हिसार। हिसार लोकसभा उपचुनाव के लिए वोटों की गिनती जारी है। पर कांग्रेस ने अभी से ही हार मान ली है। ताजा रुझानों के मुताबिक हरियाणा जनहित कांग्रेस के उम्मीदवार कुलदीप विश्नोई सबसे आगे हैं। उन्हें अब तक 2,26,854 वोट मिल चुके हैं। इंडियन नेशनल लोकदल के उम्मीदवार अजय चौटाला दूसरे स्थान पर चल रहे हैं, जिन्हें अब तक 1,97,127 वोट मिले हैं। तीसरे स्थान पर मौजूद कांग्रेस के जयप्रकाश को ताजा रुझानों के मुताबिक महज 82,569 वोट मिल पाए हैं। हिसार में बिश्नोई समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है।
कांग्रेस में इस हार को लेकर मंथन शुरू हो चुका है। यह भले ही एक उपचुनाव में सामान्य हार हो परन्तु जिस तरह जनलोकपाल के मुद्दे पर अन्ना की टीम ने कांग्रेस के खिलाफ प्रचार किया था, उससे यह हार बड़ा हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी का तीसरे स्थान पर आना पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन गया है। इधर, अन्ना की टीम ने कांग्रेस की हार का श्रेय लिया है। अरविंद केजरीवाल का कहना है कि जनलोकपाल पर कांग्रेस के रूख से नाराज मतदाताओं ने कांग्रेस को वोट नहीं दिया। उन्होंने कुलदीप विश्नोई की जीत में टीम अन्ना के योगदान से नकार दिया। उन्होंने कहा कि हमने केवल कांग्रेस के पक्ष में मतदान न करने की अपील की थी, किसी को जिताने की नहीं।
कुलदीप विश्नोई ने भी जीत की तरफ बढ़ते कदम को देखते हुए कहा कि अगर भगवान की दया से मेरी जीत होती है तो ये मेरे पिता द्वारा किए गए हिसार की जनसेवा तथा भाजपा के सहयोग तथा जनता के आशीर्वाद से संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि मेरी जीत टीम अन्ना की वजह से नहीं हुई है। टीम अन्ना ने सिर्फ कांग्रेस को वोट ना करने की अपील की थी, इसका फायदा शेष 38 प्रत्याशियों को हुआ। कांग्रेस की हार में उनका योगदान हो सकता है पर मेरी जीत में टीम अन्ना का कोई योगदान नहीं है। व्यक्तिगत रूप में मैं अन्ना का काफी सम्मान करता हूं।
इधर, कांग्रेस की करारी हार को देखते हुए राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि हिसार चुनाव में जिस तरह सिर्फ टीम अन्ना के सदस्यों के प्रचार मात्र से ही कांग्रेस तीसरे स्थान पर खिसक गई तथा उसका प्रत्याशी एक लाख वोटों को भी पार करता नहीं दिख रहा है, उस स्थिति में अगर आने वाले पांच राज्यों के चुनाव में टीम अन्ना और अन्ना खुद कांग्रेस के खिलाफ प्रचार करेंगे तो क्या हाल होगा, क्योंकि इस चुनाव में तो सिर्फ टीम अन्ना ने ही प्रचार किया था। अन्ना तो आए भी नहीं थे, उसके बावजूद कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है।


