मुंबई : बांबे हाईकोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह व उनके परिवार वालों के खिलाफ पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए मुंबई पुलिस आयुक्त अरूप पटनायक को नियुक्त करने के साथ ही सिंह की संपत्ति भी जब्त करने का आदेश दिया है। बीएमसी चुनाव में पार्टी की हुई दुर्गति और आय से अधिक संपत्ति के मामले में बुरी तरह फंसे कृपाशंकर सिंह का जाना पहले से तय था, जिस पर बुधवार को मुहर लग गई। पार्टी ने उनका इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया है। हाई कोर्ट में आदेश के बाद उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह व न्यायमूर्ति रोशन दलवी की खंडपीठ ने सिंह की संपत्ति की जांच के संदर्भ में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की रिपोर्ट को एफआईआर के रूप में स्वीकार किया है। यही नहीं खंडपीठ ने एसीबी द्वारा इस मामले की जांच के संदर्भ में सौंपी गई दो रिपोर्टो में विरोधाभास पाया है। लिहाजा खंडपीठ ने सिंह के बेटे, बहू व पत्नी के नाम चल व अचल संपत्ति जब्त करने को कहा है जिसमें गाड़ी, बंगला व जमीन शामिल है। ग़ौरतलब है कि आरटीआई एक्टीविस्ट संजय तिवारी ने साल 2010 में दायर की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह आदेश दिए हैं। हाल ही में कृपा के बेटे नरेंद्र मोहन सिंह पर आरोप लगे हैं कि 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले में फंसे शाहिद बलवा के बिज़नेस पार्टनर और डायनामिक्स कंपनी के मालिक विनोद गोयनका ने 4 करोड़ रुपये उनके बैंक अकाउंट में जमा किए थे।
खंडपीठ ने मुकदमा चलाने से जुड़ी सारी प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने को कहा है। फैसले में हाईकोर्ट ने साफ किया है कि इस मामले की जांच के दौरान कोई भी ऐसा दस्तावेज देखने को नहीं मिला है जो सिंह के वित्तीय व्यवहार व संपत्ति की खरीद-फरोख्त को पुष्ट कर सके। प्रथम दृष्टया इस याचिका को पढ़ने के बाद ही सिंह के खिलाफ आपराधिक मामला बनता है। ऐसे में पुलिस आयुक्त जल्द से जल्द सिंह व उनके परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज हर संपत्ति का अलग से मूल्यांकन करें। फैसले में खंडपीठ ने कहा है कि सिंह व उसके परिवार की ओर से किए गए वित्तीय व्यवहार कई संदेह पैदा करते हैं। खंडपीठ ने पुलिस को इस मामले से जुड़े सिंह के आपराधिक अपकृत्य की जांच भ्रष्टाचार विरोधी कानून के तहत करने को कहा है और इसकी रिपोर्ट 19 अप्रैल को हाईकोर्ट में सौंपने को कहा है। याचिकाकर्ता श्री तिवारी ने याचिका में सिंह के पास 600 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति होने का दावा किया था।
इसके साथ ही झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के साथ संबंध होने का दावा भी किया था। यही नहीं सिंह के खाते से हुए पैसे के लेनदेन पर भी सवाल खड़े किए गए थे। शुरुआत में इस मामले की जांच करते हुए आयकर, एसीबी व डीआरआई ने सिंह को प्रारंभिक जांच में क्लीनचिट दे दी थी। इसके साथ ही यह स्पष्ट किया था कि उनके पास सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। पर हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़ी जांच एजेंसियों को शीघ्र ही फाइनल रिपोर्ट पेश करने को कहा था। याचिका के मुताबिक सिंह 1970 में उत्तर प्रदेश से मुंबई आए थे। जहां उन्होंने पहले फेरीवाले के रूप में आलू-प्याज बेचने का काम किया। इस बीच वे विधान परिषद सदस्य चुने गए। सिंह ने गृह राज्य मंत्री के रूप में भी कार्य किया। वर्तमान में एक विधायक का मासिक वेतन 45 हजार रुपए प्रति माह है। याचिकाकर्ता के मुताबिक इसका कुल योग 24 लाख रुपए के करीब बैठता है। इसमें हैरत की बात यह है कि उन्होंने 14 लाख रुपए विमान यात्रा के किराए पर खर्च किए हैं। एक लोक सेवक के रूप में उन्होंने करोड़ों रुपए की संपत्ति कैसे अर्जित की इसका कोई दस्तावेजी सबूत मौजूद नहीं है। यही स्थिति सिंह के बेटे व पत्नी की संपत्ति को लेकर भी है।
याचिकाकर्ता के वकील महेश जेठमलानी ने सिंह के आय के स्रोत पर कई सवाल उठाए थे। इसके साथ ही सिंह के आय के स्रोत का ब्यौरा पेश करने की मांग की थी। पर इस संदर्भ में हाईकोर्ट में कोई ठोस चीज नहीं पेश की गई। सिंह के वकील मुकुल रोहतगी ने इस पूरे मामले को राजनीति से प्रेरित बताया था। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद खंडपीठ ने बुधवार को पुलिस को इस मामले में सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। इस दौरान सिंह की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने फैसले पर स्थगन (स्टे) लगाने की मांग की जिसे खंडपीठ ने स्वीकार नहीं किया। इधर, बीएमसी के चुनाव में कांग्रेस की हार से मुश्किल में चल रहे कृपाशंकर सिंह की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने बीएमसी में हार और हाई कोर्ट के आदेश के बाद मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे पार्टी ने स्वीकारे कर लिया।


