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कांग्रेस के डेढ़ माह का कार्यकाल निराशाजनक : मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के नेतृत्व वाली सरकार के डेढ़ माह पूरे हो चुके है। सरकार विकास के कामों के दावे कर रही है उसके दावे कितने खरे है और कितने खोटे यह तो समय बताएगा पर राजनीतिक समीक्षकों की इस सरकार के कार्यकाल के बारे में अलग अलग राय है। सरकार में मंत्रियों और मुख्यमंत्री को लेकर खींचतान मची है उसका प्रभाव सरकार पर दिख रहा है। दूसरी ओर विपक्षी दल भाजपा भी इस खींचतान से अलग नहीं है। वहां भी नेता प्रतिपक्ष को लेकर मारामारी चल रही है। भाजपा को मात्र 31 सीटें मिली है। यह भी एक मुद्दा है। सरकार में लालबत्ती पाने की होड़, बड़े पावर प्रोजेक्ट्स के मामले में मुख्यमंत्री की मुखरता, देश में अन्ना फैक्टर के प्रभाव और खामोश़ विपक्ष जैसे विभिन्न मुद्दों पर वरिष्‍ठ भाजपा नेता बीसी खंडूड़ी से बातचीत की गई। पूर्व मुख्यमंत्री से बातचीत की है हिन्दुस्थान समाचार के उत्तराखंड ब्यूरो प्रमुख धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्‍ठ भाजपा नेता मेजर जनरल श्री बीसी खंडूड़ी से विस्तृत बातचीत के संपादित अंश। पेश हैं उस बातचीत के कुछ प्रमुख अंश।

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के नेतृत्व वाली सरकार के डेढ़ माह पूरे हो चुके है। सरकार विकास के कामों के दावे कर रही है उसके दावे कितने खरे है और कितने खोटे यह तो समय बताएगा पर राजनीतिक समीक्षकों की इस सरकार के कार्यकाल के बारे में अलग अलग राय है। सरकार में मंत्रियों और मुख्यमंत्री को लेकर खींचतान मची है उसका प्रभाव सरकार पर दिख रहा है। दूसरी ओर विपक्षी दल भाजपा भी इस खींचतान से अलग नहीं है। वहां भी नेता प्रतिपक्ष को लेकर मारामारी चल रही है। भाजपा को मात्र 31 सीटें मिली है। यह भी एक मुद्दा है। सरकार में लालबत्ती पाने की होड़, बड़े पावर प्रोजेक्ट्स के मामले में मुख्यमंत्री की मुखरता, देश में अन्ना फैक्टर के प्रभाव और खामोश़ विपक्ष जैसे विभिन्न मुद्दों पर वरिष्‍ठ भाजपा नेता बीसी खंडूड़ी से बातचीत की गई। पूर्व मुख्यमंत्री से बातचीत की है हिन्दुस्थान समाचार के उत्तराखंड ब्यूरो प्रमुख धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्‍ठ भाजपा नेता मेजर जनरल श्री बीसी खंडूड़ी से विस्तृत बातचीत के संपादित अंश। पेश हैं उस बातचीत के कुछ प्रमुख अंश।

प्रश्न- प्रदेश की कांग्रेस सरकार के एक माह के कार्यकाल को आप किस रूप में देखते हैं। इससे प्रदेश के विकास को कौन सी दिशा मिलेगी?

उत्तर- देखिए वैसे तो एक माह का कार्यकाल किसी भी सरकार के लिए कोई खास समय नहीं होता। उसकी दिशा को बताने के लिए यह नाकाफी है। पर वर्तमान सरकार का एक माह का कार्यकाल निराशाजनक ही कहा जाएगा। अब तक इस सरकार ने अपनी दिशा भी नहीं तय की। वर्तमान सरकार जोड़तोड़ की सरकार है और इसमें मुख्यमंत्री बनाने से लेकर मंत्रिमंडल के गठन तक जो खेल चला है वह पूरे प्रदेश ने देखा। इस सरकार में सात निर्दलीय में से चार कैबिनेट मंत्री है। मुख्यमंत्री की अपनी ही पार्टी में स्वीकार्यता नहीं है। इससे प्रदेश के विकास की दिशा का पता चलता है और जब दिशा ही खराब है तो दशा खराब होना भी निश्चित है। इस सरकार का ध्यान प्रदेश की समस्याओं पर हैं ही नहीं जो बहुत ही चिंता की बात है।

प्रश्न- मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की कार्यशैली को आप किस रूप में लेते है।उनके एक माह के कार्यकाल को लेकर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

उत्तर- विजय बहुगुणा जी की सरकार की बात करें तो अभी तक उसने कोई नया कार्य नहीं किया है। इस सरकार ने अभी तक सिर्फ भाजपा कार्यकाल के फैसलों पर टीका टिप्पणी कर अपना समय काटा हैं, जबकि इन्हें भाजपा ने क्या किया क्या नहीं किया इसे छोड़ कर प्रदेश के विकास की योजनाओं के निर्माण में लग जाना चाहिए था। इसलिए मैं कहूंगा कि ये सरकार दिशाहीन और निराशाजनक है। विजय बहुगुणा में अपनी कोई ताकत नहीं है वे खुद दूसरों के भरोसे चल रहे है। सारा प्रदेश देख रहा है कि किस तरह एक मुख्यमंत्री को अपनी कुर्सी बचाने के लिए तमाम अच्छे बुरे समझौते करने पड़ रहे हैं।

प्रश्न- क्या आप विजय बहुगुणा के सामने उपचुनाव लड़ सकते है जबकि आपने पहले एक बार उनके सामने लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दिया था?

उत्तर- ये विषय भाजपा के केन्द्रीय नेताओं का है लेकिन अगर आप मुझसे पूछ रहे हैं तो मैं कहूंगा कि यदि पार्टी का आदेश आता है कि मैं विजय बहुगुणा के विरोध में चुनाव लड़ू तो पार्टी का एक समर्पित कार्यकर्ता होने के नाते मुझे लड़ना पड़ेगा। बहरहाल अभी कुछ भी तय नहीं है। जैसा पार्टी निर्णय लेगी वैसा किया जाएगा। मैं मीडिया को इस बारे में पहले भी बता चुका हूं।

प्रश्न-आपके नेतृत्व में चुनाव हुआ भाजपा फिर भी एक सीट से पिछड़ गई। इसमें आप किसकी चूक मानते है।पार्टी की रणनीतियों की या फिर कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर तालमेल की कमी को?

उत्तर- पार्टी के एक सीट से पिछड़ने के कई कारण है। एक तरफ जहां हमें हमारे अपने बागियों ने नुकसान पहुंचाया वहीं हम जमीनी स्तर पर बिखरे अपने कार्यकर्ताओं को भी जोड़ने में नाकाम रहें। पार्टी ने उच्च स्तरीय रणनीतियों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया लेकिन जमीनी स्तर पर हम कहीं न कहीं चूक का शिकार हुए। चुनाव के बाद इन सब विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई है और पार्टी इस पर कठोर कदम उठाने पर विचार कर रही है। हमें यह स्वीकार करना होगा कि कही न कही जमीनी स्तर पर कमी रही है।

प्रश्न- कोटद्वार सीट पर चुनाव हारने के बाद क्या आपकों लगता है कि आपका वहां से चुनाव लड़ने का फैसला गलत था। अपनी हार के लिए आप किसे जिम्मेदार मानते है?

उत्तर- कोटद्वार से मैं चुनाव क्यों हारा इस पर पार्टी मंथन कर रही है। रहा सवाल मेरे वहां से चुनाव लड़ने के फैसले का तो वह बिल्कुल गलत नहीं था। कोटद्वार हमारा संसदीय क्षेत्र रहा है वहां से मैं कई बार सांसद चुना गया हूं। 1991 से ही यह क्षेत्र पौड़ी लोकसभा सीट का हिस्सा रहा है। इस क्षेत्र ने पांच लोकसभा चुनावों में अच्छा परिणाम दिया है। वहां की हर विधानसभा में मुझे अच्छा वोट मिलता रहा है। इस बार वहां से चुनाव हारने की जो मुख्य वजह रही वह समय की कमी रही। मैं हार से निराश कतई नहीं हूं और आगे भी जनसमस्याओं को लेकर संघर्ष करता रहूंगा। वहां पर चुनाव के समय जो भी कुछ हुआ वह पार्टी फोरम पर रख चुका हूं। मैं प्रदेश की जनता का आभारी हूं जिसने मात्र तीन महीने चौदह दिन के मेरे अल्प कार्यकाल के बावजूद मुझे अभूतपूर्व समर्थन दिया। पार्टी ने जो 31 सीटें जीती वो बीसी खंडूड़ी पर जनता के विश्वास का परिणाम है। प्रदेश की जनता ने मेरी प्रशासनिक क्षमता पर विश्वास किया जिसके चलते ये सफलता हमें प्राप्त हुई। यदि हम अपने बागियों को संभाल पाते तो भाजपा को इस चुनाव में 41 से अधिक सीटें मिलती।

प्रश्न- प्रदेश में नई सरकार के गठन को डेढ़ माह बीत चुके है लेकिन भाजपा अभी तक अपना नेता प्रतिपक्ष तक नहीं चुन सकी है क्या यह पार्टी में जारी कलह का नतीजा है। क्या आप जन समस्याओं को लेकर संघर्ष करेंगे?

उत्तर- निश्चित ही ये चिंता का विषय है लेकिन पार्टी जल्द ही नेता प्रतिपक्ष का चयन करने वाली है। पार्टी एक मजबूत विपक्ष का अपना दायित्व निभाएगी। रही बात जन समस्यों को लेकर मेरे संघर्ष की तो उसके लिए मैं तैयार हूं। एक माह का समय मैं पहले भी कह चुका हूं कि किसी सरकार के लिए कम होता है। इसलिए इस सरकार के 100 दिन के कार्यकाल पूरा होते ही मैं जनसमस्याओं को लेकर सड़क पर उतर सकता हूं। प्रदेश की जनता ने भ्रष्‍टाचार के खिलाफ उठाए गए मेरे कदम को सराहा था और प्रशासनिक सुधार की मेरी कार्यशैली को स्वीकार किया था। लेकिन कांग्रेस सरकार ने आते ही प्रदेश को फिर पुराने रास्ते पर डालना शुरू कर दिया है। भाजपा शासन के अच्छे फैसलों को पलटना शुरू कर दिया है। इससे लग रहा है कि प्रदेश को एक बार फिर पटावारी भर्ती घोटाले, सिपाही घोटाले जैसे घोटालों का सामना करना पड़ सकता है।

प्रश्न- स्टर्डिया प्रकरण में आपकी सरकार पर भी आरोप लग रहे है। एक पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि इसकी सारी प्रक्रिया एनडी तिवारी और बीसी खंडूरी सरकार के समय क्रियान्वित हुई है?

उत्तर- स्टर्डिया प्रकरण गंभीर मामला है और जो भी मेरी सरकार पर आरोप लगा रहे हैं वह गलत है। मैं तो सरकार से खुद मांग करता हूं कि उसकी जांच कराएं और सच को सामने लाया जाए जो भी दोशी हो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

प्रश्न- वर्तमान सरकार ने प्रदेश में बड़े पावर प्रोजेक्ट्स को आवश्यक बताते हुए उसकी हिमायत की है और उसको लगाने के लिए केन्द्र का सहयोग भी मांगा है। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

उत्तर- बड़े पावर प्रोजेक्ट्स देश, प्रदेश और पर्यावरण के दुश्मन हैं। इनमें जहां पैसा ज्यादा लगता है वहीं इनके निर्माण से पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता हैं। इसलिए मैं बड़े पावर प्राजेक्ट्स के खिलाफ हूं। मैं गंगा की अविरलता और निर्मलता का मुखर समर्थक हूं। गंगा हमारी संस्कृति और संस्कारों की प्राण है। हमें कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे उसके जल की औशधीय गुणवत्ता प्रभावित हो। 2007 में जब मैं मुख्यमंत्री था तो मैने प्रयास किया था कि गोमुख में गंगा जी की जो पवित्रता है वह उत्तर प्रदेश तक कायम रहे। इसलिए आज गंगा पर कोई भी परियोजना बनाने से पहले उस पर गहन शोध की आवश्यकता है। जिससे हमें पता चल सके कि बांध बनाने और गंगा के जल को टनल में डालने पर उसकी गुणवत्ता पर क्या प्रभाव पड़ता है। जो लोग गंगा की पवित्रता के लिए काम कर रहे है मैं उनका समर्थन करता हूं लेकिन यह जोड़ना चाहता हूं कि गंगा की निर्मलता की बात सिर्फ उत्तराखंड तक सीमित न रहे बल्कि इसे कानपुर इलाहाबाद से लेकर गंगासागर तक शुद्ध करने के लिए काम किया जाना चाहिए। गंगा की पवित्रता और गुणवत्ता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए। गंगा जल की गुणवत्ता का समय समय पर निरीक्षण होते रहना चाहिए और जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

प्रश्न- विगत दिनों संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में अन्ना फैक्टर कितना चला। जबकि उत्तराखंड में अन्ना की टीम द्वारा एक मुख्यमंत्री और एक कैबिनेट मंत्री के खिलाफ बयान देने के बावजूद दोनों ही चुनाव जीतने में सफल रहे?

उत्तर- इन चुनावों में अन्ना फैक्टर खूब चला है। चुनाव जीतने से ही कोई अच्छा नहीं हो जाता। चुनाव तो देश में कई अपराधी भी जीतते हैं लेकिन इससे उनके अपराध कम नहीं हो जाते। अन्ना जी इस देश की धरोहर है मैं उनसे बहुत पहले से जुड़ा हूं। जब मैं मुख्यमंत्री नहीं था तब भी अन्ना के समर्थन में खड़ा था और यहां सर्वदलीय रैली निकाली थी जिसमें भ्रष्‍टाचार के खिलाफ सभी दलों ने सहभागिता की थी। हजारे टीम ने देश के लिए जो किया है वह बेमिसाल है। पहली बार पूरे देश में भ्रष्‍टाचार एक मुद्दा बन गया है। मेरी जानकारी में देश में भ्रष्‍टाचार को लेकर इस तरह की यह पहली घटना है जो आज आन्दोलन बन गई है। उत्तराखंड के लोगों ने भी अन्ना जी को सराहा है। अप्रैल 2011 में भी मैंने अन्ना जी के आन्दोलन का भरपूर समर्थन किया था लोकपाल बिल पास किया जिसे प्रदेश की जनता ने पसंद किया और भाजपा को अल्प समय में भी 31 सीटें देकर हमारा हौंसला बढ़ाया।

प्रश्न- हिन्दुस्थान समाचार के माध्यम से आप प्रदेश की जनता को क्या संदेश देना चाहेंगे।

उत्तर- मैं प्रदेश की जनता के सुख समृद्धि की कामना करते हुए उनसे कहना चाहूंगा कि उनकी समस्याओं को लेकर भाजपा हमेशा गंभीर रही है और आगे भी रहेगी। मैं स्वयं जनता के हितों की लड़ाई लड़ता रहूंगा और प्रदेश के विकास को एक सकारात्मक दिशा देने में योगदान देने का प्रयास करूंगा। धन्यवाद

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