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हर साल दुनिया में धुम्रपान के चलते 80 लाख लोगों की होती है मौत

आज, विश्व तंबाकू निषेध दिवस है, हर वर्ष 31 मई का दिन दुनिया भर में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के तौर पर मनाया जाता है और इस दिन यह वादा किया जाता है कि धूम्रपान की समाप्ति के लिए सार्वजनिक जागरूकता के साथ कड़े क़ानून बनाकर इस पर रोक लगाने की कोशिश की जाएगी. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इस स्थिति से निपटने के लिए सभी दुनिया के देशों के लिए पत्र  भी जारी करता है, लेकिन बात एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाती और 31 मई का वह दिन फिर आ जाता है. आंकड़ों की रोशनी में चिंताजनक स्थिति सामने आती है. धूम्रपान के नुकसान का अहसास दुनिया को सबसे पहले 1930 में हुआ था, उसके बाद से इस मसले पर चिंनतन की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन चिंता का विषय है कि 82 वर्षीय संघर्ष का फल यह है कि विश्व स्तर पर धूम्रपान से मरने वालों की संख्या में दिन पर दिन असामान्य वृद्धि ही दर्ज की गयी है.

आज, विश्व तंबाकू निषेध दिवस है, हर वर्ष 31 मई का दिन दुनिया भर में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के तौर पर मनाया जाता है और इस दिन यह वादा किया जाता है कि धूम्रपान की समाप्ति के लिए सार्वजनिक जागरूकता के साथ कड़े क़ानून बनाकर इस पर रोक लगाने की कोशिश की जाएगी. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इस स्थिति से निपटने के लिए सभी दुनिया के देशों के लिए पत्र  भी जारी करता है, लेकिन बात एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाती और 31 मई का वह दिन फिर आ जाता है. आंकड़ों की रोशनी में चिंताजनक स्थिति सामने आती है. धूम्रपान के नुकसान का अहसास दुनिया को सबसे पहले 1930 में हुआ था, उसके बाद से इस मसले पर चिंनतन की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन चिंता का विषय है कि 82 वर्षीय संघर्ष का फल यह है कि विश्व स्तर पर धूम्रपान से मरने वालों की संख्या में दिन पर दिन असामान्य वृद्धि ही दर्ज की गयी है.

एक समीक्षा के अनुसार हर साल दुनियाभर में 80 लाख लोग धूम्रपान के कारण मौत को गले लगा लेते हैं. दुनिया में हर साल पचास अरब रुपये धूम्रपान पर खर्च किए जाते हैं. सर्वेक्षण में यह भी कहा गया कि अगर यही स्थिति जारी रही तो 2020 तक धूम्रपान के कारण मरने वालों की संख्या एक करोड़ सालाना हो जाएगी. हर साल की तरह इस बार भी तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर दुनिया भर में, गोष्ठियाँ और रैलिया निकाल कर इस उम्मीद के साथ तसल्ली कर ली जाएगी कि इस साल में धूम्रपान में पर्याप्त कमी हो जाएगी, जबकि यह कच्चे विचार है. स्थिति में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद तब तक नहीं की जा सकती जब तक जागरूकता अभियान के साथ तंबाकू से तैयार होने वाली वस्तु के उत्पादन और बिक्री पर पूरी तौर रोक न लगाई जाए. हम देखते हैं कि आए दिन शराब पीने से सैकड़ों लोग मारे जाते हैं और समाज में आपराधिक गतिविधियों में शराब का बड़ा दखल होता है. और इसे सरकार भी स्वीकार करती है, लेकिन उस पर प्रतिबंध लगाने के लिए सरकारें तैयार नजर नहीं आतीं. इसलिए व्यावहारिक उपाय किए बिना स्थिति में कोई सकारात्मक बदलाव की इच्छा करना ठीक नहीं है तथा मजबूत इच्छाशक्ति के बिना धूम्रपान पर नियंत्रण नामुमकिन है. भारत  की स्थिति पर नज़र डालें तो पता चलता है कि 5,56,400 लोग 2010 में धूम्रपान के कारण होने वाले रोग से मौत शिकार हुए हैं, जिनमें 36 से 69 वर्ष उम्र के लोगों की संख्या 71 प्रतिशत थी, अब इसमें वृद्धि हुई है.

आइए इस अवसर पर एक ऐसे व्यक्ति से आप का परिचय कराते हैं, जिनका जीवन नमूना है उन लोगों के लिए जो धूम्रपान से अपने आप को मुक्त कराना चाहते हैं. उत्तर प्रदेश के जिला फतेहपुर के कस्बा कोट निवासी मोहम्मद रईस उर्फ बाबू खान ने आज से 21 साल पहले रोजी रोटी की तलाश में शहर भोपाल की ओर रुख़ किया. काम की तलाश में  मोहम्मद रईस ने भोपाल स्थित मंडी दीप में एक सिगरेट बनाने वाली कंपनी आईटीसी के उत्पादन विभाग में नौकरी कर लिया. बाद में उत्पादक के रूप में काम करना शुरू किया. पिछले 17 साल से सिगरेट बनाने के काम में व्यस्त हैं लेकिन कभी सिगरेट मुंह को नहीं लगाया. जबकि कंपनी की ओर से फ्री सिगरेट लेने की अनुमति है. मोहम्मद रईस अब तक ब्रिस्टल सहित दो सौ से अधिक ब्रांड के सिगरेट बना चुके हैं. इन दिनों गुडगाव की एक सिगरेट निर्यातक फैक्ट्री में काम करते हैं. गुणवत्ता टेस्ट में आने वाली समस्याओं के बारे में बताते हैं कि मेरा गुणवत्ता परीक्षण का तरीका अलग है. तंबाकू को हाथ लगाकर यह अनुमान लग जाता है कि इसमें नकोटीन की मात्रा कितनी है. 35 वर्षीय मोहम्मद रईस शिक्षित नहीं हैं लेकिन सिगरेट का नुकसान का उन्हें पूरी तरह पता है, इन परिस्थितियों में भी खुद को धूम्रपान से बचाए रखना क्या किसी चुनौती से कम है? उनका यह अमल लाखों लोगों के लिए अनुसरणीय है, जिनमें शिक्षित हैं और निरक्षर भी. डॉक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर और वकील जैसे जीवन के हर क्षेत्र से जुड़े लोग किसी न किसी रूप में धूम्रपान का शिकार हैं. यहाँ उनका उल्लेख केवल इसलिए किया गया है कि विरोधी माहौल में किसी भी स्थिति से निपटा जा सकता है. मोहम्मद रईस जीवन का अनुभव उन लोगों के लिए मार्ग दर्शक बन सकता है, जो धूम्रपान की लानत से मुक्ति चाहते हैं, यदि उनमें मजबूत इच्छाशक्ति हो.

लेखक अशरफ अली बसतवी ह्यूमन वेल्‍फेयर फाउंडेशन यूनिट से जुड़े हुए हैं.

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