Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रदेश

काल का द्वार : पाताल पानी ने निगल डाली तीन जिंदगियां, जिम्‍मेदार कौन?

होनी भी इंसान को कहां से कहां खीच लाती है। मानो या न मानो पर ये सच्चाई है कि होनी जिस जगह, जिस वक्त और जैसे लिखी होती है, इंसान वैसे ही उस जगह पर पहुंच जाता है। ऐसी ही एक दर्दनाक कहानी इंदौर से 40 किलोमीटर दूर स्थित एक पर्यटक स्थल पातालपानी पर घटी। माना जाता है कि पातालपानी के नाम से प्रसिद्ध यह झरना हर साल लोगों की बलि लेता है। प्रत्येक वर्ष इस में किसी न किसी की जान जाती है। इस बार बलि के लिए राठी परिवार को चुना। पिकनिक मनाने गये राठी परिवार के चंद्रशेखर राठी, पत्नी सुमन, बेटी मुदिता, भतीजा कनिष्क व मुदिता की सहेली छवि माहेश्वरी झरने में बह गए। दर्दनाक हादसे में छवि, चंद्रशेखर राठी व उनकी बेटी मुदिता की मौत हो गई।

होनी भी इंसान को कहां से कहां खीच लाती है। मानो या न मानो पर ये सच्चाई है कि होनी जिस जगह, जिस वक्त और जैसे लिखी होती है, इंसान वैसे ही उस जगह पर पहुंच जाता है। ऐसी ही एक दर्दनाक कहानी इंदौर से 40 किलोमीटर दूर स्थित एक पर्यटक स्थल पातालपानी पर घटी। माना जाता है कि पातालपानी के नाम से प्रसिद्ध यह झरना हर साल लोगों की बलि लेता है। प्रत्येक वर्ष इस में किसी न किसी की जान जाती है। इस बार बलि के लिए राठी परिवार को चुना। पिकनिक मनाने गये राठी परिवार के चंद्रशेखर राठी, पत्नी सुमन, बेटी मुदिता, भतीजा कनिष्क व मुदिता की सहेली छवि माहेश्वरी झरने में बह गए। दर्दनाक हादसे में छवि, चंद्रशेखर राठी व उनकी बेटी मुदिता की मौत हो गई।

दस साल में अब तक पातालपानी में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि यहां प्रशासन ने एक आम सूचना बोर्ड व तीन साल पहले कंटीले तार लगवाए थे। मगर कई जगह से तार टूट गए हैं और सूचना को भी अनदेखा करते हुए लोग अंदर चले जाते हैं। बारिश के मौसम में छुट्टी वाले दिनों में सैलानियों की संख्या पांच हजार से भी ज्यादा होती हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो यहां सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं किए गए हैं। अब प्रशासन यहां होने वाले हादसों के लिए आम राय बनाने में लगा है।

क्या इलाके में धारा 144 लगाई जाए या फिर इसे बंद कर दिया जाए? प्रशासनिक अधिकारियों ने इस घटना के बाद आम जनता की राय मांगी हैं। इस मामले में अगर अपनी राय बताऊं तो यह है कि एक खूबसूरत पिकनिक स्पॉट होने के कारण इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए। हमारे देश में ऐसे कई धार्मिक और पर्यटन स्थल है जहां पर नदियां, झरनें, झीलें, तालाब व बर्फीलें पहाड़ जैसे प्राकृतिक सुंदर दृश्य हैं, जिसकी वजह से श्रृद्धालु और पर्यटक दोनों ही खिंचे चले आते हैं। लेकिन दुःख तो तब होता है, जब इस तरह के हादसे सामने आते हैं और फिर शासन-प्रशासन पर सवालिया निशान लगाये जाते हैं।

देश में अगर हम अपने अधिकारों की बात करते हैं तो मानव के कुछ मौलिक कर्तव्य भी होते है,  जिन्हें हम अक्सर भूल जाते हैं। इस तरह की घटना में गलतियां निकालने से समास्या का समाधान नहीं होने वाला। अगर इस तरह के पिकनिक स्पॉट खतरे से भरे हैं तो उन्हें सुरक्षित करने के इंतजाम सरकार को करने होंगे और जनता को उन निर्देशों का पालन करना होगा जिससे जान माल की हानि न हो।

प्राकृतिक स्थल जितने खुबसूरत देखने में लगते हैं, उतने ही खतरनाक भी होते हैं। प्राकृतिक नदियां, झरने, तालाब, झील व पर्वत श्रृंखलाएं सुरक्षा की दृष्टि से काफी हद तक असुरक्षित होते हैं। केवल हमारे देश में ही नहीं बल्कि प्रत्येक देश में इस तरह की घटनाएं होती है और रोमांच के चक्कर में लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं,  जिसके तहत इस तरह के स्थलों पर विशेष तौर पर कड़े इंतजाम किये जाते हैं। उनमें शामिल है सुरक्षा गार्ड का इंतजाम करना, सुरक्षा कवच की व्यवस्था करनी, लाइव जैकेट तथा प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मियों की नियुक्ति की जाती है। ऐसे ही सुरक्षा के इंतजाम इन खतरनाक स्थल में होना चाहिए। सुरक्षा के लिए कड़े निदेर्शों के साथ-साथ आपतकालीन सुरक्षा का इंतजाम भी करना चाहिए। तभी इस तरह की दुखद घटनाओं पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

लेखक जितेंद्र कुमार नामदेव गाजियाबाद में पत्रकार हैं.

 

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...