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आम लोगों से पैसे वसूल कर अनाप-शनाप खर्च कर रहा है बिहार विद्युत बोर्ड

: बिजली आपूर्ति में कोई सुधार नहीं : बिहार शरीफ : बिहार में लालू-राबड़ी राज का भय दिखाकर दूसरी बार रिकार्ड बहुमत से बनी नीतीश सरकार कई मोर्चो पर बुरी तरह लाप साबित हुई है। मिसाल के तौर पर बिजली समस्या है। नीतीश कुमार बार-बार विद्युत समस्या के बारे में रटा-रटाया जबाव देते हैं कि मेरे पास जादू की कोई छड़ी नहीं है, जो कि घुमाया और समस्या दूर हो गई। नीतीश कुमार अपने पूर्ववर्ती सरकार पर दोष मढ़ने से बाज नहीं आते हैं, व्यवस्था को पिछली सरकार ने चौपट कर दिया, परन्तु हकीकत कुछ और ही है। नीतीश सरकार के गठन हुए 6 साल से अधिक हो गये, इस दौरान टुकड़ों-टुकड़ों में कई बार बिजली बिल बढ़ाया गया। कभी ऊर्जा अधिभार के नाम पर, तो कभी सामाग्री खरीद के नाम पर। उपभोक्ताओं की जेब ढीली हुयी, परन्तु बिजली समस्या जस की तस बनी रही। जनता की गाढ़ी कमाई से वसूली गई राशि को विभाग गैर जरुरत मदों में खर्च कर रही हैं। प्रतिदिन विभिन्न समाचार पत्रों में लाखों रुपये का विज्ञापन देकर गलत आँकड़ा प्रस्तुत कर रही है कि अमुक-अमुक जिले में इतना घंटा विद्युत आपूर्ति की गई, परन्तु सच्चाई कुछ और ही है।

: बिजली आपूर्ति में कोई सुधार नहीं : बिहार शरीफ : बिहार में लालू-राबड़ी राज का भय दिखाकर दूसरी बार रिकार्ड बहुमत से बनी नीतीश सरकार कई मोर्चो पर बुरी तरह लाप साबित हुई है। मिसाल के तौर पर बिजली समस्या है। नीतीश कुमार बार-बार विद्युत समस्या के बारे में रटा-रटाया जबाव देते हैं कि मेरे पास जादू की कोई छड़ी नहीं है, जो कि घुमाया और समस्या दूर हो गई। नीतीश कुमार अपने पूर्ववर्ती सरकार पर दोष मढ़ने से बाज नहीं आते हैं, व्यवस्था को पिछली सरकार ने चौपट कर दिया, परन्तु हकीकत कुछ और ही है। नीतीश सरकार के गठन हुए 6 साल से अधिक हो गये, इस दौरान टुकड़ों-टुकड़ों में कई बार बिजली बिल बढ़ाया गया। कभी ऊर्जा अधिभार के नाम पर, तो कभी सामाग्री खरीद के नाम पर। उपभोक्ताओं की जेब ढीली हुयी, परन्तु बिजली समस्या जस की तस बनी रही। जनता की गाढ़ी कमाई से वसूली गई राशि को विभाग गैर जरुरत मदों में खर्च कर रही हैं। प्रतिदिन विभिन्न समाचार पत्रों में लाखों रुपये का विज्ञापन देकर गलत आँकड़ा प्रस्तुत कर रही है कि अमुक-अमुक जिले में इतना घंटा विद्युत आपूर्ति की गई, परन्तु सच्चाई कुछ और ही है।

विद्युत बोर्ड के दावा में हकीकत यही है कि जिले के वरीय अधिकारियों के आवासों में 24 घंटे बिजली है, परंतु बाहर की जनता को दावा के विपरीत आधी से भी कम बिजली मिलती है। विद्युत  विभाग की दूसरी फिजूल खर्च का एक नमूना यह है कि प्रत्येक ट्रांसफारमर पर एक मीटर लगाया गया है, जिस पर भी विभाग ने लाखों रुपये खर्च किया है। विद्युत विभाग ने व्यवस्था में कोई सुधार नहीं किया है, मामूली से हवा चलने पर विद्युत चली जाती है। तार जर्जर हालत में है। आए दिन मनुष्य व जानवरों की मौत गिरे हुए तारों के स्‍पर्श से हो रही हैं। अगर किसी उपभोक्ता का पोल से लाइन खराब हो जाता है, तो दर्जनों बार आँफिस का चक्कर लगाने के बाद भी नहीं बन पाता है। नीतीश का यह कहना भी सही है कि पूर्ववर्ती सरकार ने विद्युत उत्पादन हेतु कोई भी नई इकाई नहीं लगायी, परन्तु वर्तमान नीतीश सरकार ने व्यवस्था को सुधारने हेतु क्या किया। प्रत्येक माह कर्मचारी तथा विद्युत मिस्त्री रिटायर हो रहे हैं, नई बहाली नहीं की जा रही है। चार दर्जन ट्रांसफारमर पर दो मिस्त्री तैनात हैं। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि विद्युत सप्लाई में कही खराबी आ जाने पर ठीक करने में कितना समय लगता होगा।

नीतीश सरकार ने व्यवस्था सुधारने की दिशा में कोई उपाय नहीं किया, मात्र पूर्ववर्ती सरकार पर आरोप लगाने के। कुव्यवस्था के कारण ट्रांसफारमर जलने की घटनाएँ आम हो गई हैं। विभागीय पदाधिकारी व कर्मचारी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे है। ट्रांसफारमर जलने से इन कर्मीयों की जेब गर्म होती रहती है, चाहे विभाग को चूना क्यों नहीं लगें हो। विभाग के नियमानुसार नजदीक पड़ने वाले पोल से उपभोक्ता को विधुत आपूर्ति की जाती है। नियमानुसार एक पोल पर अगर 9 उपभोक्ताओं का कनेक्‍शन हैं, तो तीनों फेज पर तीन-तीन उपभोक्ताओं का लोड दिया जाता है, पंरतु आज यह व्यवस्था पूरी तरह फ्लाप हो चुकी हैं। उपभोक्ता सुविधानुसार पोल पर से लाइन लेने के बजाय जहाँ- तहाँ टोका फंसाकर विद्युत का उपयोग कर रहे है। एक ही फेज पर अधिकांश उपभोक्ता टोका फंसा देते है, जिससे ट्रांसफारमर जलने की तथा लो-हाई वोल्टेज की समस्या बनी रहती है। टोका फंसाकर विद्युत उपभोग करने के कारण तार टूट कर गिरने की समस्या आम हो गई है। तार टूटने से हुई क्षति को रोकने हेतु 11000 तथा 230 वोल्ट वाले तारों के नीचे तार लगाया जाता था, ताकि तार टूटने पर जमीन पर गिरने के पूर्व ग्रीड से लाइन कट जाये, परन्तु आज हालत एैसी हो गई है कि तार टूटकर घंटों गलियों एवं सड़कों पर गिरी रहती है, बिजली प्रवाहित होती रहता है, जिससे जान-माल की क्षति होती है।

15 अगस्त को गाँधी मैदान से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की है, ’’अगर मैं बिजली में सुधार नहीं करूगाँ तो वोट माँगने नहीं जाऊगाँ।” ऐसी बात कहकर श्री कुमार बिहार की जनता को बरगला रहे हैं, झूठा स्वप्न दिखा रहे हैं। विद्युत विभाग ने सप्लाई निर्वाध हो, इसके लिए विभाग ने उपकरण खरीदने के नाम पर कई बार शुल्क वसूला गया, परंतु कोई सुधार नहीं हुआ। क्या नीतीश सरकार ने 7 वर्षों में विद्युत आपूर्ति निर्वाध हो, इस व्यवस्था को सुधारने की दिश में क्या कार्य किया। आम जनता को मालूम है कि विधुत उत्पादन इकाई स्थापित करने में समय लगेगा, परन्तु आम जनता का यह आरोप है कि जर्जर हो चुकी पोल-तार लगातार 8-10 घंटे बिजली आपूर्ति सहने की हालात में नहीं है। इस व्यवस्था को आज तक नहीं बदला गया है। नीतीश कुमार पूर्ववर्ती सरकार पर नई पावर इकाई नहीं लगाने का दोष मनकर सत्ता को हथिया सकते हैं, परन्तु सत्ता में आने के बाद बिना कार्य किए दोबारा वोट नहीं हासिल किया जा सकता है? सात वर्षों में श्री कुमार की सरकार के व्यवस्था बदलने की दिशा में क्या किया, जनता हिसाब माँग रही है।

बिहार शरीफ (नालंदा) से संजय कुमार की रिपोर्ट.

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