Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

ये दुनिया

इसरो के पूर्व अध्‍यक्ष जी माधवन समेत चार वैज्ञानिकों पर सरकारी वैन!

नई दिल्ली। इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी.माधवन नायर सहित देश के चार जाने-माने वैज्ञानिकों को भविष्य में किसी भी तरह का सरकारी पद नहीं मिलेगा। सरकार ने ये कड़ा निर्णय इसरो की संस्था एंट्रिक्स और देवास मल्टीमीडिया के बीच 2005 में हुए विवादित करार पर लिया है। सरकार ने जांच रिपोर्ट के आधार पर इन चारों वैज्ञानिकों को भविष्‍य में कोई सरकारी पद न देने का फैसला किया है। दूसरी तरफ जी.माधवन नायर ने इसके लिए इसरो के मौजूदा अध्यक्ष को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने ये भी कहा है कि आतंकवादियों को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाता है, लेकिन सरकार ने वैज्ञानिकों को अपनी बात कहने का मौका नहीं दिया।

नई दिल्ली। इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी.माधवन नायर सहित देश के चार जाने-माने वैज्ञानिकों को भविष्य में किसी भी तरह का सरकारी पद नहीं मिलेगा। सरकार ने ये कड़ा निर्णय इसरो की संस्था एंट्रिक्स और देवास मल्टीमीडिया के बीच 2005 में हुए विवादित करार पर लिया है। सरकार ने जांच रिपोर्ट के आधार पर इन चारों वैज्ञानिकों को भविष्‍य में कोई सरकारी पद न देने का फैसला किया है। दूसरी तरफ जी.माधवन नायर ने इसके लिए इसरो के मौजूदा अध्यक्ष को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने ये भी कहा है कि आतंकवादियों को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाता है, लेकिन सरकार ने वैज्ञानिकों को अपनी बात कहने का मौका नहीं दिया।

पद्म विभूषण से सम्‍मानित इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी.माधवन नायर को चंद्रयान-1 की सफलता का श्रेय दिया जाता है। पर इस जांच रिपोर्ट के बाद अब वे अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल देश के लिए नहीं कर सकते। सरकार के अंतरिक्ष विभाग ने 13 जनवरी को जारी एक आदेश में कहा है कि जी.माधवन नायर, इसरो के पूर्व वैज्ञानिक सचिव के. भास्करनारायण, एंटरिक्स के पूर्व प्रबंध निदेशक के.आर श्री धर्ममूर्ति और इसरो अंतरिक्ष केंद्र के पूर्व निदेशक के.एन शंकर भविष्य में किसी भी सरकारी विभाग या संस्था के किसी भी पद पर नियुक्त नहीं किए जाएंगे। हालांकि इस आदेश में इसका कोई कारण नहीं बताया गया है, लेकिन समझा जा रहा है कि इसरो की वाणिज्यिक संस्‍था एंट्रिक्‍स और देवास मल्‍टीमीडिया के 2005 के करार को लेकर आए रिपोर्ट के आधार पर यह कड़ा कदम उठाया गया है।

गौरतलब है कि इस समझौते के तहत एंट्रिक्स ने लगभग 1350 करोड़ रुपए के बदले अपने दो उपग्रहों के ट्रांसपोंडरों के 90 प्रतिशत अधिकार 12 वर्षों के लिए देवास को दे दिए थे। इस सौदे को लेकर विवाद हुआ था तथा आरोप लगा था कि इसमें नियमों का उल्लंघन हुआ है। इसके चलते सरकार को दो लाख करोड़ का घाटा होने का भी अनुमान लगाया गया था। सरकार ने बाद में ये सौदा रद्द कर दिया था। लेकिन जी. माधवन नायर इसे साजिश करार दे रहे हैं। उनके मुताबिक इसरो के मौजूदा अध्यक्ष राधाकृष्णन नायर उनके खिलाफ निजी खु्न्नस रखते हैं। इसी के चलते इस तरह का फैसला लिया गया है।

उन्‍होंने कहा कि वैज्ञानिकों के साथ वैसा भी व्यवहार नहीं किया गया जैसा आतंकवादियों के साथ किया जाता है। हमें अपना पक्ष रखने तक का मौका नहीं दिया गया। उधर, इस मामले में दंडित किए जा रहे दूसरे वैज्ञानिकों का भी कहना है कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाने का संकेत भी दिया है। पिछले साल 31 मई को प्रधानमंत्री ने पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त प्रत्य़ूष सिन्हा की अगुवाई में एक पांच-सदस्यीय टीम का गठन किया था, जिसने एंट्रिक्स और देवास के बीच हुए समझौते की बारीकियों की पड़ताल की थी। बताया जा रहा है कि उसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने चारों वैज्ञानिकों को भविष्‍य में सरकारी पद ना देने का निर्णय लिया है.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...