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एसटीएफ की गोली से बेकसूर ग्रामीण की मौत

बदायूं : उझानी कोतवाली क्षेत्र में आगरा की बेलगाम एसटीएफ टीम ने पहचान किये बिना ही बेकसूर ग्रामीण को मौत के घाट उतार दिया, साथ ही केस को मोड़ देने के लिए ग्रामीण के शव को जला दिया. एसटीएफ की हैवानियत पर मृतक के परिजनों ने ग्रामीणों के सहयोग से बरेली मथुरा हाइवे जाम कर दिया. उनकी मांग थी कि दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए. मामला बिगड़ता देख एसएसपी ने परिजनों को दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट लिखने का आश्वासन दिया, तब जाकर जाम खुल सका. पुलिस ने शव का पीएम करवाया है.

बदायूं : उझानी कोतवाली क्षेत्र में आगरा की बेलगाम एसटीएफ टीम ने पहचान किये बिना ही बेकसूर ग्रामीण को मौत के घाट उतार दिया, साथ ही केस को मोड़ देने के लिए ग्रामीण के शव को जला दिया. एसटीएफ की हैवानियत पर मृतक के परिजनों ने ग्रामीणों के सहयोग से बरेली मथुरा हाइवे जाम कर दिया. उनकी मांग थी कि दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए. मामला बिगड़ता देख एसएसपी ने परिजनों को दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट लिखने का आश्वासन दिया, तब जाकर जाम खुल सका. पुलिस ने शव का पीएम करवाया है.

अलीगढ़ के अतरौली निवासी पृथ्वीराज सिंह मोस्ट वाटेंड है, उसकी तलाश में आगरा की एसटीएफ की टीम को पृथ्वीराज के मोबाइल की लोकेशन मिली कि वह उझानी कोतवाली क्षेत्र के गांव संजरपुर के जंगल में है. लोकेशन के आधार पर एसटीएफ की टीम ने जंगल में छापा मारा, जहां पृथ्वीराज नहीं था. एसटीएफ ने वहां खेत की सिंचाई कर रहे संजरपुर निवासी ब्रजपाल को पकड़ लिया. पूछने पर उसने बताया कि वह ब्रजपाल है और संजरपुर का रहने वाला है. इतना कहते ही वहां एक गोली चली जो एसटीएफ के सिपाही राकेश को लगी. सिपाही को गोली लगते ही एसटीएफ की टीम ने ब्रजपाल को ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर भून डाला.

वारदात को अंजाम देने के बाद टीम संजरपुर गांव पहुंची और वहां ब्रजपाल के बारे में जानकारी इकट्ठा की, तो पता चला कि मृतक इसी गांव का है. एसटीएफ गांव के ही रहने वाले अनेक पाल को घटनास्थल पर ले गई, जहां अनेक पाल ने मृतक की शिनाख्त ब्रजपाल के रूप में ही की. शिनाख्त के बाद एसटीएफ ने अनेक पाल को धमकी देकर वहां से भगा दिया और वारदात को मोड़ देने के लिए ब्रजपाल का शव एक झोपड़ी में डालकर इसलिए जला दिया ताकि वह इसे पृथ्वी सिंह साबित कर सकें.

उधर अनेक पाल ने गांव में जाकर सभी को बता दिया कि पुलिस ने ब्रजपाल को मार डाला. सूचना मिलते ही तमाम ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े. जहां ब्रजपाल की लाश जल रही थी. ग्रामीणों ने आग पर पानी डालकर उसे बुझाया. सूचना पर पहुंची उझानी पुलिस अधजले शव को लेकर पोस्टमार्टम हाउस आ गई. इधर बेकसूर को पुलिस द्वारा मारे जाने की खबर से आसपास के ग्रामीण भी घटनास्थल पर आ गए. उन्होंने उझानी वाईपास पर हाइवे जाम कर दिया. जाम लगने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई.

ग्रामीणों की मांग थी कि दोषी पुलिस टीम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाए. काफी देर तक लगे जाम की सूचना पर एसएसपी नवनीत राणा व एसपी सिटी परेश पांडेय समेत भारी पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गया. एसएसपी श्री राणा ने मृतक के परिजनों को दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाने का आश्वासन दिया. परिजन आश्वासन पर भी नहीं माने तो एसएसपी ने तत्काल रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए. रिपोर्ट दर्ज हो जाने के बाद पब्लिक ने जाम खोल दिया. बाद में परिजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया. उधर रहस्यमय परिस्थितियों में चली गोली से घायल हुए एसटीएफ के सिपाही राकेश को बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. एसटीएफ की इस करतूत ने पुलिस महकमे को शर्मसार कर दिया है.

ग्रामीणों का गुस्सा देख भागी पुलिस

एसटीएफ टीम के द्वारा मौत के घाट उतारे गए ब्रजपाल का हाल जानने के लिए मुजरिया थाने की पुलिस घटना स्थल पर पहुंची. ग्रामीणों ने पुलिस को देखते ही हल्ला बोल दिया. ग्रामीण पुलिस टीम की ओर भागे वैसे ही अपनी जान बचाकर पुलिस भी भाग खड़ी हुई. ब्रजपाल की हत्या के बाद वहां का माहौल इतना गर्माया कि भीड़ में शामिल महिलाओं ने जाम के दौरान वाहनों पर भी पथराव किया. इससे कई वाहनों के शीशे भी टूट गए.

बाज नहीं आये नेता

ब्रजपाल की मौत पर तमाम नेता गोटियां खेलने पहुंच गए. चुनाव के वक्त जनता की नजर में हीरो बनने के लिए सभी ने पैंतरेबाजी शुरू कर दी. कोई पुलिस की नजर में अपना सिक्का जमाना चाह रहा था, तो कोई पुलिस को बुरा बताकर जनता की नजरों में अपना सिक्का हासिल करना चाहा रहा था. लगभग दो घंटे चले नेताओं के इस खेल का अंत तब हुआ, जब पुलिस अधिकारियों ने मृतक के परिजनों को कार्रवाई का आश्वसन दिया और राजनीति करने वालों पर नजर टेढ़ी की. सख्त रवैए के चलते नेता चुपचाप निकल लिए. मृतक ब्रजपाल के शव का पोस्टमार्टम डाक्टरों को पैनल गठित कराकर किया गया. पैनल में डाक्टर हरपाल सिंह और अमित वाष्र्णेय शामिल थे. पीएम रिपोर्ट में भी गोली लगने से मौत की पुष्टि हुई है. डाक्टर्स के मुताबिक गोली एके 47 या एके 48 द्वारा चलाई गई थी, जो सीने को चीरते हुए पार हो गई.

हमें इंसाफ दिवाए देयो साहब

ब्रजपाल की हत्या की खबर सुनकर आई उसकी वृद्धा बहिन कलावती पुलिस अधिकारियों से रोते हुए एक ही फरियाद कर रही थी कि हमारो भैया बेकसूर हो, वाकौ जानवरन की तरह मार डारो, हमैं इंसाफ दिवाए देओ साहब. वृद्ध बहिन की आंखों से बहते आंसू और खाकी से ही इंसाफ मांगने की बात पर सीओ सिटी श्रीश चंद्र भी भावुक हो उठे. उन्होंने कलावती को सीने से लगा लिया और उसे सजा दिलवाने का आश्वासन दिया.

भूखे पेट ही गए थे घर से: चमेली

मृतक  ब्रजपाल की पत्नी चमेली का कहना था कि रात को ब्रजपाल ट्यूवैल पर जा रहा था तो उसने खाना खाकर जाने की बात कही, इसपर वह भूखे पेट ही चला गया और लौटकर खाने की बात कही. चमेली रो-रो कर एक ही बात कह रही थी कि मुझे क्या पता था कि अब वह कभी खाना न खा सकेंगे. उसके यह करुण रुदन सुनने वालों की आंखें नम हो गयीं.

पुलिस ने ही मारे मेरे पापा को: प्रमिला

मृतक ब्रजपाल की बेटी प्रमिला रो-रो कर सबसे एक ही बात कह रही थी कि उसके पापा बहुत ही सीधे इंसान थे. पुलिस ने बेवजह उसके पापा को मारा है. कुदरत दोषियों को नहीं बख्शेगी. मृतक के बेटे बुधपाल का कहना है कि ग्रामीणों ने उसे बताया कि उसके पिता को पुलिस ने मार दिया है. यह सुनकर वह घटनास्थल की ओर दौड़ा, वहां झोपड़ी में आग लगी हुई थी, जिसमें उसके पिता का शव जल रहा था. मौके पर आये बेटे को देख कर पुलिस वाले भाग गए. भागते हुए उसने पीछा करने की कोशिश की तो पुलिस वालों ने रायफलें सीधी कर दीं और कहा चुपचाप लौट जा नहीं तो गोली मार देंगे. वह डर की वजह से कुछ न कर सका और पुलिस वाले भाग गए.

मुंह खोलने पर दी थी जान से मारने की धमकी

एसटीएफ ने ब्रजपाल को मौत के घाट उतारने के बाद गांव संजरपुर जाकर अनेक पाल को घर से उठा लाई और उससे शव की शिनाख्त कराई। उसने शव देखते ही बता दिया कि ब्रजपाल का शव है। यह सुनते ही पुलिस ने उसे मुंह खोलने पर जान से मारने की धमकी दे डाली, साथ ही भगा दिया। एसटीएफ द्वारा मौत के घाट उतारे गए बेकसूर ब्रजपाल की मौत की घटना से पूरा गांव इंसाफ मांगने के लिए सडक़ों पर उतर आया. इससे गांव में सन्नाटा छा गया. ब्रजपाल के व्यवहार की वजह से वह पूरे गांव का चहेता था, जिससे हर घर में मातम है और पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है.

उझानी और पीएम हाउस बने छावनी

मृतक के परिजनों और ग्रामीणों के हंगामा मचाने की सूचना ने पुलिस महकमे को हिला दिया. आनन-फानन में कई थानों का फोर्स उझानी भेजा गया. फोर्स के पहुंचने पर उझानी छावनी में तब्दील हो गई. इसके साथ ही पोस्टमार्टम हाउस पर भी पुलिस का कड़ा पहरा रहा. उझानी में मृतक के परिजनों में शामिल महिलाओं द्वारा उत्पात मचाने पर महिला पुलिस को भी लगा दिया गया. महिला पुलिस के पहुंचने पर माहौल शांत हुआ. मृतक ब्रजपाल की अंत्येष्टि पुलिस अभिरक्षा में हुई. भारी पुलिस फोर्स के साथ एसपी सिटी परेश पांडेय और सीओ सिटी श्रीश चंद्र अंत्येष्टि में शामिल हुए.

एसटीएफ इंचार्ज ने भी लिखाया मुकदमा

फर्जी मुठभेड़ को सही साबित करने के लिए एसटीएफ ने भी पैंतरेबाजी का खेल शुरू कर दिया है. एसटीएफ इंचार्ज बीएस त्यागी ने उझानी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है. मुकदमे में बताया गया है कि वांटेड पृथ्वी सिंह के साथ तीन बदमाश थे, जिनमें मुठभेड़ के दौरान एक मारा गया और दो भागने में कामयाब रहे. मृतक ब्रजपाल की पत्नी चमेली की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में एसटीएफ इंचार्ज बीएस त्यागी, उझानी कोतवाली के एसआई जेपी सिंह परिहार समेत दस पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है.

बदायूं से बीपी गौतम की रिपोर्ट.

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