपुर प्रत्याशी समेत इसौली, सदर और कादीपुर से कांग्रेस प्रत्याशियों की ज़मानत तक नहीं बच सकी। बस एक लम्भुआ प्रत्याशी ही जमानत बचा पाने में सफल रहे, जो कांग्रेस के लिये काफी दुःखद रहा।

सबसे बढ़कर कांग्रेस के लिये सोचने का पहलू यह रहा कि सुल्‍तानपुर में मुख्यालय की सीट से लेकर, इसौली, सदर तीनों ही सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी पीस व कौमी एकता दल के प्रत्याशी के आगे थोथा चना साबित हुए। असल बिना तो यह रही कि चुनावी समर में करीब एक पखवारे तक कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी ने अपने कुनबे के साथ अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा रखी थी कि भाई का कुछ बोझ हल्‍का हो सके। लेकिन प्रियंका का अरमान धरा का धरा रह गया। शायद नतीजे आने के बाद प्रियंका को एक बार सदमा अवश्य हुआ होगा। अब जब कांग्रेस के लिये शर्मनाक नतीजे सामने हैं तो कांग्रेसी नैतिकता की मिसाल कायम करने में जुटे हैं। जबकि चुनाव से पूर्व पदाधिकारी से लेकर प्रत्याशी भितरघात में मस्त थे।

लेखक असगर नकी सुल्‍तानपुर में पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...