Yogesh Garg : एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार उसके साथ एक इंटरव्यू में अण्णा हजारे ने कहा है कि केजरीवाल को पैसे की तो नहीं, सत्ता की लालसा हो सकती है। पता नहीं, अण्णा ने यह बात इतने हिचकते और झिझकते हुए क्यों कही है। या ऐसा भी हो सकता है कि शब्द उनके हों और सोच किसी और की हो … अण्णा जी के बयान पर केजरीवाल शायद कोई टिप्पणी नही करेगें क्योंकि स्वयं अरविन्द केजरीवाल पहले ही कह चुके हैं कि अन्ना उनके पिता तुल्य हैं और उनकी किसी बात पर विरोधी टिप्पणी नहीं करेंगे । लेकिन राजनैतिक महत्वाकांक्षा पर केजरीवाल पर टिप्पणी कर रहे अन्ना जी से मैं एक सवाल जरूर पूछना चाहुंगा कि उनके साथी बाबा रामदेव गुजरात में किसी एक राजनैतिक दल का प्रचार किस राजनैतिक कारण से कर रहे हैं?
क्या अब भी अन्ना जी बाबा रामदेव को साथ लेकर, अपनी अन्तरात्मा से यह कह सकते हैं कि “अन्ना आन्दोलन अब सिर्फ एक सामाजिक आन्दोलन है जो किसी राजनैतिक पार्टी या उनके लोगों से नहीं जुड़ा है? आखिर केजरीवाल और रामदेव के लिये अन्ना जी के दोहरे मापदण्ड क्यों? एक आपके ही द्वारा दिये राजनैतिक विकल्प को मूर्त रुप दे रहा है और दूसरा मौजूदा पार्टी के लिये काम कर रहा है ऐसे मे सिर्फ केजरीवाल पर राजनैतिक महत्वाकांक्षा का आरोप लगाना कहां तक सही है ?
मेरी राय में केजरीवाल एक ठंडे दिमाग से सोच समझ कर फैसले करने वाले, सही समय पर कदम उठाने वाले और सही /बडा निशाना चुनने वाले हिम्म्ाती इंसान है जो लंबे समय तक गुपचुप काम करने और योजना बनाने की तथा संगठंन खडा करने की क्षमता रखते हैं.
उनकी ये सारी विशेष्ाताएं उनको नेता, राजनीतिक नेता बनाने के लिए काफी है. केजरीवाल ऐसे आदमी है जिन्होने देश की राजनीति के नियम बदल डाले. अब तक अडरवर्ल्ड क्राइम सरगनाओं की तरह भारतीय राजनीति में अलिखित और अघोषित नियम ये था कि कोई किसी के परिवार और व्यक्तिगत संपत्ति पर हमला नहीं करेगा … लेकिन केजरीवाल ने इस खेल के नियम बदल डाले … हर पार्टी की मुख्य ताकत और कमजोरी पर प्रहार किया।
दोनों प्रमुख पार्टियों के बेनामी चंदे और कारपोरेट सेक्टर से सांठगांठ को जनता के बीच ला दिया। दिखा दिया के ‘आम आदमी’ के नाम पर राजनीति करने वाली ये मौजुदा पार्टिया आम आदमी की कितनी परवाह करती है … पूंजीपति कम्पनियो की सरकार और विपक्षी पार्टियां एजेन्ट बनी हुई है और इनके फायदे के लिये काम करती है जिन्हे देश की जनता से कोई मतलब नही है। कल रिंलायस और मुकेश अंबानी पर हुआ केजरी’वार’ इसका उदाहरण था… आज सलमान खुर्शीद को उसी के घर मे सबक सिखाने निकले हैं …
यहां तक की मीडिया को भी अब शर्मिन्दगी महसूस होने लगी है कि जिन मुद्दों को आज केजरीवाल उठा रहे हैं, उन्हें मीडिया पहले क्यों दबाये बैठा था। मीडिया शीत निद्रा से जाग रहा है। सबसे बड़ी और सकारात्मक बात ये है कि मीडिया के जुझारु और खोजी पत्रकारों की हिम्मत बढने लगी है। अब ईमानदार आदमी अन्याय का विरोध करने से डरता नहीं है। वो जानता है उसे एक मंच मिल गया है अपनी आवाज बुलन्द करने का … वो मंच दिया है अरविन्द केजरीवाल ने।
केजरीवाल ने ये दिखा दिया है जनता के लिये राजनीति के सही मायने क्या है। लेकिन दिक्कत यह है कि चुनावी राजनीति में जनता वोट उनको नहीं देती जो सिर्फ दूसरों की बखिया उधेडने का हुनर और हिम्म्त रखते हैं। इसलिये ‘आम आदमी’ से देश का आम आदमी और भी अपेक्षाये रखता है… और उम्मीद है केजरीवाल हर अपेक्षाओ पर खरे उतरेगें
Mangopeople Aamadamee Neglect the comment of chouthi pass
Preety Singh ek ek shabd se sahmat hu … anna ji bhi test le rahe hain arvind ka.. lene dijiye … woh ise bhi pass kar lenge .. anna ji khud samarthan denge us din per afsos tab tak der na ho chuki ho :/
Digant Vora Dear Yogesh Garg .In my view, we have to confirm what Anna has exactly said and in which context. Because we can not fully trust NDTV report. We have to see real interview. As I fully agreed with you that if Anna has some doubt about AK, then Anna will speak loudly and clearly to all News channel not only on NDTV.
Snob Nrs yes i agree with u Yogesh Garg ji..
Dhiraj Bhardwaj रिलायंस पर ‘वार’ में केजरीवाल तो केवल मोहरे भर हैं.. शतरंज तो कोई और ही खेल रहा है..
Yogesh Garg धीरज जी आपकी बात मै समझ रहा हूं , पर्दे के पीछे चाले और मोहरे बदल रहे है लेकिन अभी जनता जोश में है। थोड़ा वक्त को भी वक्त दिजिये…
Dhiraj Bhardwaj जयपाल रेड्डी जी पुराने राजनेता हैं.. स्वच्छ छवि वाले भी हैं.. लेकिन उसी कांग्रेस से परेशान हैं आजकल, जिसने उन्हें खाना-खिलाना सिखाया.. अब शतरंज नहीं खेलें तो और क्या करें..?
Yogesh Garg इस शंतरज की बिसात मे फायदा जनता का ही है … जितने भी खुलासे हुये है वो इसी वजह से हुये है इन पार्टियो मे ईमानदार लोग भी है जिन्हे केजरीवाल ने एक मंच दे दिया
Dhiraj Bhardwaj आम आदमी तो फिर ठगा ही जा रहा है.. मुकेश-अनिल अंबानी, अनिल अग्रवाल, मित्तल, टाटा, जिंदल और भी न जाने कौन-कौन.. सब तो शतरंज ही खेल रहे हैं.. अब राजनेता भी उस खेल में शामिल हौ गए हैं.. क्या पता वो भी किसी के मोहरे हों..
Yogesh Garg धीरज जी हम राजनीति मे पिछले 65साल से ठगे ही गये है… जे पी के दौर मे भी उनके चेलो ने दगा दिया … लेकिन भरोसे से दुनिया चलती है … इस नैराश्य पूर्ण माहौल मे अरविन्द केजरीवाल पर कुछ लोगो को शंका हो सकती है … लेकिन मै अरविन्द जी का पूर्ण समर्थन करता हूं ।
Dhiraj Bhardwaj यानी अन्ना से ज्यादा भरोसेमंद ‘टीम अन्ना’ थी….?
योगेश गर्ग के फेसबुक वॉल से साभार.


