भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसने के लिए असरदार लोकपाल विधेयक लाने की मांग कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और उनकी टीम ने इस मुद्दे पर अब राजनीतिक दलों से सहयोग लेने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। अनशन के दौरान अपने मंच से नेताओं को भगाने वाले अन्ना के सहयोगियों ने राजनीतिक दलों से मुलाकात शुरू कर दी हैं। माना जा रहा है कि उन्हें समझ में आ गया है कि बिना राजनीतिक दलों को साथ लिए मजबूत लोकपाल विधेयक पास करवा पाना सिविल सोसायटी के लोगों के लिए संभव नहीं होगा। शुक्रवार को इस सिलसिले की शुरुआत करते हुए अन्ना के टीम के सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल, किरन बेदी और मनीष सिसोदिया ने देश की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की।
बेदी, केजरीवाल और सिसोदिया ने आडवाणी को लोकपाल विधेयक के मसौदे को लेकर संयुक्त ड्राफ्टिंग कमिटी में हुई बैठकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि लोकपाल बिल की मांग को लेकर जब 4 अप्रैल में जब अन्ना हजारे अनशन पर बैठे थे, तब उन्होंने अनशन से राजनीतिक दलों को दूर रखा था। यहां तक अनशन के दौरान उमा भारती जैसी नेता को मंच पर चढ़ने तक नहीं दिया गया था। शुक्रवार को हुई मुलाकात में इन लोगों ने आडवाणी को लोकपाल बिल पर सिविल सोसाइटी के मसौदे और सरकारी मसौदे पर अपने रुख की जानकारी दी।
आडवाणी से मुलाकात में शामिल किरन बेदी ने कहा कि यह बैठक बहुत उत्साहजनक रही। आडवाणी ने सहमति जताते हुए कहा कि देश को एक असरदार लोकपाल की जरूरत है। उन्होंने हमारी बात सुनी और गुजारिश कि हम बीजेपी के आला नेताओं के सामने एक विस्तृत ब्योरा पेश करें। सिसोदिया ने कहा कि हजारे और अन्य सदस्य बीजेपी के साथ बातचीत में शामिल होंगे। यह मुलाकात जुलाई के पहले सप्ताह के दौरान होगी। सरकार ने अगले महीने की शुरुआत में लोकपाल बिल पर सभी पार्टियों की मीटिंग बुलाई है।
सरकार से झटका खाने के बाद माना जा रहा है कि अन्ना और उनकी टीम मजबूत और असरदाल लोकपाल विधेयक को लागू कराने के लिए राजनीतिक पार्टियों के सहयोग का महत्व समझ में आ गया है। अन्ना उनके टीम के सदस्यों ने पहले ही ऐलान किया है कि वे लोकपाल बिल पर राय बनाने तथा असरदार लोकपाल विधेयक को संसद में पास कराने के लिए सभी राजनीतिक पार्टी से मुलाकात कर अपनी बात उनके सामने रखेंगे।


