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अदनान सामी के बहाने दिग्विजय ने खेला ‘मुस्लिम कार्ड’

यूपी के चुनावी संग्राम के मद्देनजर सभी दल अपने वोट बैंक को मजबूत करने और पाले में घेरने की कवायद में लगे हैं। यूपी में अपनी खोई जमीन को वापिस पाने की सबसे अधिक अकुलाहट कांग्रेस में दिखाई देती है। किसी जमाने में दलित, जनजाति, ब्राहाण और मुसलमान कांग्रेस का पक्का और ठोस वोट बैंक माने जाते थे। लेकिन बदले समय और समीकरणों ने कांग्रेस के मजबूत जनाधार को उससे छीन लिया था। परिणामस्वरूप यूपी में पार्टी आखिरी पायदान पर पहुंच गई थी।

यूपी के चुनावी संग्राम के मद्देनजर सभी दल अपने वोट बैंक को मजबूत करने और पाले में घेरने की कवायद में लगे हैं। यूपी में अपनी खोई जमीन को वापिस पाने की सबसे अधिक अकुलाहट कांग्रेस में दिखाई देती है। किसी जमाने में दलित, जनजाति, ब्राहाण और मुसलमान कांग्रेस का पक्का और ठोस वोट बैंक माने जाते थे। लेकिन बदले समय और समीकरणों ने कांग्रेस के मजबूत जनाधार को उससे छीन लिया था। परिणामस्वरूप यूपी में पार्टी आखिरी पायदान पर पहुंच गई थी।
राहुल गांधी के मिशन 2012 और अति-सक्रियता के चलते यूपी के कांग्रेसी उत्साहित और आशान्वित हैं कि इस दफा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस कुछ ‘कमाल’ जरूर करेगी। राहुल के मिशन को अमली जामा पहनाने के अहम जिम्मेदारी कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के कंधों पर है। अपने उल्‍टे-सीधे बयानों के लिए मशहूर दिग्गी राजा ने पिछले दिनों पाकिस्तानी गायक अदनान सामी को देश में रहने की मोहलत देने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृहमंत्री पी.चिदंबरम से सिफारिश करके एक बार फिर मुस्लिम कार्ड खेला है। दिग्विजय का यह कदम यूपी चुनावों के मद्देनजर मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने और अपने पाले में लाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। 

गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से प्रसिद्व गायक अदनान सामी के मामले में मिले थे और उन्होंने अदनान को भारत में रहने की अनुमति दिए जाने का आग्रह किया था। क्योंकि वे एक अच्छे गायक हैं और देश में उनके अनेक प्रशंसक हैं। वे भारत में रहना चाहते हैं। दिग्विजय ने मीडिया को बताया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें इस मामले में मदद का भरोसा दिया है। दिसंबर 2010 में प्रवर्तन निदेशालय ने अदनान सामी का संपत्ति जब्त कर ली थी। जिसे सामी ने भारतीय रिजर्व बैंक आफ इंडिया की बिना अनुमति के खरीदा था। सामी अपनी पत्नी से कानूनी लड़ाई भी लड़ रहे हैं। पाकिस्तानी मूल के अदनान का जन्म और पढ़ाई लिखाई ब्रिटेन में हुई है। सामी ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा पंडित शिवकुमार शर्मा से ली है।

असल में यूपी के चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस मुस्लिम मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। अदनान सामी का पक्ष लेकर दिग्विजय ने देशभर के और खासकर यूपी के मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने और उन तक ये मैसेज पहुंचाने की कोशिश की है कि कांग्रेस मुस्लिम बिरादरी के लिए खास हमदर्दी रखती है और उनके छोटे-बड़े मसलों का पूरा ध्यान रखती है। मुस्लिम वोटरों की तरफ निशाना साधते हुए दिग्गी ने अदनान की सिफारिश पीएम और होम मिनिस्टर से की है। मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने की हसरत से ही बाटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए युवकों के परिजनों से मिलने दिग्गी राजा संजरपुर (आजमगढ़) गए थे। कुख्यात आंतकवादी ओसामा बिन लादेन को ‘ओसामा जी’ कहकर दिग्विजय ने मुस्‍िलम समाज का दिल जीतने की कोशिश की थी।

यूपी के आगामी विधानसभा चुनावों में मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका अदा करेंगे। इसी सोच के तहत बसपा, सपा और कांग्रेस तीनों दल मुस्लिम वोटरों को यह जताने की कोशिश में लगे हैं कि वही उनके असली हमदर्द और हिमायती हैं। पिछले विधानसभा और आम चुनावों के तहत मुस्लिम वोटरों का रूझान बसपा और कांग्रेस की ओर रहा था। वर्तमान में कांग्रेस और सपा में मुस्लिम वोटरों को लेकर अधिक खींचतान दिखाई दे रही है। वहीं पीस पार्टी के मैदान में कूदने से मुस्लिम वोट बंटने की उम्मीद से इनकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन बाबरी मस्जिद केस में निर्णय आने के बाद से सूबे में मुस्लिम वोटरों का रूख कांग्रेस के प्रति थोड़ा नरम हुआ है। कांग्रेस आलाकमान को इस बात का इल्‍म है और वो मायावती को सत्ता से बाहर करने के लिए साम-दाम-दण्ड और भेद का इस्तेमाल करने से उसे कोई परहेज नहीं है। आरएसएस की आलोचना और हिंदू आंतकवाद के मुद्दे को जोर-शोर से उछालना मुस्लिम वोटरों को खुश करने और तुष्टिकरण की राजनीति का ही हिस्सा है। दिग्विजय कांग्रेस आलाकमान के माउथ पीस बनकर ही बयानबाजी और कोई कदम उठाते हैं। इसी कड़ी में दिग्विजय सिंह ने गायक अदनान सामी की तरफदारी करके ये जता दिया है कि मुस्लिम वोटरों को अपने पाले में लाने के लिए वो किसी भी हद तक जा सकते हैं।

लेखक डा. आशीष वशिष्‍ठ स्‍वतंत्र पत्रकार तथा लखनऊ के निवासी हैं.

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