आपने लोगों को अक्सर कहते सुना होगा कि जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, वक्त उतनी ही तेज़ी से गुजरता चलता है, लेकिन अगर एक नए वैज्ञानिक सिद्धांत की माने तो इस आम घारणा का उल्टा सच्चाई से ज्यादा करीब है. शोधकर्ताओं के इस मौलिक सिद्धांत के अनुसार एसा हो सकता है कि वक्त की रफ्तार अपने आप ही धीमी होती जा रही हो और एक दिन इसकी गति शून्य हो जाए. स्पेन के दो विश्वविद्यालयों में चल रहे इस शोध के चौकाने वाली खोज से पता चलता है कि ब्रह्मांड के फैलने चले जाने की आम सोच बिल्कुल गलत है.
अलबत्ता शोधकर्ताओं का मानना है कि समय की गति परिवर्तित होकर धीमी होती जा रही है और अब से अरबों वर्षों में ये रुक भी सकती है. नया खोज चिंतित करने वाला जरूर लगता है लेकिन इससे डरना या इसके बारे में सोच-विचार में ज्यादा वक्त बर्बाद करने की आवश्यक्ता नहीं है. वैज्ञानिकों के अनुसार, हमारी आंखें समय की गति में परिवर्तन को पकड़ नहीं पाती. उनका कहना है कि वैसे भी ऐसी स्थिति का सामना करने के लिए हम लोगों में से कोई जीवित नहीं होगा.
प्रोफेसर सेनोविला ने न्यू साइंटिस्ट पत्रिका को बताया, “ऐसी स्थिति में सब कुछ हमेशा के लिए स्थिर हो जाएगा, जैसी की कोई तस्वीर होती है.” पृथ्वी से दूर स्थित आकाशगंगा में बसे तारों से आने वाली रोशनी को माप कर वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि ब्रह्मांड तेजी से फैल रही है. इस सिद्धांत के पीछे का मुख्य बिंदु ब्लैक होल है. माना जाता है कि इसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति से आकाशगंगाएं अपने स्थान परिवर्तित कर रही है. हालांकि नए शोध से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि वो इसके विपरीत के सिद्धांत पर काम कर रहें हैं.
प्रोफेसर सेनोविला मानते है कि वर्तमान में जिस सिद्धांत पर वैज्ञानिक भरोसा करते है वो बिल्कुल गलत है. सेनोविला के समर्थन में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के एक खगोलविद का मानना है कि समयचक्र से जुड़ा नए सिद्धांत में काफी दम है. उन्होंने कहा, “हम मानते है कि समयचक्र बिग बैंग की वजह से अस्तित्व में आया, और जब ये आ सकता है तो ये गायब भी हो सकता है, ये सिर्फ विपरीत प्रभाव की बात है.
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