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इधर कर्मचारी हड़ताल पर, उधर मुख्यमंत्री विदेश यात्रा पर!

: संवेदनहीनता की पराकाष्ठा दिख रही उत्तराखण्ड में : देहरादून। इसे उत्तराखण्ड का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि जिस राज्य के 56 विभागों के छह लाख कर्मचारी हड़ताल पर हों और मुख्यमंत्री विदेश जाने की तैयारी में लगा हो इससे पहले भी प्रदेशवासी राज्य के नेताओं की राज्यवासियों से बेरुखी उस वक़्त देख चुके हैं तब राज्य में आपदा के दौरान जहां एक ओर उत्तरकाशी, बागेश्वर और रूद्रप्रयाग जिले के सैकड़ों लोग जीवन और मौत से लड़ रहे थे, वहीं उस वक्त राज्य के कुछ कबीना मंत्री व विधायक इंग्लैंड में गुलछर्रे उड़ा रहे थे। पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ चल रहे आंदोलन में राज्य के 56 विभागों के लगभग छह लाख कर्मचारी आंदोलन पर हैं, सोमवार को राज्य के इन 56 विभागों के कार्यालयों में या तो ताले पड़े रहे या कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा। शासन से लेकर मण्डलीय स्तर और जिले से लेकर तहसील स्तर और यहां तक ब्लॉक स्तर तक के कर्मचारियों के काम पर न आने से सरकारी कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। वैसे आरक्षण समर्थक कुछ कर्मचारी जरूर काम पर आए, लेकिन इनकी संख्या प्रभावी न होने के कारण ये लोगों की दिक्कतों को दूर नहीं कर पाए।

: संवेदनहीनता की पराकाष्ठा दिख रही उत्तराखण्ड में : देहरादून। इसे उत्तराखण्ड का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि जिस राज्य के 56 विभागों के छह लाख कर्मचारी हड़ताल पर हों और मुख्यमंत्री विदेश जाने की तैयारी में लगा हो इससे पहले भी प्रदेशवासी राज्य के नेताओं की राज्यवासियों से बेरुखी उस वक़्त देख चुके हैं तब राज्य में आपदा के दौरान जहां एक ओर उत्तरकाशी, बागेश्वर और रूद्रप्रयाग जिले के सैकड़ों लोग जीवन और मौत से लड़ रहे थे, वहीं उस वक्त राज्य के कुछ कबीना मंत्री व विधायक इंग्लैंड में गुलछर्रे उड़ा रहे थे। पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ चल रहे आंदोलन में राज्य के 56 विभागों के लगभग छह लाख कर्मचारी आंदोलन पर हैं, सोमवार को राज्य के इन 56 विभागों के कार्यालयों में या तो ताले पड़े रहे या कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा। शासन से लेकर मण्डलीय स्तर और जिले से लेकर तहसील स्तर और यहां तक ब्लॉक स्तर तक के कर्मचारियों के काम पर न आने से सरकारी कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। वैसे आरक्षण समर्थक कुछ कर्मचारी जरूर काम पर आए, लेकिन इनकी संख्या प्रभावी न होने के कारण ये लोगों की दिक्कतों को दूर नहीं कर पाए।

राज्य के लगभग सभी कर्मचारी संगठन मिलकर ताकत के साथ इस आंदोलन में प्रतिभाग कर रहे हैं। राज्य स्तरीय संगठनों में उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ, उत्तराखण्ड कर्मचारी शिक्षक संगठन, पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, उत्तराखण्ड चालक महासंघ, उत्तराखण्ड कर्मचारी निगम महासंघ, वन निगम महासंघ और उत्तराखण्ड मिनिस्ट्रीयल फेडरेशन जैसे संगठन मैदान में है। ऐसे में राज्य के मंत्रियों व विधायकों के दौरे के बाद अब मुख्यमंत्री का 10 दिवसीय व्यक्तिगत विदेशी दौरा विवादों में आ गया है। एक जानकारी के अनुसार आज (सोमवार) मुख्यमंत्री देहरादून से दिल्ली जाएंगे, जहां से वे मंगलवार को मुंबई पहुंचेंगे। चर्चा है कि उनके साथ उनके परिवार के लगभग 24 लोग भी साथ जा रहे हैं, जो 19 दिसम्बर को मुंबई से दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील तथा जर्मनी सहित कई अन्य यूरोपीय व दक्षिण अफ्रीकी देशों की यात्रा भी करेंगे। इस दौरान वे केपटाउन, जोहांसबर्ग व रिओ डी जनेरिओ की यात्रा भी करेंगे।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग में सहारनपुर निवासी खनन व्यवसायी राकेश कुमार गुप्ता के मेहमान बनकर जा रहे हैं। सूत्रों ने तो यह भी बताया कि इस पूरी यात्रा के प्रायोजक दक्षिण अफ्रीका का यह व्यवसायी ही हैं, जो भारत के उत्तराखण्ड प्रांत में खनन और होटल व्यवसाय में अपने हाथ आजमाने को तैयार हैं। जिनके दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा की तीसरी पत्नी के पुत्र डुडुजानी जैकब व्यवसायिक हिस्सेदार हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है जहां एक ओर राज्य के छह लाख कर्मचारी हड़ताल पर हों और राज्य का मुख्यमंत्री अपनी विदेश यात्रा की तैयारी पर, इससे यह साफ झलकता है कि वह राज्य के प्रति कितने संजीदा हैं। जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने से लेकर आज तक मुख्यमंत्री ने इस राज्य को केवल राज्य में काम करने वाले ब्यूरोक्रेट्स की तरह ही लिया है, वे सत्ता में मात्र पांच दिन ही देहरादून में प्रवास करते हैं और शनिवार व रविवार उनका दिल्ली में ही गुजरता। विश्लेषकों का मानना है कि इसे संवेदनहीनता की पराकाष्ठा ही कहा जाएगा कि एक और जहाँ राज्य के छह लाख कर्मचारी हड़ताल पर है और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो और मुख्यमंत्री विदेश यात्रा पर जा रहा हो इससे पता चलता है कि वह राज्य के प्रति कितना संजीदा है। इतना ही नहीं प्रदेशवासी राज्य में काबिज कांग्रेस सरकार के मंत्रियों का राज्य के प्रति संजीदगी उस समय भी देख देख चुके हैं जब बादल फटने की घटना के चलते तीन सितंबर को ऊखीमठ, रूद्रप्रयाग और बागेश्वर जिलों के सैकड़ों लोग जहां जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे, उस दौरान राज्य के मंत्री इंग्लैंड में ओलपिंक का मजा ले रहे थे। मंत्रियों की इस यात्रा पर राज्य के लोगों का आक्रोश भी उस समय भी देखने को मिला था।

देहरादून से नारायण परगांई की रिपोर्ट.

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