: आपके मोबाइल फोन पर है किसकी नजर : पिछले मई महीने में संसद में फोन टैपिंग का मामला छाया रहा। वहीं इस महीने सरकार की पेशानी पर उस समय बल पड़ गए जब उसे खबर मिली कि वित्त मंत्रालय भी फोन टैपिंग के दायरे में था। ऐसे में अगर आपके दिमाग में यह विचार आ जाए कि कहीं आपका फोन भी टेप तो नहीं किया जा रहा है तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं होगी। वैसे देश में किसी के फोन को टेप करके सुनना अवैध है लेकिन लैंडलाइन को टैप करना आसान है। वास्तव में अगर आपने अपने घर में एक फोन का विस्तार कर दूसरा फोन लगाया है तो तकनीकी रूप से आप अपनी ही फोन लाइन को टेप कर रहे हैं।
आपकी फोन लाइन में हरा (पॉजिटिव) और लाल (निगेटिव) तांबे का तार लगा होता है जिससे एक सर्कि ट बनता है। यह तार ध्वनि की तरंगों को एक विद्युत तरंग के रूप में संचारित करता है जिसे एक फोन कंपनी तार के जरिये भेजती है जो फोन के स्पीकर और माइक्रोफोन से जुड़ा रहता है। इस सर्किट बोर्ड के साथ एक नया तार जोडऩा आसान होता है।
हालांकि आधुनिक तकनीक की मौजूदा दुनिया में यह तरीका बेहद पुराना है। लेकिन छिपकर बातें सुनने वाले लोग अब ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं जिसमें छोटे माइक्रोफोन लगे होते हैं जो ध्वनि की तरंगों को सीधे तौर पर ग्रहण करते हैं। जो लोग आप पर निगाह रख रहे होंगे वे आपके आसपास रेडियो रिसीवर लगा सकते हैं जो सिग्नल पकड़ता है और इसे स्पीकर पर भेजता है या किसी टेप पर इनकोड करता है।
टैपिंग के उपकरण : आजकल ‘अकाउस्टिक बग’ भी मिलते हैं जिन्हें पानी के एक ग्लास में, खिड़की और रोशनदान आदि के आसपास रखा जा सकता है जहां से आवाज बाहर जा सकती है। अल्ट्रासॉनिक या वीएलएफ बग एक ऐसी तकनीक है जिसका इस्तेमाल आवाज को ध्वनि सिग्नल में तब्दील करने के लिए किया जाता है जो आदमी की श्रवण शक्ति के दायरे से बाहर होता है। वहीं आरएफ बग (रेडियो फ्रीक्वेंसी) आवाज को टेप करने वाला मशहूर उपकरण है जिसमें रेडियो ट्रांसमीटर को किसी क्षेत्र या एक उपकरण में रखा जाता है। एक ऑप्टिकल बग ध्वनि को ऑप्टिकल पल्स या रोशनी की किरणों में तब्दील कर देता है। इसका इस्तेमाल बेहद कम होता है और यह महंगा भी है। इसके साथ बड़ी दिक्कत यह भी है कि इसे आसानी से पहचाना जा सकता है।
कंपनियां जासूसी करने वाले सॉफ्टवेयर मसलन ‘अल्टीमेट ब्लूटूथ मोबाइल फोन स्पाई 2010’ बेचती हैं जिसके जरिये आप किसी की कॉल को सुन सकते हैं और एसएमएस भी पढ़ सकते हैं। अगर आपके पास सुनने वाले उपकरण मसलन ‘बॉयोनिक इयर विद बूस्टर’ है तो आप दूर से आ रही खराब आवाज को भी स्पष्ट सुन पाएंगे। वहीं ‘डिटेक्ट इयर पाराबोलिक माइक्रोफोन सिस्टम’ से आप 300 गज दूर होने पर भी बातचीत बेहद साफ सुन पाएंगे।
आप फोन पर फ्लेक्सीस्पाई सॉफ्टवेयर भी डाउनलोड कर सकते हैं। यह सॉफ्टवेयर सभी मौजूद डाटा को संग्रह करता है और यह आपके वेब अकाउंट पर भेज देता है जिसे आप देख सकते हैं। यह सॉफ्टवेयर किसी विशेष नंबर से आने वाली इनकमिंग कॉल पर भी नजर रखता है और यह फोन को धीरे से स्विच ऑन कर देता है ताकि आप आसपास की बातचीत या फोन कॉल सुन सकें। दूसरे उपकरण, स्पाईबबल सेल फोन स्पाइंग सॉफ्टवेयर भी डाउनलोड किया जा सकता है जिसकी कीमत करीब 2,690 रुपये है।
इस उपकरण से आप लाइव कॉल रोक सकते हैं, इनकमिंग और आउटगोइंग कॉल को रिकॉर्ड कर सकते हैं, टेक्स्ट मैसेज देखा जा सकता है और रिकॉर्डेड मोबाइल फोन को भी रिमोट सर्वर पर स्टोर करने के लिए ट्रांसफर किया जा सकता है। इंटरनेट पर डाटा पैकेट को भी सरकार पैकेट स्निफर्स का इस्तेमाल कर बाधित कर सकती है या उस पर निगाह रख सकती है। इसका अंदाजा सबको होगा कि सभी मोबाइल ग्राहकों की फोन पर हुई बातचीत को कम से कम 7 दिन के लिए रिकॉर्ड किया जाता है और इसे बनाए रखा जाता है।
ऐसा विशेष तौर पर आंतकवादियों और असमाजिक तत्वों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न कम्युनिकेशन चैनलों पर निगाह रखने के लिए किया जाता है। थर्ड जेनेरेशन (3जी) फोन को ट्रैक करना अब और भी आसान है क्योंकि बेस स्टेशन अब आसपास ही होते हैं। मोबाइल फोन का सबसे बड़ा खतरा यह भी है कि इससे कम्युनिकेशन डाटा के संग्रह जिसमें न केवल फोन कॉल के समय, बातचीत की अवधि, फोन करने वाले और रिसीव करने वालों की सूचना होती है बल्कि इसमें उस बेस स्टेशन की पहचान भी की जाती है जहां से कॉल आ रही है।
एक सरकारी एजेंसी एक वॉयरटैप के साथ-साथ कॉल ब्योरा, एसएमएस और दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों से दूसरी सेवाओं के इस्तेमाल के लिए निवेदन कर सकती है। इस बातचीत को रिकॉर्ड किया जाता है और इसे एक कम्युनिकेशंस इंटरसेप्शन सिस्टम का इस्तेमाल कर एक फॉर्मेट में रखा जाता है। इस ब्योरे को एक सर्वर पर स्टोर किया जाता है और बाद में कोई एजेंसी जांच करने के लिए इसे उठा सकती है।
सिक्लोर टेक्नोलॉजी के सीईओ विशाल गुप्ता का कहना है, ‘अगर डिजिटल सूचनाओं की चोरी हो जाती है या किसी अवांछित तत्वों तक यह लीक हो जाती है तो जवाबदेही के अभाव में विभिन्न एजेंसियों और दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों के बीच एक-दूसरे पर दोषारोपण का खेल शुरू हो जाता है।’ सिक्लोर दूरसंचार ऑपरेटर और कॉरपोरेट के साथ काम करता है जो उनके डाटा को आउटसोर्स कर थर्ड पार्टी वेंडर को देता है ताकि साझा किए गए डाटा का अवैध इस्तेमाल न किया जा सके।
हाल में फोन टैपिंग की जो घटनाएं हुई हैं, उनके मद्देनजर सरकार ने सूचना प्रोद्यौगिकी कानून में संशोधन कर डाटा की सुरक्षा और उसकी गोपनीयता को सुनिश्चित करने में फुर्ती दिखाई है। नए कानून के मुताबिक कोई भी कंपनी जिसके पास संवेदनशील व्यक्तिगत डाटा या सूचनाएं हैं, उसे निर्धारित अवधि से ज्यादा दिन तक नहीं रखा सकती है और थर्ड पार्टी जिसे इस कॉरपोरेट कंपनी की ओर से संवेदनशील व्यक्तिगत डाटा या सूचनाएं मिल रही हैं, इसका खुलासा नहीं कर सकती हैं।
कैसे रुके टैपिंग : हालांकि फोन टैपिंग के खतरे को रोकने के भी तरीके हैं। मिसाल के तौर पर एक अत्याधुनिक तकनीक वाले ‘फ्रीक्वेंसी फाइंडर बग डिटेक्टर’ फोन टैपिंग, छिपे हुए कैमरे, छुपकर बातचीत सुनने वाले उपकरण या बग, जीपीएस ट्रैकर, सेलफोन बग और रुम बग की पहचान आसानी से कर सकते हैं। एक आरएफ टेलीफोन एनालाइजर आपको तुरंत ही सतर्क रहने का संकेत दे सकता है, अगर आपके टेलीफोन लाइन में कोई वॉयरटैप है या जब आप बातचीत कर रहे हों तो कोई आपकी बात छुपकर सुन रहा हो।
बिजनेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित लेस्ली डिमोंटी और प्रियंका जोशी की रिपोर्ट


