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काश ये आस्‍था ना होती, तो वे करोड़पति ना होते

बल्कि मैं तो ये कहना उचित समझूंगा कि वो अरबपति ना होते, दरअसल हम हिंदुस्तानी आस्था के लिए अंधे हैं, ऐसा इसलिए कहा क्योंकि हम बहुत सी चीज़ों में तो अपनी नज़रों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन जहां बात आस्था की आती है वहां हम आंखों पर पट्टी बांध लेते हैं, इसके कई उदाहरण हैं। हम किसी डॉक्टर के पास अपना इलाज कराने जाते हैं तो सबसे पहले ये पता करते हैं कि इस डॉक्टर की डिग्री क्या है, कहां से इसने ये डिग्री ली है… या फिर अपने बच्चों को किसी मास्टर के पास ट्यूशन के लिए भेजते हैं तो उसका भी पूरा एक्सरे करा लेते हैं, लेकिन बात जब आस्था की आती है तो आंखों पर पट्टी बंध जाती है। निर्मलजीत सिंह नरुला तो टीवी न्यूज़ चैनलों की ही देन हैं और अब टीवी चैनल ही अपना माथा पीट रहे हैं लेकिन इससे भी बड़े खेल हमारे देश में लगातार जारी हैं, और रातों रात चुनिंदा लोगों के वारे न्यारे कर रहे हैं। आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर अब ऐसा क्या हो गया, अब किसकी बारी है। दरअसल निर्मलजीत सिंह नरुला तो पिछले कुछ ही सालों से टीवी पर फर्ज़ीवाड़ा कर करोड़ों कूट रहा है लेकिन कई ऐसे ग्रुप हैं जो निर्मलजीत सिंह नरुला से भी पहले से करोड़ों के वारे न्यारे करने में जुटे हैं और आज तक शायद गहनता से किसी ने इसके बारे में सोचा भी नहीं है।

बल्कि मैं तो ये कहना उचित समझूंगा कि वो अरबपति ना होते, दरअसल हम हिंदुस्तानी आस्था के लिए अंधे हैं, ऐसा इसलिए कहा क्योंकि हम बहुत सी चीज़ों में तो अपनी नज़रों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन जहां बात आस्था की आती है वहां हम आंखों पर पट्टी बांध लेते हैं, इसके कई उदाहरण हैं। हम किसी डॉक्टर के पास अपना इलाज कराने जाते हैं तो सबसे पहले ये पता करते हैं कि इस डॉक्टर की डिग्री क्या है, कहां से इसने ये डिग्री ली है… या फिर अपने बच्चों को किसी मास्टर के पास ट्यूशन के लिए भेजते हैं तो उसका भी पूरा एक्सरे करा लेते हैं, लेकिन बात जब आस्था की आती है तो आंखों पर पट्टी बंध जाती है। निर्मलजीत सिंह नरुला तो टीवी न्यूज़ चैनलों की ही देन हैं और अब टीवी चैनल ही अपना माथा पीट रहे हैं लेकिन इससे भी बड़े खेल हमारे देश में लगातार जारी हैं, और रातों रात चुनिंदा लोगों के वारे न्यारे कर रहे हैं। आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर अब ऐसा क्या हो गया, अब किसकी बारी है। दरअसल निर्मलजीत सिंह नरुला तो पिछले कुछ ही सालों से टीवी पर फर्ज़ीवाड़ा कर करोड़ों कूट रहा है लेकिन कई ऐसे ग्रुप हैं जो निर्मलजीत सिंह नरुला से भी पहले से करोड़ों के वारे न्यारे करने में जुटे हैं और आज तक शायद गहनता से किसी ने इसके बारे में सोचा भी नहीं है।

चलिए एक कहानी कहता हूं। एक मोबाइल कंपनी में टॉप लेवल के लोग रात को बैठकर शराब पी रहे थे, मस्ती का माहौल फाइवस्टार होटल, शराब के साथ साथ बिज़नेस स्ट्रैटजी पर भी चर्चा जारी थी, किस तरीके से रेवेन्यू बढ़ाया जाए, देश के किस हिस्से में कंपनी का नेटवर्क नहीं है, कहां नेटवर्क रेंज बढ़ाने से कितना फायदा मिलेगा, किस इलाके में किस वर्ग के लोग ज्यादा है ऐसी तमाम बातें लगातार जारी थीं, लेकिन तभी उन सभी टॉप लेवल के लोगों का बिग बॉस भी वहां आ पहुंचा और सबको ज़बरदस्त तरीके से अंग्रेजी में गालियां देने लगा। शायद जनाब या तो बीवी से पिटकर आये थे या फिर किसी मंत्री ने फाइल खोलने की धमकी दे दी थी। बस फिर क्या था बिग बॉस ने गुस्से में तमतमाए चेहरे के साथ सबको 24 घंटों के भीतर 1 करोड़ का रेवेन्यू लाने का आदेश दे दिया और साथ ही धमकी भी दे डाली की अगर टारगेट पूरा नहीं हुआ तो कहीं और काम धंधा ढूंढ लेना। इतना कहते हुए और दो चार अंग्रेजी गालियों की बरसात करते हुए बिग बॉस वहां से चले गये। अब टॉप लेवल के लोगों की शराब तो उतर गई थी। सवाल ये था कि आखिर 24 घंटों के भीतर 1 करोड़ का टारगेट कैसे पूरा होगा।

शराब के और दो चार पैग चढ़ाये गये और साथ ही बॉस को पीठ पीछे गालियां भी दी गई लेकिन तभी उनमें से एक को खुराफात सूझी और उसने तुरंत अपने बैग में से अपना लैपटॉप निकाला और देश के अलग-अलग हिस्सों में उसकी कंपनी के इस्तेमाल हो रहे करीब 100 मोबाइल नंबर सलेक्ट किये, साथ में बैठे उसके साथियों को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ये कर क्या रहा है, तभी उसने अपने साथियों से पूछा कि हिंदू धर्म में कौन से भगवान को आजकल सबसे ज्यादा पूजा जा रहा है तो किसी ने बोला मां वैष्णो देवी, किसी ने कहा गणपति बप्पा, किसी ने साईं बाबा तो किसी ने कहा भगवान भोले नाथ, बस फिर क्या था उसने तुरंत अपने लैपटॉप में लिख डाला “मां वैष्णो देवी की कृपा से आपके जीवन में खुशहाली आएगी इस मैसेज को दस लोगों तक पहुंचाएं.. मां प्रसन्न होंगी और आपके बिगड़े काम तुरंत बन जाएंगे.. इस मैसेज को इग्नोर मत करना वरना मां नाराज़ हो जाएंगी”। इतना लिखकर उसने तुरंत ये मैसेज 100 लोगों के नंबर पर भेज दिया।

बगल में बैठे बाकी साथी हैरान थे कि आखिर ये कर क्या रहा है एक ने तो कमेंट भी कर दिया, “अबे पागल हो गया है क्या लगता है बॉस की गालियों का असर सीधे दिमाग़ पर हुआ है अरे देखो इसका तो स्क्रू ढीला हो गया, अबे ये मैसेज करने से एक करोड़ नहीं आएंगे कुछ सोच नहीं तो अपना बायोडाटा तैयार कर ले शराब के नशे में ज्यादा अच्छा बनेगा”, लेकिन भाई साहब ये सब अनसुना किये जा रहे थे औऱ मंद मंद मुस्करा रहे थे। अगले 15 मिनटों में उसने कंपनी का रेवेन्यू अकाउंट एक्सेस किया और देखा तो पता चला कि उस एक मैसेज की बदौलत 15 मिनटों के भीतर कंपनी के अकाउंट में 5 लाख रुपये से भी ज्यादा का इज़ाफ़ा हो चुका था, उसने तुरंत अपने लैपटॉप की स्क्रीन अपने साथियों की तरफ की और चुटकी लेते हुए कहा कि देखो देखो मां की कृपा 15 मिनट में 5 लाख रुपये से भी ज्यादा आ गये कंपनी के खाते में, यही सिलसिला लगातार जारी रहा और चौबीस घंटों के भी भीतर कंपनी के अकाउंट में करीब ढाई करोड़ रुपये जमा हो चुके थे। बस फिर क्या था बॉस भी खुश और कंपनी के टॉप लेवल के लोग भी खुश। नेता जी को रिश्वत चली गई और फाइल बंद हो गई और ढाई करोड़ 24 घंटों में लाने वाले कंपनी के टॉप लेवल के लोगों का लेवल और भी टॉप हो गया।

ये थी एक एसएमएस की कहानी, ज़ाहिर है मुझे ये कहने की ज़रुरत नहीं है कि ये मेरी कल्पना भर है, हां इसके कुछ अंश काल्पनिक ज़रुर हैं लेकिन कहानी सच्ची है। अब उन तमाम लोगों से पूछिये जिनके पास इस तरह के मैसेज लगभग रोज़ आते हैं, क्योंकि हमारे देश में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हर घर्म के लोग निवास कर रहे हैं इसलिए इन संदेशों के टैक्स्ट अलग-अलग होते होंगे लेकिन हर मैसेज के पीछे मकसद सिर्फ एक होता है और वो है कारोबार। एक मैसेज रातों रात करोड़ों के वारे न्यारे करा जाता है, बुद्धि को थोड़ा दौड़ाइयेगा तो आसानी से समझ में आ जाएगा कि ये खेल कितने बड़े पैमाने पर चल रहा है, अब कॉरपोरेट जगत के लोग या फिर मैनेजमेंट गुरु जैसे लोग इसे बिज़नेस स्ट्रैटजी कहते हैं लेकिन मेरी नज़र से देखियेगा तो अंधी आस्था के चलते लोगों का बेवकूफ़ बनाया जा रहा है और लोगों की इसी बेवकूफी के चलते अमीर और अमीर होते जा रहे हैं और गरीब अनकी झोलियां भरते जा रहे हैं।

आखिर क्यों हम आस्था के नाम पर किसी भी चीज़ पर आंख मूंद कर भरोसा कर लेते हैं, ईश्वर के नाम पर कोई भी आकर धमका दे बस ज़िंदगीभर उसकी गुलामी करने के लिए तैयार हो जाते हैं। आखिर हम ये क्यों भूल जाते हैं कि “कर्म ही पूजा है”। क्यों इस तरह की बातों से हम सब जानते हुए भी अनजान बन जाते हैं। अगर ऐसे ही चलता रहा तो हज़ारों निर्मल बाबा पैदा होंगे क्योंकि एक और कड़वा सच ये है कि हमारे देश में लोगों की यादाश्त बड़ी कमज़ोर है, कुछ दिन तक जब तक न्यूज़ चैनल और न्यूज़ चैनलों पर बैठे पप्पू कुमार भोंके जा रहे हैं तब तक जनता को निर्मल बाबा जैसे लोग याद रहेंगे लेकिन जैसे ही पप्पू पास हुआ लोगों की यादाश्त भी फीकी पड़ जाएगी और फिर सजेगा एक और तीसरी आंख वाले बाबा का दरबार या ये कहना भी गलत नहीं होगा कि अंधविश्वास का दरबार…इसलिए जागो भारत जागो।

लेखक शगुन त्‍यागी सहारा समय चैनल के साथ लम्‍बे समय तक जुड़े रहे हैं. वे इन दिनों नॉर्थ ईस्‍ट बिजनेस रिपोर्टर मैग्‍जीन के दिल्‍ली-एनसीआर ब्‍यूरोचीफ के तौर पर जुड़े हुए हैं. सगुन से संपर्क मोबाइल नम्‍बर 07838246333 के जरिए किया जा सकता है.

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