मार्कंडेय काटजू ने शुक्रवार को पटना में कहा कि नीतीश ने जनता का विश्वास खो दिया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना व शिवसेना के नेताओं को देशद्रोही करार देते हुए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन ने कहा कि इन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। काटजू ने कहा कि नीतीश सरकार ने अपने पहले पांच साल के कार्यकाल में अपराध को नियंत्रित किया, लेकिन हाल के दिनों में बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने इस शासन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। लोगों में सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री को इसी कारण अपनी अधिकार यात्रा बीच में ही रद करनी पड़ी। मुख्यमंत्री इस बात पर आत्ममंथन करें कि लोगों के आक्रोश का असली कारण क्या था? क्यों जहां-तहां उनका विरोध हुआ है?
काटजू ने जेपी की दुहाई देते हुए पूछा-आप कैसे शिष्य हैं। कहां है जेपी का जातिविहीन समाज। कहां गलत रास्ते पर चले गए। क्यों आपका इतना विरोध हो रहा है। सवालों की झड़ी लगाते हुए काटजू ने कहा- मुख्यमंत्रीजी आप आत्मनिरीक्षण कीजिए। आत्म आलोचना कीजिए। नीतीश कुमार को सावधान करते हुए काटजू ने कहा- घनानंद का क्या हश्र हुआ, सभी जानते हैं। आप घनानंद मत हो जाइए। मुसीबत हो जाएगी।
काटजू के अनुसार गुजरात के विकास मॉडल का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। यह मॉडल समाज की बेहतरी के लिए नहीं है। इसका सबसे बड़ा सबूत गुजरात में राष्ट्रीय औसत से अधिक कुपोषण दर का होना है। 46 के राष्ट्रीय औसत की जगह वहां कुपोषण की दर 47 है। मनसे व शिवसेना की चर्चा करते हुए बोले कि ये अन्य राज्यों से आकर बसने वालों के खिलाफ मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में नफरत फैला रहे हैं, उन्हें भगाने की कोशिश कर रहे हैं। संविधान की धारा 19 (1) (ई) किसी भी भारतीय नागरिक को देश के किसी भी भाग में बसने की इजाजत देती है। नागरिकों के इस बुनियादी अधिकार को चुनौती देने वाले मनसे व शिवसेना के नेता या कोई भी व्यक्ति देशद्रोही है। इन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
काटजू ने एक कार्यक्रम में नीतीश कुमार का नाम लिए बिना कहा, ‘मुख्यमंत्री लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में विफल रहे हैं। लोगों का भरोसा उन पर से उठ चुका है। इसलिए अधिकार यात्रा कार्यक्रम के दौरान बडे़ पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।’
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कहा, ‘बड़े पैमाने पर लोग अधिकार यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखा रहे हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसका मतलब यह है कि सत्ता में आने के बाद 7 साल के कार्यकाल में वह विकास, रोजगार और बिजली उपलब्ध कराने के अपने वादे को पूरा नहीं कर पाए हैं।’
उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन इतने जोरदार हुए कि मुख्यमंत्री को अपनी अधिकार यात्रा बीच में ही रोकनी पड़ी। मुख्यमंत्री की सभाओं में आम लोगों से ज्यादा संख्या पुलिसकर्मियों की थी। सुरक्षाबलों की भारी तैनाती इस बात का संकेत है कि जिस जनता ने नीतीश कुमार को दोबारा सत्ता में लाया, वह उसी से डरने लगे हैं।
नीतीश की अधिकार यात्रा के दौरान हुए विरोध पर काटजू ने कहा- इतना विरोध हो रहा है कि अपनी यात्रा बीच में छोड़ दिए। आधी फील्ड में पुलिसवाले रहते हैं तो जनता कहां खड़ी होगी। काटजू ने नीतीश से पूछा-क्या आप जनता से डरते हैं? क्या जनता से कट गए हैं? प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष शुक्रवार को पटना के होटल चाणक्या में सेंटर फॉर सोशल रिस्पांसिबिलिटी एंड लीडरशिप यानि सीएसआरएल की ओर से ”टेल्स ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन, अभयानंद सुपर 30” नामक पुस्तक का विमोचन करने के बाद संबोधन कर रहे थे। अभयानंद कार्यक्रम शुरू होते ही हॉल से निकल गए थे। काटजू के संबोधन के दौरान हॉल में मौजूद कई आईपीएस अधिकारी अपना चेहरा बचाकर निकल लिए। जबकि कांग्रेसी दिगगज एलपी शाही, पूर्व मंत्री विश्वमोहन शर्मा और वीणा शाही के चेहरे खिल उठे।


