Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रदेश

अपने बयानों से क्‍या साबित करना चाहते हैं दिग्विजय सिंह?

श्रीमान दिग्विजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश, वर्तमान में महासचिव अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और स्वयंभू राजनीतिक गुरु राहुल गांधी, एक बहुचर्चित राजनीतिक चेहरा, हर तीसरे दिन मीडिया में छाया रहता है। दरअसल ठाकुर साहब राजनीति के खेल के एक मंझे हुए खिलाड़ी माने जाते रहे हैं और उन्हें मालूम है कि राजनीतिक गलियारों और जनता के बीच अपनी पहचान बनाये रखने के लिए किस प्रकार के हथकडों का उपयोग किया जा सकता है। श्री सिंह का कोई भी बयान हलचल पैदा करने और विवाद उभारने से ज्यादा कुछ भी नहीं माना जाता। कहने वाले तो यहां तक कहते हैं कि राहुल गांधी द्वारा की जा रही सारी मेहनत और कवायद को बार-बार बेकार करवाने की जिम्मेवारी भी दिग्विजय सिंह साहब की ही साबित होती है।

श्रीमान दिग्विजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश, वर्तमान में महासचिव अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और स्वयंभू राजनीतिक गुरु राहुल गांधी, एक बहुचर्चित राजनीतिक चेहरा, हर तीसरे दिन मीडिया में छाया रहता है। दरअसल ठाकुर साहब राजनीति के खेल के एक मंझे हुए खिलाड़ी माने जाते रहे हैं और उन्हें मालूम है कि राजनीतिक गलियारों और जनता के बीच अपनी पहचान बनाये रखने के लिए किस प्रकार के हथकडों का उपयोग किया जा सकता है। श्री सिंह का कोई भी बयान हलचल पैदा करने और विवाद उभारने से ज्यादा कुछ भी नहीं माना जाता। कहने वाले तो यहां तक कहते हैं कि राहुल गांधी द्वारा की जा रही सारी मेहनत और कवायद को बार-बार बेकार करवाने की जिम्मेवारी भी दिग्विजय सिंह साहब की ही साबित होती है।
बिना तथ्यों एवं सबूतों के वे राहुल गांधी से इस प्रकार के विवादास्पद बयान दिलवा देते हैं कि फिर पूरी कांग्रेस पार्टी को जवाब देना मुश्किल हो जाता है। दिग्विजय सिंह को महारत हासिल है किसी भी विषय या कांड पर अपनी विवादास्पद टिप्पणी प्रस्तुत करने की। दुनिया में शायद ही कोई विषय या समस्या होगी जिस पर सिंह साहब अपने विचार प्रस्तुत न करते हों। बटला हाउस कांड हो या भट्टा पारसौल का मामला, समझौता एक्सप्रेस कांड, अजमेर ब्लास्ट कांड और अभी का मुम्बई ब्लास्ट कांड, जनाब ठाकुर दिग्विजय सिंह जी महाराज की टिप्पणियां आतंकवाद को हिन्दू आतंकवाद या मुस्लिम आतंकवाद में बांट देने की कोशिश मात्र होती है। यहां तक कि कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता को मीडिया के सामने आकर कहना पड़ता है (बार-बार, हर बार)  कि यह बयान या विचार दिग्विजय जी के अपने विचार हैं और कांग्रेस का इन बयानों से कोई लेना-देना नहीं है। माफ कीजिएगा प्रवक्ता जी, दिग्विजय सिंह के निजी विचार जानने मीडिया उनके पास नहीं जाता बल्कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह के विचार जानने जाता है और अगर पार्टी उन विचारों से सहमत नहीं होती तो फिर उन्हें पार्टी के महासचिव पद से मुक्त क्यों नहीं कर देती।

हैरानी की बात तो ये है कि जो व्यक्ति मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री रह चुका है किसी भी कारणवश उसके नेतृत्व में पार्टी उस प्रदेश से हाथ धो बैठी है तो उस व्यक्ति को उसी प्रदेश में काम करके दोबारा उस प्रदेश को अपनी पार्टी के लिए जीतने की ललक क्यों नहीं होती। क्यों नहीं पार्टी ने भी उन्हें प्रदेश के दोबारा जीतने की जिम्मेवारी सौंपी। गौरतलब है कि राजस्थान में भी अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता से बेदखल हो गई थी मगर अशोक गहलोत ने और अनेक जिम्मेवारियां निभाते हुए भी राजस्थान में जी जान से मेहनत करी और एक बार फिर राजस्थान में कांग्रेस की विजय पताका फहराई। मगर दिग्गी राजा तो एक लड़ाई हारते ही प्रदेश को पीठ दिखा कर, कुर्बानी के दिखावटी परदे में छिपकर, 10 साल के लिए कोई पद ना ग्रहण करने की बात करके, मैदान छोड़ कर भाग खड़े हुए। अच्छा तो होता कि राजा साहब अपनी प्रजा को मंझधार में छोड़ कर चले जाने की बजाये उनके सुख दुख में भागीदार बनकर सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाते और प्रदेश को फिर से जीत कर दिखाते, फिर चाहे पद ग्रहण करने से इंकार कर देते।

जनाब ठाकुर साहब छोटे से प्रदेश को हारकर एक विशाल प्रदेश को जीतने निकल पड़े, वह भी युवा शक्ति के प्रतीक राहुल गांधी के स्वयंभू राजनीतिक सलाहकार बन कर। मेरा तो मन डरता है कि कहीं ठाकुर दिग्विजय सिंह उर्फ दिग्गी राजा भी स्व. वी.पी. सिंह की राह पर तो नहीं चल पड़े हैं। देश और पार्टी के लिए एक वी.पी. सिंह ही बहुत साबित हुए हैं। आदरणीय दिग्विजय सिंह का भाजपा-संघ के प्रति रवैया भी समझ से परे है। जब वे मुख्यमंत्री होते हैं तो भाजपा के नेतृत्व वाली एन.डी.ए. सरकार की राष्ट्रीय कार्यकारिणी को अपने प्रदेश में भोज पर आमंत्रित करते हैं मगर सत्ता से हटते ही हर बुराई के लिए भाजपा-संघ को बीच में घसीट लाते हैं। एक तरफ दिग्गी राजा अनेकानेक आतंकवादी गतिविधियों और बम विस्फोटों के पीछे भगवा आतंकवाद का हाथ बताते हुए संघ को निशाना बनाते हैं वहीं दूसरी और 17 जुलाई को इन्दौर में भाषाई पत्रकारिता समारोह में आर.एस.एस. के प्रबल समर्थक, सांसद सुमित्रा महाजन और डॉ. मुरली मनोहर जोशी को गुरु जी और ताई जी कहते हुए उनकी तारीफों के पुल बांधने से नहीं अघाते।

उज्जैन पहुंचते ही वह फिर भाजपा कार्यकर्ताओं से एक सड़क छाप नेता की तरह का व्यवहार करते हुए हाथापाई करने लगते हैं। ऐसा भी नहीं है, कि उनके इस प्रकार के व्यवहार की सूचना राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को नहीं मिलती होगी मगर न जाने क्यूं दिग्जिवय सिंह के अजीबो-गरीब व्यवहार पर कोई लगाम कसती नजर नहीं आती। 125 साल पुरानी कांग्रेस अपनी सकारात्मक राजनीति के लिए पहचानी जाती है और अगर उसके कोई महासचिव नकारात्मक राजनीति करते हुए अपना विवादास्पद व्यवहार बनाये रखते हैं तो कम से कम देश के उज्ज्‍वल भविष्य, युवा नेता राहुल गांधी को तो उनसे दूरी ही बनाये रखनी चाहिए। बाकी दिग्गी राजा की सोच कहां तक व्यवहारिक है वो या तो राम जाने या स्वयं दिग्गी राजा यानी कि ठाकुर दिग्विजय सिंह।

लेखक विजय मोहन हिंदी दैनिक राष्‍ट्रीय विश्‍वास के प्रधान संपादक हैं.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...