हिन्दुस्तान की संस्कृति, नागरिक समाज तथा लोकतान्त्रिक व्यवस्था का अध्ययन करने पहुंचे अमेरिका की नोर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी तथा न्यूयार्क यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने जब पर्यावरण, पानी आजीविका पर आयोजित सेमीनार में झीलों की स्थिति का वर्णन सुना तो वे सीधे झीलों में श्रमदान करने पहुंच गए। दोनों विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों का यह दल विगत पन्द्रह दिनों से भारत भ्रमण पर है। शनिवार को डॉ. मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट तथा फाउन्डेशन फोर सस्टेनेबल डेवलपमेन्ट की ओर से आयोजित सेमिनार में इन युवा विद्यार्थियों ने भाग लिया। ट्रस्ट के सचिव नन्दकिशोर शर्मा ने विद्यार्थियों को उदयपुर में पर्यावरण व आजीविका पर कार्य कर रही संस्थाओं से अवगत कराया।
प्रथम सत्र महाराणा ऑफ मेवाड़ चैरिटेबल फाउन्डेशन के तत्वाधान में सिटी पैलेस में आयोजित हुआ, जिसमें फाउन्डेशन के सचिव भूपेन्द्र सिंह आहुवा ने दल को मेवाड़ की परम्परागत जल व्यवस्था एवं झीलों के इतिहास से परिचय कराया। विद्याभवन ऑडिटोरियम में आयोजित द्वितीय सत्र में ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय सिंह मेहता ने दक्षिणी राजस्थान में अवसरों व चुनौतियों पर प्रकाश डाला। झील संरक्षण समिति के डॉ. तेज राजदान एवं विद्याभवन पालिटेक्निक के प्राचार्य अनिल मेहता ने दल को झीलों की पर्यावरण स्थिति, बढ़ते प्रदूषण, आयड़ नदी ग्रीन ब्रिज उपचार योजना के बारे बताया। राजदान तथा मेहता से झीलों की स्थिति जानने के बाद दल ने निश्चय किया कि वे स्वयं श्रमदान कर झीलों में से गन्दगी निकालेंगे।
पर्यावरणविद एवं गांधीवादी किशोर संत एफईएसके यश सेठिया, एसपीडब्लूडी के डॉ. जगदीश पुरोहित तथा गांधी मानव कल्याण समिति को डॉ. पल्लवी ने दल को मेवाड़ में हरे भरे जंगलों कृषि भूमि के क्षरण तथा रोजगार के लिए व्यापक पलायन पर तथा आजीविका पर प्रकश डाला। इन विशेषज्ञों ने महा नरेगा के तहत वन भूमि विकास के कार्यो को प्राथमिकता से करने पर सुझाव रखे। डॉ. भार्गव मिस्त्री ने सरोद वादन कर भारतीय संगीत पर जानकारी दी। रविवार प्रातः दल ने ट्रस्ट, झील संरक्षण समिति, चांदपोल नागरिक समिति, झील हितैषी नागरिक मंच, एफएसडी के तत्वाधान में पिछौला में श्रमदान कर लगभग पन्द्रह क्विन्टल कचरे को हटाया। इस अवसर पर तेजशंकर पालीवाल, हाजी सरदार, मोहम्मद, नूर मोहम्मद, दामोदर, कमलेश, डॉ. तेज राजदान, नन्दकिशोर शर्मा, अनिल मेहता, रोमा भारद्वाज सहित नगर के नागरिकों ने विद्यार्थियों के साथ श्रमदान किया।
नन्द किशोर शर्मा की रिपोर्ट.


