2जी घोटाले में तिहाड़ जेल में कैद पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. राजा ने अपना मुंह खोल दिया है. उन्होंने मनमोहन सिंह और पी. चिदंबरम को असली घोटालेबाज बताया. देश को पौने दो लाख करोड़ रुपए का चूना लगाने के आरोपी ए. राजा ने सीबीआई के विशेष जज ओपी सैनी की अदालत में खुद को बेगुनाह बताया. उन्होंने कहा कि अगर वे दोषी हैं तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम उनसे बड़े दोषी हैं.
47 साल के डीएमके सांसद राजा ने साफ कहा कि शेयर बेचने और लाइसेंस बेचने में अंतर है. अगर शेयर बेचे जाते हैं तो इसका ये मतलब नहीं लगाया जा सकता कि लाइसेंस बेच दिया गया. स्पेक्ट्रम का लाइसेंस पाने वाली कंपनियों के शेयर बेचने का मुद्दा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बीच उठा था. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री के सामने ही ये बोला था कि कॉरपोरेट कानून के मुताबिक शेयरों को बेचने का ये अर्थ नहीं है कि 2जी लाइसेंस बेचा जा रहा हो. उसी के बाद वित्तमंत्री की हैसियत से चिदंबरम ने यूनीटेक वायरलेस की हिस्सेदारी टेलीनॉर और डीबी रियलटी की हिस्सेदारी एटिसालेट को बेचने की मंजूरी दी थी. राजा ने अदालत से कहा कि अगर प्रधानमंत्री इस बातचीत से मुकरना चाहें तो वो शौक से ऐसा कर सकते हैं, लेकिन ये बात तो उनकी मौजूदगी में ही की गई थी. ये पहला मौका है जब राजा ने भरी अदालत में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम पर ऐसे आरोप लगाए.
राजा ने कहा कि अगर शेयरों की बिक्री को लाइसेंस की बिक्री नहीं समझा जा सकता तो फिर इसमें मुनाफा कमाने की बात कैसे कही जा सकती है? तब फिर आखिर इसमें भ्रष्टाचार कहां से आ गया? अगर मैंने गलत किया तो 1993 के बाद के सभी दूरसंचार मंत्रियों को मेरे साथ जेल में होना चाहिए. टेलीकॉम मंत्री बतौर अरुण शौरी ने 26, दयानिधि मारन ने 25 और मैंने 122 लाइसेंस दिए. संख्या मायने नहीं रखती, गौर करने की बात ये है कि उन्होंने भी स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं की. जब उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया तो फिर मुझसे सवाल जवाब क्यों किए जा रहे हैं.
राजा के वकील सुशील कुमार जैसे-जैसे अदालत में अपने मुवक्किल की बातें रख रहे थे, सब लोग सन्न होते जा रहे थे. राजा होमवर्क के साथ अदालत में आए थे. उन्होंने ये साबित करने की कोशिश की कि उन्होंने भ्रष्टाचार नहीं किया बल्कि सरकारी नीतियों का पालन किया. अगर सरकारी नीतियों में खोट है तो फिर वो अकेले क्यों तिहाड़ में रहें. राजा ने यहां तक कहा कि आप लोग तो मेरे पीछे पड़े हैं, मुझे तो आपको दरअसल इनाम देना चाहिए.
राजा ने कहा कि मैं 2003 के मंत्रिमंडल के फैसले का पालन कर रहा था, जिसमें साफ कहा गया था कि 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं की जाएगी. यदि मैंने कानून का पालन किया तो मेरे खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए बल्कि मुझे इनाम दिया जाना चाहिए. राजा ने टाटा पर नरमी बरतने का आरोप भी मढ़ा. 13,973 करोड़ के टाटा-डोकोमो डील पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर इस डील की जांच क्यों नहीं की जा रही? क्यों केवल शाहिद बलवा और संजय चंद्रा को निशाना बनाया जा रहा है? राजा ने 2 जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस में नुकसान का आकलन करने पर सीबीआई की काबलियत पर भी सवाल खड़े किए.
साफ कहा कि सीबीआई नुकसान की बात कहने वाली कौन होती है, सरकार खुद ये बात क्यों नहीं कहती? प्रधानमंत्री और टेलीकॉम मंत्री ने संसद में कभी नहीं कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन प्रक्रिया से देश को नुकसान हुआ. राजा ने कहा कि मंत्री पद पर रहते हुए मैंने सामाजिक न्याय का ध्यान रखा. मैं जनसेवक हूं लिहाजा मैंने कोशिश की कि राह चलता हर इंसान मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर सके. मैंने मोबाइल कॉल रेट सस्ते करवा दिए ताकि रिक्शावाला या नौकरानी भी मोबाइल का इस्तेमाल कर सके.


