भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत लोकपाल बिल ड्राफ्ट के लिए अनशन करने जा रहे गांधीवादी कार्यकर्ता अन्ना हजारे एवं उनके सहयोगियों की मयूर विहार से गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है. दिल्ली पुलिस ने अन्ना को गिरफ्तार करने के बाद अन्ना एवं उनके सहयोगियों को सिविल लाइंस स्थित जीओएस मेस से छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया है. इसके बाद देश के सभी भागों में लोग अन्ना के पक्ष में सड़कों पर उतर आए हैं. संसद में भी अन्ना की गिरफ्तारी के विरोध में हंगामा हुआ. भाजपा समेत विपक्षी दलों ने संसद में जमकर हंगामा किया, जिसके बाद सदन बारह बजे तक स्थगित कर दिया गया.
अन्ना हजारे, अरविंद केजरीवाल, किरन बेदी, शांति भूषण एवं मनीष सिसौदिया को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. गृह सचिव आरके सिंह ने बताया कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने की मंशा रखने के आरोप में अन्ना एवं उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया है. अन्ना ने हिरासत में लिए जाने के बाद ही अपना भूख हड़ताल शुरू कर दिया. पहले बताया गया था कि अन्ना एवं उनकी टीम को हिरासत में लिए गया है, परन्तु अब बताया जा रहा है कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया है.
इन लोगों को गिरफ्तार करने के बाद सिविल लाइंस से छत्रसाल स्टेडियल ले जाया गया है. दिल्ली पुलिस की ओर से गठित स्पेशल कोर्ट में इन लोगों की पेशी की जाएगी. उसके पहले सभी की मेडिकल जांच कराई जाएगी. हालांकि टीम अन्ना ने कहा है कि वो जमानत लेने का कोई प्रयास नहीं करेगी. इन लोगों का अनशन जेल में भी जारी रहेगा. दूसरी तरफ अन्ना की टीम के सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा है कि वे अन्ना और उनके सहयोगियों को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे.
प्रशांत भूषण ने कहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने बताया कि बुधवार को शाम चार बजे इंडिया गेट से संसद भवन तक मार्च निकाला जाएगा. उन्होंने लोगों से अपील की है कि इसमें ज्यादा से ज्यादा लोग हिस्सा लें. दूसरी तरफ स्वामी अग्निवेश एवं जस्टिस संतोष हेगड़े ने भी अन्ना और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए इसे असंवैधानिक कदम बताया है. इस मसले को लेकर पीएम मनमोहन सिंह ने कैबिनेट की मीटिंग बुलाई है. एनडीए भी इस मसले पर बैठक कर रही है.
अन्ना को पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार इलाके में स्थित सुप्रीम इन्क्लेव से उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब वे जेपी पार्क पहुंचने की तैयारी में थे. अन्ना एवं अरिवंद केजरीवाल को हिरासत में लेकर अलग अलग गाडि़यों से सिविल लाइंस जोओएस मेस ले जाया गया. अन्ना के अनेक समर्थकों को भी धारा 144 का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.
अन्ना की गिरफ्तारी को लेकर लोकसभा में भी भाजपा समेत विपक्षी सदस्यों ने हंगामा काटा, जिसके कारण सदन को बारह बजे तक स्थगित कर दिया गया है. सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि उन्हें अन्ना हजारे की गिरफ्तारी के संबंध में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, कम्युनिस्ट गुरूदास दासगुप्ता, मार्क्सवादी वासुदेव आचार्य और सपा के शैलेंद्र कुमार सहित कुछ सदस्यों के कार्य स्थगन प्रस्ताव के नोटिस मिले हैं तथा जदयू के शरद यादव ने देश में भ्रष्टाचार की स्थिति के बारे में प्रश्नकाल को स्थगित करने का नोटिस दिया है.
मीरा कुमार ने कहा कि संसदीय कार्यवाही में इस प्रकार के नोटिस पर कार्य स्थगन का कोई आधार नहीं बनता है, इसलिए सभी नोटिस खारिज किए जा रहे हैं. परन्तु विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज अपने विचार रख सकती हैं. उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल भी चलेगा जिसमें बाकी सदस्य संक्षेप में अपनी बात कह सकते हैं. संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि सरकार 12 बजे अन्ना हजारे के मसले पर चर्चा कराने को तैयार है. बंसल ने कहा कि केवल सुषमा के अपनी बात रखने से काम नहीं चलेगा और बाकी सदस्य भी अपनी बात रखना चाहेंगे और इसके बाद गृह मंत्री पी चिदम्बरम भी अपनी बात रखेंगे.
उधर, अन्ना की गिरफ्तारी का भारी विरोध करते हुए विपक्ष के राज्यसभा में हंगामे के कारण सदन की बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. सदन की बैठक शुरू होते ही विपक्ष ने हजारे की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाना चाहा जबकि सत्ता पक्ष के सदस्य प्रश्नकाल चलने देने की मांग करने लगे. हंगामे के बीच सभापति हामिद अंसारी ने विपक्ष के नेता अरूण जेटली को अपनी बात कहने का मौका दिया, लेकिन जेटली के खड़ा होते ही हंगाम शुरू हो गया, जिसके बाद सदन स्थगित कर दिया गया.
दूसरी तरफ दिल्ली समेत पूरे देश में अन्ना की गिरफ्तारी के विरोध में आम नागरिक और उनके समर्थक सड़क पर उतर आए हैं. दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, पटना, देहरादून समेत तमाम प्रदेशों की राजधानियों और दूसरे शहरों में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गया है. यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, हिमाचल, राजस्थान, एमपी, सीजी, उत्तराखंड समेत अनेक राज्यों में लोग अन्ना के पक्ष में खड़े हो गए हैं.


