सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी बैंकों में जमा काले धन मामले की धीमी जांच को लेकर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाने के साथ काले धन को वापस लाने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों पर निगरानी रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बीपी जीवन रेड्डी के नेतृत्व में उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। जिसके दूसरे सदस्य पूर्व जज एमबी शाह हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार अब एचएलसी के सदस्य केंद्रीय राजस्व सचिव, भारतीय रिजर्व बैंक के उपनिदेशक, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्यक्ष, राजस्व खुफिया सूचना के महानिदेशक, मादक द्रव्य नियंत्रण विभाग के महानिदेशक, विदेश खुफिया कार्यालय के निदेशक, विदेश व्यापार विभाग के संयुक्त सचिव, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), खुफिया ब्यूरो (आईबी) और प्रवर्तन महानिदेशालय के निदेशक नवगठित एसआईटी के अधीन काम करेंगे तथा उच्चतम न्यायालय के प्रति जवाबदेह होंगे।
दुनिया भर में फैले गुप्त खातों वाले बैंकों के जाल के मद्देनजर न्यायालय ने देश की विदेश खुफिया एजेंसी रिसर्च एनालिसिस विंग (रॉ) के निदेशक को भी एसआईटी के साथ जोड़ने का निर्देश दिया है। सुप्रीमकोर्ट ने सोमवार को एक ऎतिहासिक आदेश में विदेशों में जमा काले धन का पता लगाने के लिए शीर्ष न्यायालय के दो पूर्व न्यायाधीशों की देखरेख में एक सशक्त विशेष जांच दल एसआईटी का गठन किया। जिसके अधीन देश की सभी प्रमुख खुफिया एवं जांच एजेंसियां रखी गई है जो मामले की तह तक पहुंचेंगी। विदेशों में जमा काले धन को लेकर जाने-माने अधिवक्ता राम जेठमलानी एवं अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी और न्यायाधीश एस एस निज्जर की खंडपीठ ने इस मामले में सरकार के नकारेपन की तीखी आलोचना करते हुए एसआईटी के गठन का अंतरिम आदेश दिया था।
खंडपीठ ने नवगठित जांच दल को काले धन के खिलाफ संहारक शक्ति प्रदान करते हुए केंद्र सरकार द्वारा पिछले दिनों गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचएलसी) को तत्काल प्रभाव से एसआईटी के मातहत कर दिया है। एचएलसी में देश विदेश में आर्थिक अपराधों की जांच करने वाले विभिन्न संस्थाओं और जांच एजेंसियों के अधिकारी शामिल हैं। गौरतलब है कि काफी समय से काले धन को लेकर केंद्र सरकार का रवैया टालमटोल वाला रहा है। कई नामों के खुलासे होने के बावजूद केंद्र सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही थी. पिछले दिनों काले धन को देश में वापस लाने को लेकर रामलीला मैदान में अनशन कर रहे बाबा रामदेव तथा उनके समर्थकों को दिल्ली पुलिस ने रात में ही लाठियों से खदेड़ दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद केंद्र सरकार की काफी किरकिरी हुई है।


