लखनऊ : इंस्टीट्यूट फार रिसर्च एंड डोक्युमेंटेशन इन सोशल साइंसेज की डॉ नूतन ठाकुर एवं उर्मिला पाण्डेय द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में एक रिट याचिका दायर की गयी. इस याचिका में याचीगण ने यह प्रार्थना की है कि हाई कोर्ट महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार को महिलाओं के लिए अंडरगारमेंट्स बेचने वाले सभी दुकानों के लिए एक ऐसी शासकीय नीति बना कर उसके अनुरूप शासकीय आदेश पारित करने हेतु निर्देशित करे जिससे ऐसे सभी दुकानों में कम से कम एक महिला सेल्सगर्ल एवं एक ट्रायल रूम होने की व्यवस्था अनिवार्यतया हो.
साथ ही तमाम ऐसे दुकानों में अभद्र ढंग से प्रस्तुत किये गए महिला अंगवस्त्र के सम्बन्ध में रोक लगाए जाएँ. डॉ नूतन ठाकुर और उर्मिला पाण्डेय ने हाई कोर्ट से यह भी निवेदन किया है कि हाई कोर्ट महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय को ना सिर्फ ऐसे आदेश जारी करने को आदेशित करे बल्कि उसकी आगे मोनिटरिंग करने के भी आदेश दे. याचीगण के अधिवक्ता अशोक पाण्डेय हैं. इस पेटिशन में यह कहा गया है कि महिलाओं और लड़कियों को अपने लिए अंगवस्त्र खरीदते समय कुछ खास तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. लगभग इन सभी दुकाओं में ज्यादातर लोग पुरुष होते हैं और इन दुकानों में अधिकतर ट्रायलरूम भी नहीं होते.
इसका दुष्परिणाम यह होता है कि महिलाओं को सही साइज़ के अंगवस्त्र खरीदने में कठिनाई होती है और वे गलत साइज़ के अंडरगारमेंट्स पहनने को बाध्य होती हैं जिसमें ब्रेसरी के गलत साइज़ से ब्रेस्ट कैंसर की भी संभावना रहती है. पेटिशन में यह भी कहा गया है कि जिस तरह से महिला अंगवस्त्रों को अभद्र ढंग से इन सभी दुकानों में खुलेआम प्रदर्शित किया जाता है उससे भी महिलाओं को भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है. पेटिशन में हाल में ही साउदी अरब में इस सम्बन्ध में पारित किये गए क़ानून का भी हवाला दिया गया है.


