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एसी-डीसी बिल के मामले में पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार से जवाब मांगा

अभी तक एसी-डीसी बिल का मामला ठंडा नहीं हुआ है। आज पटना उच्च न्यायालय ने सरकार से इस में हुई अनियमितता के संबंध में जवाब दाखिल करने को कहा। एसी-डीसी बिल के कारण पिछली विधानसभा में जमकर हंगामा और मारपीट तक हुई थी। चौवन हजार करोड़ रुपये की सरकारी खजाने से हुई निकासी की जांच के लिये एक जनहित याचिका पटना उच्च न्यायालय में दाखिल की गई थी तथा पूरे मामले की जांच सीबीआई से करवाने की प्रार्थना याचिकाकर्ता ने की थी। उक्त याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सीबीआई से जांच के आदेश दे दिये थे और सरकार उकत आदेश के खिलाफ़ बड़ी बेंच में जाना चाहती थी, इसी कारण से विरोधी दलों द्वारा हंगामा किया गया था।

अभी तक एसी-डीसी बिल का मामला ठंडा नहीं हुआ है। आज पटना उच्च न्यायालय ने सरकार से इस में हुई अनियमितता के संबंध में जवाब दाखिल करने को कहा। एसी-डीसी बिल के कारण पिछली विधानसभा में जमकर हंगामा और मारपीट तक हुई थी। चौवन हजार करोड़ रुपये की सरकारी खजाने से हुई निकासी की जांच के लिये एक जनहित याचिका पटना उच्च न्यायालय में दाखिल की गई थी तथा पूरे मामले की जांच सीबीआई से करवाने की प्रार्थना याचिकाकर्ता ने की थी। उक्त याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सीबीआई से जांच के आदेश दे दिये थे और सरकार उकत आदेश के खिलाफ़ बड़ी बेंच में जाना चाहती थी, इसी कारण से विरोधी दलों द्वारा हंगामा किया गया था।

पटना उच्च न्यायालय के द्वारा घोटाले की सीबीआई के द्वारा जांच के आदेश में एक कानूनी खामी थी जिसका फ़ायदा सरकार उठाना चाहती थी। उक्त जनहित याचिका पर सरकार का पक्ष बिना सुने हुये हीं न्यायालय ने आदेश प्रदान कर दिया था,  जबकि इस तरह के अहम मामलों में सरकार का पक्ष जानना जरुरी है साथ हीं साथ यह नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन भी था। सरकार ने पटना उच्च न्यायालय की फ़ुल बेंच में उक्त आदेश को चुनौती दी तथा फ़ुल बेंच ने उस पर रोक लगा दी। लेकिन एसी-डीसी बिल का मामला खत्म नहीं हुआ है। सीबीआई से जांच के आदेश पर ही सिर्फ़ रोक लगी थी। सरकार को एसी डीसी बिल जमा करने का आदेश हुआ था। एसी-डीसी बिल का मामला क्या है यह जानना जरूरी है। सरकार के विभिन्न विभाग व्यय के लिये अग्रिम राशि की निकासी करते है तथा बाद में उसका बिल जमा करते हैं। बिहार में सरकारी विभागों ने अग्रिम की राशि तो निकाली परन्तु व्यय का बिल जमा नहीं किया। इस तरह की अनियमितता 2004  से चली आ रही थी।

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद सभी सरकारी विभाग जिन्होंने अग्रिम निकासी की थी,  युद्ध स्तर पर रात-रात भर जागर अग्रिम का बिल बनाने में लग गये। लेकिन समस्या यह है कि छह-सात वर्ष पहले की गई खरीद की रसीद कहां से लायें। खरीदने के वक्त तो एक कच्चा पुर्जा ले लेने का प्रचलन था। आज की तारीख में अगर पुरानी खरीद की रसीद मांगने पर भी कोई दुकानदार देगा नहीं क्योंकि दुकानदार बिक्री कर उसी आधार पर देते हैं। कच्चे पुर्जे पर जो सामान बेचते है हम उसका कोई कर नहीं देते। अभी जो बिल आनन फ़ानन में जमा किया गया है, उनमें से अधिकांश फ़र्जी है जैसे ही उन बिलों का सत्यापन होगा सब पकडे़ जायेंगे। 54 हजार करोड़ का यह मामला आज या कल एक बहुत बडे़ राजनीतिक भूचाल का कारण बनेगा।

मदन कुमार तिवारी की रिपोर्ट.

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